MODIfied INDIA : ‘दो से दोबारा’ पर आते-आते ‘RECORD KING’ बने महानायक नरेन्द्र मोदी

मोदी ने इंदिरा के 48 वर्ष पहले बनाए गए रिकॉर्ड की बराबरी की

मोदी ने 54.2% मत पाकर राजीव का 35 वर्ष पुराना रिकॉर्ड किया ध्वस्त

मोदी ने भाजपा से दोबारा PM बनने के अटलजी के रिकॉर्ड की बराबरी की

मोदी दोबारा सत्ता पाने वाले प्रथम NON-CONGRESS प्रधानमंत्री बने

मोदी 27 मई, 2019 को 5 वर्ष से अधिक शासन करने वाले छठे प्रधानमंत्री बन जाएँगे

मोदी दूसरा कार्यकाल पूरा करते ही तोड़ेंगे अटलजी का रिकॉर्ड और करेंगे मनमोहन से बराबरी

मोदी का अगला लक्ष्य 2024 में नेहरू का 62 वर्ष पुराना हो जाने वाला रिकॉर्ड रहेगा

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 24 मई, 2019। स्वतंत्र भारत में प्रथम लोकसभा चुनाव 1952 से लेकर लोकसभा चुनाव 2019 यानी कुल 17 लोकसभा चुनाव हुए। एक सरकार का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। इस हिसाब से लगभग 13 या 14 चुनाव होने चाहिए थे, परंतु राजनीतिक अस्थिरताओं के कारण देश को 3 से 4 अतिरिक्त मध्यावधि चुनावों का भारी-भरकम अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। ख़ैर, वह इतिहास की बात हो गई, परंतु स्वतंत्र भारत के 67 वर्षों के चुनावी इतिहास में नेहरू-गांधी परिवार की ओर से कई रिकॉर्ड बने, जिन्हें तोड़ने का साहस कोई नहीं कर सका। कदाचित नियति को यही स्वीकार होगा कि इन रिकॉर्ड को तोड़ने और नए रिकॉर्ड बनाने का निमित्त 2001 में चुनावी राजनीति में कदम रखने वाले और प्रारंभ से ही रिकॉर्ड बनाने के मामले में धनी महानायक नरेन्द्र मोदी को बनाया जाए।

गुजरात की धरती से ही प्रचंड प्रारंभ

लोकसभा चुनाव 2019 जहाँ एक तरफ नरेन्द्र मोदी को देश और दुनिया के महानायक के रूप में स्थापित करने वाला सिद्ध हुआ, वहीं नरेन्द्र मोदी ने इस लोकसभा चुनाव 2019 में अथक परिश्रम से प्रारब्ध के भरोसे बैठे विरोधियों को घर का रास्ता दिखाने के साथ-साथ अनेक रिकॉर्ड को स्पर्श किया, तो अनेक रिकॉर्ड धराशायी भी किए। वैसे रिकॉर्ड के मामले में नरेन्द्र मोदी 2001 से ही भाग्यशाली रहे हैं। उन्होंने 7 अक्टूबर, 2001 को गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार उप चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मोदी ने लगातार 3 चुनाव जीत कर लगातार 13 साल से अधिक शासन करने वाले गुजरात के पहले मुख्यमंत्री होने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। मोदी ने एक चुनाव से दूसरे चुनाव तक मुख्यमंत्री बने रहने के माधव सिंह सोलंकी के रिकॉर्ड को भी 2007 में ही ध्वस्त कर दिया। आइए अब लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी के पुनः प्रधानमंत्री बनने से जो रिकॉर्ड भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) और मोदी के नाम दर्ज हुए, उन पर नज़र डालते हैं।

इंदिरा जैसा करिश्मा दोहराया

लोकसभा चुनाव 2019 में अकेले भाजपा के अकेले 303 सीटें जीतने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने प्रथम संबोधन में देश और भाजपा कार्यकर्ताओं को एक नया नारा दिया ‘दो से दोबारा’। इसका अर्थ यह है कि 6 अप्रैल, 1980 को स्थापित भाजपा ने पहली बार लोकसभा चुनाव 1984 में हिस्सा लिया था। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोगों में उनके बलिदान को लेकर कांग्रेस और इंदिरा के पुत्र राजीव गांधी के प्रति जबर्दश्त सहानुभूति लहर थी। ऐसी लहर भारत के चुनावी इतिहास में कभी नहीं चली, जिसमें कांग्रेस को 450 सीटें हासिल हुईं। इस लहर के बावजूद सिर्फ चार साल पुरानी भाजपा ने 2 सीटें जीतने में सफलता की और आज भाजपा उस मुकाम पर पहुँच गई है, जहाँ नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा केन्द्र में दोबारा सरकार बनाने जा रही है। इस तरह दो से राजनीतिक-चुनावी यात्रा शुरू करने वाली भाजपा को दोबारा सत्ता में लाकर नरेन्द्र मोदी भारत के ऐसे पहले NON-CONGRESS प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की हो। ऐसा करके मोदी ने इंदिरा गांधी के 48 वर्ष पूर्व बनाए रिकॉर्ड की बराबरी की। इंदिरा गांधी ने नेहरू के निधन के बाद हुए लोकसभा चुनाव 1967 में जीत हासिल करने के बाद लोकसभा चुनाव 1971 में दोबारा जीत हासिल की थी।

मोदी के आगे वाजपेयी की दोबारा वापसी फीकी

दो से दोबारा के इस सफर में नरेन्द्र मोदी ने अपनी ही पार्टी के दिग्गज दिवंगत नेता अटल बिहारी वाजपेयी के रिकॉर्ड की न केवल बराबरी की, अपितु उस रिकॉर्ड को फीका भी कर दिया। अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा चुनाव 1998 में पहली बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग-NDA) के साथ मिल कर पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई, परंतु वे 13 महीने ही प्रधानमंत्री रह सके। लोकसभा चुनाव 1999 में वाजपेयी दोबारा प्रधानमंत्री बने और उन्होंने पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। वाजपेयी और मोदी की दोबारा जीत में ज़मीन-आसमान का फर्क इसलिए है, क्योंकि वाजपेयी ने लगातार दो बार प्रधानमंत्री बनने के बावजूद 6 वर्ष ही शासन किया, जबकि मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 में दोबारा जीत कर 10 वर्ष तक के शासन पर मुहर लगवा ली है।

सहानुभूति की सुनामी पर भारी सफलता की सुनामी

लोकसभा चुनाव 2019 की बात करें, तो इस बार नरेन्द्र मोदी ने राजीव गांधी को भी चुनावी बहस का मुद्दा बनाया और लगता है इसका भाजपा को फायदा भी हुआ। मोदी ने 2019 की जीत में दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी का 35 वर्ष पूर्व बनाया एक रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया। लोकसभा चुनाव 1984 में सहानुभूति लहर पर सवार राजीव के नेतृत्व में कांग्रेस ने न केवल 450 सीटें हासिल की थी, अपितु रिकॉर्ड 48.1 प्रतिशत मत भी हासिल किए थे। उसके बाद हुए 8 लोकसभा चुनावों में यह रिकॉर्ड नहीं टूट सका, परंतु लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने 54.2 प्रतिशत मत हासिल कर राजीव का रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया।

अब नेहरू रहेंगे नज़र में

भाजपा को लोकसभा चुनाव 2014 में सबसे बड़ी जीत दिलाने वाले नरेन्द्र मोदी और वर्तमान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा चुनाव 2019 में 2014 से भी बड़ी जीत दिलाई। ऐसे में रिकॉर्ड के मामले में मोदी-शाह की जोड़ी का अगला लक्ष्य देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी करना रहेगा, जो लगातार तीन बार चुनाव सत्ता में आए थे। यह रिकॉर्ड बनाने के लिए मोदी को लोकसभा चुनाव 2024 भी जीतना होगा। नेहरू ने स्वतंत्रता के बाद हुए प्रथम लोकसभा चुनाव 1952 में जीत हासिल की थी। नेहरू 1957 में दोबारा और 1962 में तिबारा विजय हासिल की थी। यदि मोदी 2024 में तीसरी बार चुनाव जीत कर प्रधानमंत्री बनेंगे, तो वे नेहरू के आज की तारीख से 57 वर्ष पहले बनाए गए और 2024 में 62 वर्ष पुराने हो जाने वाले रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगे।

वाजपेयी और मनमोहन भी पिछड़ेंगे

स्वतंत्र भारत को 1947 में प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में मनोनीत जवाहरलाल नेहरू विरासत में मिले। प्रथम लोकसभा चुनाव 1951 में जीत हासिल कर नेहरू पहली बार निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। नेहरू से लेकर नरेन्द्र मोदी तक देश ने अब तक कुल 15 प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल को देखा है। लोकसभा चुनाव 2019 जीत कर नरेन्द्र मोदी ने कार्यकाल के मामले में भी एक रिकॉर्ड को स्पर्श किया है। नरेन्द्र मोदी पाँच वर्ष से अधिक कार्यकाल तक प्रधानमंत्री बने रहने वाले देश के छठे प्रधानमंत्री बन चुके हैं। सबसे लम्बे कार्यकाल का रिकॉर्ड नेहरू के नाम है। वे 16 वर्ष 286 दिन प्रधानमंत्री रहे थे, तो 15 वर्ष 350 दिनों के कार्यकाल के साथ इंदिरा गांधी दूसरे नंबर पर रहीं। 10 वर्ष 4 दिन के कार्यकाल के साथ डॉ. मनमोहन सिंह तीसरे और 6 वर्ष 80 दिन के कार्यकाल के साथ अटल बिहारी वाजपेयी चौथे स्थान पर रहे। वाजपेयी के बाद पाँचवें नंबर पर रहे राजीव गांधी, जिन्होंने 4 वर्ष 291 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवाएँ दीं। 4 वर्ष 363 दिनों से सत्ता पर काबिज नरेन्द्र मोदी अब देश के छठे ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो पाँच वर्ष से अधिक के शासन की ओर अग्रसर होने जा रहा हैं और यदि 2024 में वह 10 साल का कार्यकाल पूरा करके डॉ. वाजपेयी के शासन काल के रिकॉर्ड को तोड़ेंगे और मनमोहन सिंह के रिकॉर्ड की बराबरी करेंगे।

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