एक और सर्वे ने कहा, ‘नमो-नमो’, राहुल की ‘NYAY’ बेअसर, ग़रीब मोदी के साथ, सम्मान निधि से हर्षित किसान सभी वर्गों का एक ही सुर, ‘फिर एक बार-मोदी सरकार’

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले एक और चुनाव पूर्व सर्वेक्षण सामने आया है। यह सर्वेक्षण भी अन्य कई सर्वेक्षणों की तरह देश में 23 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की जीत का ही संकेत दे रहा है।

सीएसडीएस-लोकनीति और भास्कर की ओर से गत 24 से 31 मार्च के बीच कराए गए इस सर्वे में देश की 101 लोकसभा सीटों में शामिल 101 विधानसभा सीटों के 10,010 लोगों से सवाल-जवाब किए गए और 45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही बनने चाहिए, जबकि राहुल को प्रधानमंत्री के रूप में देखने की इच्छा रखने वालों का प्रतिशत 32 ही रहा।

नुकसान के बावजूद बनेगी मोदी सरकार

इस सर्वेक्षण के अनुसार लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा और एनडीए को 2014 की तुलना में 50 से 70 सीटों का नुकसान होगा, परंतु फिर भी सरकार मोदी ही बनाएँगे। सर्वेक्षण के निष्कर्षों के अनुसार लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को 263 से 283 सीटें मिलने का अनुमान है, जो 2014 की 336 सीटों के मुकाबले कम हैं, तो यूपीए 2014 की 59 सीटों से बढ़ कर 115 से 115 सीटों तक पहुँच सकता है। अन्य दलों ने 2014 में 148 सीटें जीती थीं, जबकि 2019 में उन्हें 135 से 115 सीटें मिल सकती हैं। कुल मिला कर सबसे बड़ी पार्टी और गठबंधन के रूप में भाजपा-एनडीए ही आएँगे और सरकार मोदी ही बनाएँगे।

भाजपा के जनाधार में 1 माह में भारी उछाल

इस सर्वेक्षण के अनुसार भाजपा-एनडीए को लोकसभा चुनाव 2019 में 41 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं, परंतु एक माह पहले यह आँकड़ा बहुत ही कम था। एक माह में जनाधार में भारी उछाल आया है। सर्वेक्षण के अनुसार मई-2017 में एनडीए 45 प्रतिशत लोगों की पसंद था, परंतु जनवरी-2018 में इसका मत प्रतिशत घट कर 40 और मई-2018 में और घट कर 37 पर आ गया था। 11 महीनों में यह 4 प्रतिशत बढ़ कर 41 पर पहुँच गया है। दूसरी तरफ यूपीए का मत प्रतिशत मई-2017 में 27 था, जो जनवरी-2018 में बढ़ कर 30 और मई-2018 में बढ़ कर 31 तक पहुँचा, परंतु 11 महीनों बाद इसमें 1 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 30 प्रतिशत पर आ गया।

‘NYAY’ बेअसर-सम्मान का प्रभाव, ग़रीब-किसान मोदी के साथ

सर्वेक्षण के निष्कर्षों पर ग़ौर करें, तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश के ग़रीबों के लिए जो न्यूनतम् आय योजना (NYAY) लेकर आए हैं, वह मतदाताओं पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं डाल रही है। सर्वेक्षण कहता है कि देश का ग़रीब एनडीए के साथ है। 38 प्रतिशत ग़रीबों ने एनडीए को वोट देने की बात कही, जबकि यूपीए को केवल 28 प्रतिशत ग़रबी ही वोट देने पर सहमत हुए। इसी प्रकार किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस-राहुल के मोदी सरकार के विरुद्ध हल्लाबोल की भी यह सर्वेक्षण हवा निकाल रहा है। मोदी सरकार की किसान सम्मान निधि का साफ असर सर्वेक्षण में दिखाई दिया। सर्वेक्षण के अनुसार 44 प्रतिशत किसानों ने एनडीए को वोट देने की बात कही, तो 32 प्रतिशत किसान यूपीए को वोट देने की बात कर रहे हैं।

उच्च-मध्यम-निम्न वर्ग का भी मोदी को समर्थन

अब बात करें उच्च, मध्यम और निम्न वर्ग के मतदाताओं की, तो सर्वेक्षण के अनुसार उच्च वर्ग का मतदाता मोदी सरकार से थोड़ा नाराज़ अवश्य है, परंतु इसके बावजूद 46 प्रतिशत उच्च वर्ग के मतदाता चाहते हैं कि देश में फिर मोदी सरकार बने, जबकि 32 प्रतिशत ने कांग्रेस का समर्थन किया। मध्यम वर्ग के 45 प्रतिशत मतदाताओं का रुख फिर एक बार-मोदी सरकार वाला रहा, जबकि 33 प्रतिशत को लगता है कि यूपीए सरकार बननी चाहिए। निम्मन वर्ग के भी 40 प्रतिशत मतदाता देश में मोदी सरकार चाहते हैं, जबकि 29 प्रतिशत को लगता है कि यूपीए सरकार बननी चाहिए।

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