नवीन पटनायक : देश का एकमात्र ‘NON BJP-NDA’ नेता, जिसने कभी नहीं की ‘मोदी विरोध’ की राजनीति

राशि और शैली एक : ‘फानी’ ने भी मिटाई दूरियाँ अनेक, 23 मई के बाद NDA का हिस्सा हो सकता है BJD ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 14 मई, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा से तीन साल पहले से और घोषणा के बाद लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस सहित अनेक मोदी विरोधी राजनीतिक दल अंतिम चरण के मतदान से पहले तक पूरा एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। सबसे पहले राजधानी दिल्ली में सक्रिय हुई मोदी विरोधी टोली ने बाद में बेंगलुरू, कोलकाता, जयपुर, रायपुर और भोपाल तक अपनी एकता का प्रदर्शन किया। यद्यपि मोदी विरोधी टोली की राजनीति का मुख्य केन्द्र राजधानी दिल्ली ही रही, परंतु दिल्ली से 1,650 किलोमीटर दूर भुवनेश्वर में कहीं कोई हलचल नहीं दिखाई दी।

एकमात्र मोदी विरोध के एजेंडा पर चल रहे कांग्रेस, उसके अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) व उसकी अध्यक्ष ममता बैनर्जी, समाजवादी पार्टी (सपा-SP) व उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा-BSP) व उसकी अध्यक्ष मायावती, तेलुगू देशम् पार्टी (TDP) व उसके अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) व उसके अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव, जनता दल ‘सेकुलर’ (JDS) व उसके संस्थापक एच. डी. देवगौड़ा, उनके पुत्र एच. डी. कुमारस्वामी और वामपंथी दलों व उनके केन्द्रीय नेता सीताराम येचुरी सहित कई और राजनीतिक दल और उनके असंख्य नेता पिछले तीन वर्षों से लगातार नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध विषवमन करते रहे और कर रहे हैं। इन सबके बीच देश के अति ग़रीब राज्यों में शामिल ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (BJD) और उसके मुखिया तथा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक कभी भी-कहीं भी इस मोदी विरोधी टोली का हिस्सा नहीं बने। बीजेडी और नवीन पटनायक ने अपनी राजनीति का केन्द्र् ओडिशा तक ही सीमित रखा और दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर नरेन्द्र मोदी और नवीन पटनायक सरकार ने संघीय भावना के अनुरूप काम किया। दिल्ली से लेकर कई शहरों तक मोदी विरोधी एकता का प्रदर्शन करने वाले नेताओं ने एक-दूसरे के हाथ थामे, परंतु इन नेताओ में नवीन पटनायक का हाथ कभी नज़र नहीं आया।

नरेन्द्र-नवीन एक-दूसरे के प्रशंसक

नवीन और बीजेडी यदि मोदी विरोधी टोली का हिस्सा नहीं हैं, तो वे भाजपा या एनडीए का हिस्सा भी नहीं हैं। आश्चर्य की बात तो है कि ओडिशा में हो रहे लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों भाजपा बीजेडी के विरुद्ध चुनाव लड़ रही है, परंतु नवीन पटनायक ने ऐसी रणनीति अपनाई है, जो ओडिशा के हित में रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की न केवल नाम राशि एक है, अपितु कार्यशैली भी एक है। दोनों नेता एक-दूसरे के प्रशंसक भी रहे हैं। समय-समय पर दोनों नेताओं ने भले ही खुलेआम एक-दूसरे की प्रशंसा न की हो, परंतु कम से कम एक-दूसरे के विरुद्ध विषवमन तो कभी नहीं किया। पिछले पाँच वर्षों में जिस तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने न केवल मोदी के विरुद्ध विषवमन किया, अपितु मोदी सरकार की योजनाओं को लागू करने में भी उदासीनता बरती, वहीं ओडिशा की नवीन सरकार ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा बनाए रखते हुए संघीय ढाँचे के अनुरूप मोदी सरकार की हर योजना को जन-जन तक पहुँचाने का काम किया और राज्य हित को सर्वोपरि रखा। 23 मई के बाद भी यदि नरेन्द्र-नवीन की जोड़ी आगे भी साथ काम करती रहे, तो ओडिशा की 4.65 करोड़ जनता का ही भला होगा।

संघीय ढाँचे की कसौटी पर खरे उतरे नवीन

ओडिशा की दृष्टि से 2019 का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहाँ के लोगों में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अत्यंत लोकप्रिय है, तो देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी को ही देखने की चाहत है। अब जबकि केन्द्र और राज्य की सरकारों के लिए एक साथ चुनाव हो रहे हैं, तब ओडिशा के 4.65 करोड़ लोगों की भलाई तो इसी में है कि राज्य में नवीन और केन्द्र में नरेन्द्र सरकार वापसी करे। जहाँ तक भाजपा-बीजेडी और मोदी-पटनायक का प्रश्न है, तो दोनों के बीच दलगत विरोध से अधिक कोई खटाश नहीं है, परंतु चुनावी सरगर्मी के बीच आए फानी चक्रवात ने इस खटाश को लगभग ख़त्म करने का काम किया है। फानी का संकट चार राज्यों पर मंडरा रहा था, परंतु एक तरफ जहाँ ममता ने यह कह कर मोदी का फोन नहीं उठाया कि वे एक्सपायरी पीएम के साथ मंच साझा नहीं करना चाहतीं, तो दूसरी तरफ नवीन पटनायक ने मोदी सरकार की मुस्तैदी और दिल्ली से पहुँचाई गई हर मदद ली। साथ ही नवीन सरकार ने भी पूरी दुनिया को दंग कर देने वाला आपदा प्रबंधन का दम दिखाया, जिससे इस ख़तरनाक तूफान से ओडिशा के लोगों को अत्यंत कम हानि पहुँची।

‘फानी’ बनेगा ‘फलदायी’ ?

अब नवीन पटनायक ने फानी संकट के बीत जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा है। पटनायक ने फानी से निपटने में केन्द्र सरकार की ओर से दिखाई गई तत्परता और की गई सहायता के लिए मोदी की प्रशंसा की है। नवीन पटनायक ने मोदी को लिखे पत्र में कहा, ‘मैं अत्यंत गंभीर चक्रवात फानी और इसके बाद की स्थिति से असरदार तरीके से निपटने में ओडिशा का सहयोग करने के लिए केन्द्र सरकार को धन्यवाद देता हूँ। साथ ही मिट्टी का तेल देने की मंजूरी देने पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी धन्यवाद देता हूँ। मौसम विभाग की ओर से फानी तूफान के बारे में जानकारी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तुरंत स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की और एहतियाती कदम उठाने के आदेश दिए। इन उपायों में पर्याप्त संसाधनों का प्रावधान करना, एनडीआरएफ एवं सशस्त्र बलों की टीमों की तैनाती, प्रभावित लोगों को पेयजल मुहैया कराने की व्यवस्था करना और बिजली एवं दूरसंचार सेवाओं की बहाली से जुड़ी वैकल्पिक प्रणालियों का इंतजाम करना शामिल हैं। फोनी से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव, प्रधानमंत्री के अपर प्रधान सचिव, गृह सचिव और आईएमडी, एनडीआरएफ, एनडीएमए, प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। बहुत ही कम लोगों ने सरकारी मशीनरी से इस तरह की गंभीरता की उम्मीद की थी।’

रंग लाएगी पर्सनल केमिस्ट्री ?

फानी तूफान के बाद जिस तरह एक तरफ मोदी ने ओडिशा में बीजेडी और नवीन सरकार के विरुद्ध चुनाव प्रचार अभियान चलाने के बावजूद संघीय ढाँचे की भावना के अनुरूप राज्य सरकार की मदद में तत्परता दिखाई, उसी तरह नवीन पटनायक ने भी मोदी की प्रशंसा करके संकट के समय दलगत भावना से ऊपर उठने का सभी राजनीतिक दलों को संदेश दिया। ऐसे में एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि अब तक भाजपा या एनडीए का हिस्सा न रह कर भी मोदी का कभी विरोध न करने वाले बीजेडी और नवीन पटनायक 23 मई के बाद जरूरत पड़ने पर एनडीए को समर्थन दे सकते हैं ? ऐसा भी हो सकता है कि मोदी और पटनायक के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों और मैच होती पर्सनल केमिस्ट्री के चलते बीजेडी एनडीए का हिस्सा भी बन जाए। दूसरी तरफ एनडीए को अन्य दलों के समर्थन की जरूरत न पड़ने की स्थिति में भी राज्य हित में केन्द्र के साथ सहयोग बनाए रखने के लिए बीजेडी और नवीन पटनायक केन्द्र सरकार के विरोध या मोदी विरोधी टोली का हिस्सा बनने से परहेज करते रहेंगे।

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