गुरदासपुर का गदर : कैप्टन के टाइट क्लच को भी कुचल गया तारा सिंह का ट्रक

पंजाब में बेअसर मोदी लहर के बावजूद गुरदासपुर में लहराया भगवा

अभिनेता से भाजपा नेता बने सनी देओल ने प्रारंभ की राजनीतिक इनिंग

CM की लोकप्रियता भी नहीं बचा पाई कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ को

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 23 मई, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 में सनी देओल की एंट्री के साथ हॉट सीट बन कर उभरी पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट फिर एक बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) ने कांग्रेस से हथिया ली है। गुरदासपुर का परिणाम घोषित हो चुका है और भाजपा प्रत्याशी सनी देओल ने कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ को 82,459 मतों से हरा दिया है।

सनी देओल की इस जीत का अंतर भले ही कम हो, परंतु यह जीत बहुत बड़ी है। एक तरफ जहाँ पूरे पंजाब में कांग्रेस नेता व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की लोकप्रियता का बोलबाला था और यह लोकप्रियता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP)-शिरोमणि अकाली दल (शिओद-SAD) को कड़ी चुनौती दे रही थी, वहीं दूसरी तरफ सनी देओल ने अपने स्टारडम के बूते गुरदासपुर में जीत हासिल की। यदि फिल्मी और पॉलिटिकल भाषा में कहा जाए, तो पंजाब में कैप्टन के टाइट क्लच को भी कुचल कर गुजर गया गदर के तारा सिंह का ट्रक।

उल्लेखनीय है कि पंजाब में लोकसभा की कुल 12 सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस ने 8 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा-एसएडी गठबंधन केवल 4 सीटें ही जीतने में सफलता प्राप्त कर सका। इन 4 सीटों में भाजपा और एसएडी को 2-2 सीटें मिलीं। भाजपा को जो 2 सीटें मिलीं, उनमें एक सीट गुरदासपुर की रही, जहाँ सनी देओल का स्टारडम कैप्टन की लोकप्रियता पर भारी पड़ा। यद्यपि पंजाब में जिस तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह ने टाइट क्लच कर रखा था, उसे देखते हुए सनी देओल की जीत बहुत बड़ी सफलता के रूप में देखी जाएगी। कैप्टन की लोकप्रियता के बावजूद उप चुनाव में विजयी रहे निवर्तमान कांग्रेस सांसद सुनील जाखड़ अपनी सीट बचाने में विफल रहे।

‘HANDCONG’ उखाड़ बचाई विनोद की विरासत

फिल्म गदर में पाकिस्तान की सरज़मीं पर जाकर हैण्डपंप उखाड़ लेने वाले सनी देओल के समक्ष चुनावी मैदान में ‘HANDCONG’ उखाड़ने की चुनौती थी, जिसमें उन्हें सफलता मिली। हैण्डकांग यानी कांग्रेस और उसका हाथ (चुनावी चिह्न पंजा)। गुरदासपुर का प्रारंभिक चुनावी इतिहास कांग्रेस के साथ था, तो पिछले 31 वर्षों का चुनावी इतिहास भाजपा के पक्ष में था और इसका फायदा सनी देओल को मिला। 1952 से लेकर 2017 तक हुए चुनाव-उप चुनाव के परिणामों का विश्लेषण करें, तो गुरदासपुर की जड़ों में कांग्रेस बसी हुई है, जिसे 1977 में इंदिरा विरोधी लहर ने पहली बार उखाड़ा फेंका था, परंतु उसके बाद 1998 में भाजपा के पक्ष में इतिहास रचा दिवंगत विनोद खन्ना ने। विनोद ने ही 1998 में पहली बार गुरदासपुर से भाजपा को जीत दिलाई थी। विनोद 1999 और 2004 में भी गुरदासपुर से जीते, परंतु 2009 में उन्हें पहली बार कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा। यद्यपि लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर पर सवार विनोद खन्ना फिर एक बार गुरदासपुर पर कब्जा जमाने में कामयाब रहे, परंतु उनके निधन के बाद 2017 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से यह सीट छीन ली और सुनील जाखड़ विजयी रहे। गुरदासपुर में 1998 से 2017 तक के चुनावी ट्रेंड का विश्लेषण करने पर स्पष्ट हो जाता है कि यहाँ की जनता का मन बीच-बीच में भटक कर कांग्रेस के पक्ष में चला जाता है। ऐसे में सनी देओल के समक्ष न केवल दिवंगत विनोद खन्ना की विरासत को बचाने की, अपितु व्यक्तगित देशभक्त नागरिक और अभिनेता की छवि को सिद्ध राजनीति में सफल सफर की शुरुआत करने की भी चुनौती थी, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पार कर लिया।

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