सही सिद्ध हुई YuvaPress.com की चेतावनी : राहुल को महंगा पड़ सकता है खुद ‘सुप्रीम कोर्ट’ बन जाने का राजनीतिक उन्माद, अपरिपक्वता ने करा दी अदालती अवमानना ? दोषी पाए जाने पर हो सकती है जेल भी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राफेल मुद्दे पर लीक दस्तावेजों को वैध मान कर उन पर पुनर्विचार करने और सुनवाई करने की हामी क्या भरी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुशी से बल्लियाँ उछल पड़े। वे खुशी से फूले नहीं समा रहे थे और इस उत्साह में उन्हें ये तक नहीं पता था कि वे राजनीतिक घमासान में अपने विरोधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले के कारण ‘चौकीदार ही चोर है’ कह रहे हैं, वह कितना सही है ?

राफेल डील में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उद्योगपति अनिल अंबाणी को 30 हजार करोड़ रुपए का फायदा पहुँचाने का लगातार आरोप लगा रहे राहुल गांधी को SC के गुरुवार के फैसले में न जाने ऐसा क्या दिखा कि उन्होंने इस फैसले को केवल राजनीतिक चश्मे से पढ़ते हुए सीधे-सीधे शब्दों में कह डाला, ‘सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि चौकीदार चोर है, चौकीदार ने चोरी कराई है।’

युवाप्रेस.कॉम ने राहुल के इस उन्मादी वक्तव्य को लेकर गुरुवार को ही चेतावनी दे दी थी कि राहुल के विरुद्ध इस तरह की ग़लतबयानी के चलते अवश्य अदालती अवमानना का केस होगा और आज ऐसा ही हो भी गया। भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने यह पहल की और सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की याचिका दाखिल कर दी।

युवाप्रेस.कॉम का 10 अप्रैल का राहुल को चेतावनी देने वाला आर्टिकल का यहाँ CLICK कर पढ़ें

फँस सकते हैं राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव 2019 के प्रथम चरण के मतदान से ऐन 24 घण्टे पहले आए एससी के निर्णय का राजनीतिक फायदा उठाने में जो उन्माद दिखाया, वह उन्हें भारी पड़ सकता है। एससी के निर्णय पर राहुल ने जब ‘सुप्रीम कोर्ट ने माना चौकीदार चोर है, चौकीदार ने ही चोरी कराई है’ कहा, तभी उनके फँसने की आशंकाएँ पैदा हो चुकी थीं। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन भी कह चुकी थीं कि राहुल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत अवधारणा कर कोर्ट की अवमानना की है। अब भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी की ओर से राहुल के विरुद्ध दाखिल की गई अवमानना याचिका को सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वीकार कर लेना भी राहुल के लिए बड़ा झटका है। सुप्रीम कोर्ट लेखी की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा। मिनाक्षी लेखी ने याचिका में आरोप लगाया है कि राहुल ने राफेल पर एससी के आदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। इतना ही नहीं, राहुल ने ‘चौकीदार चोर है’ का बयान इस तरह पेश किया, जैसे वह सुप्रीम कोर्ट का बयान हो। राहुल ने राफेल मामले में गोपनीय दस्तावेज को बहस का हिस्सा न बनाने संबंधी कोर्ट के आदेश को भी ग़लत तरीके से लोगों के सामने पेश किया।

दोषी पाए जाने पर क्षमा या कारावास का विकल्प

किसी भी अदालत की अवमानना एक गंभीर अपराध माना जाता है। इसमें भी मामला जब सुप्रीम कोर्ट से जुड़ा हुआ हो, तब किसी भी व्यक्ति, खास कर राजनेता को सावधानी से किसी निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए, परंतु राहुल गांधी ने अति उत्साह में आकर राफेल पर एससी के फैसले पर ऐसे बयान दिए, मानो राफेल डील में भ्रष्टाचार होने, अनिल अंबाणी को फायदा पहुँचाने, पीएम मोदी के लिप्त होने पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद मुहर लगा दी हो। अदालत की अवमानना धारा 15 का उल्लंघन मानी जाती है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने अपराधी को छह माह का कारावास, 2 हजार रुपए तक का दंड या दोनों सजा देने का प्रावधान है। यद्यपि अदालत अपराधी को क्षमा भी कर सकती है, यदि अपराधी क्षमा मांगे तो। राहुल यदि दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें कारावास-दंड की सजा सुनाई जा सकती है। राहुल के पास क्षमा याचना का विकल्प रहेगा, परंतु इस पर निर्णय सुप्रीम कोर्ट के विवेक पर निर्भर रहेगा। ऐसे में चुनावी मौसम में राहुल गांधी के लिए 18 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से पहले 14 अप्रैल सोमवार को महत्वपूर्ण कानूनी पचड़े से गुजरना होगा।

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