फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी : कनाडाई ‘खिलाड़ी’ ने वो काम किया, जो आलोचकों को नहीं सूझा !

देश की हर आपदा में सहायता को तत्पर रहने वाले अक्षय ने फानी पीड़ितों के लिए दिए 1 करोड़ रुपए

रिपोर्ट : विनीत दुबे

बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू लेने के बाद उनकी कनाडाई नागरिकता को लेकर बवाल मचाने वालों को आज मुँहतोड़ जवाब दिया है। अक्षय ने एक ऐसा निर्णय किया, जिससे फिर एक बार सिद्ध हो गया कि कनाडाई अक्षय कुमार के सीने में हिन्दुस्तानी दिल धड़कता है। दरअसल बॉलीवुड के इस ‘खिलाड़ी’ कुमार ने अपनी देशभक्ति का कई बार की तरह इस बार भी परिचय देते हुए फानी तूफान से पीड़ित हुए लोगों के लिये एक करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की है। हालाँकि अब दो महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब लेना भी बहुत आवश्यक है।

एक सवाल तो यह उठ रहा है कि कुछ लोगों को छोड़ दें, तो बॉलीवुड की प्रख्यात हस्तियाँ इस विवाद को लेकर अभी तक चुप मौन क्यों साधे हुए हैं, तो दूसरा सवाल यह उठता है कि जो लोग अक्षय कुमार की देशभक्ति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, उनमें से कितने लोग फानी पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं ? जो पहल अक्षय ने की है, ऐसी पहल तो अभी तक अरबों की कमाई करने वाले बॉलीवुड के एक भी अभिनेता-अभिनेत्री ने नहीं की है।

पहली बात तो यह है कि किसी और देश की नागरिकता स्वीकार करना या ना करना एक स्वतंत्र नागरिक अधिकार है। यह एक पूरी तरह से व्यक्तिगत, कानूनी और गैर-राजनीतिक मुद्दा है। इसके बारे में कोई अपनी राय तो पेश करता है, परंतु किसी को ट्रोल नहीं कर सकता। जैसा कि स्वयं अक्षय कुमार ने भी कहा है।

दूसरी बात यह है कि किसी देश की ओर से नागरिक सम्मान दिया जाना हमारे देश के नागरिक के लिये गौरव की बात है और केनेडा ने हमारे एक अभिनेता को अपने देश के नागरिक सम्मान के रूप में नागरिकता प्रदान की, यह भारत के लिये सम्माननीय है, न कि क्षोभनीय। अक्षय कुमार के कथनानुसार उन्हें केनेडा ने अपने देश की नागरिकता और डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया है, परंतु न केवल इस वजह से वह डॉक्टर बन गये और न ही केनेडियन नागरिक। वह भारत में रहते हैं और भारत के करदाता हैं।

इसके साथ ही इस विवाद पर पर्दा गिर जाना चाहिये। ऐसा नहीं है कि केनेडा की ओर से केवल अक्षय कुमार को ही यह सम्मान दिया गया है, केनेडा की ओर से यह सम्मान भारत के ग्रेट म्युज़िक कंपोज़र ए. आर. रहमान को भी पेश किया गया था, परंतु उन्होंने यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जबकि अक्षय कुमार ने सम्मान को स्वीकार किया है बस।

कनाडाई नागरिकता के कारण अक्षयकुमार मतदान और चुनाव लड़ने का अधिकार छिन जाने के बावजूद समय-समय पर अपनी देश भक्ति का परिचय देते रहते हैं। वह बॉलीवुड के ऐसे प्रथम अभिनेता हैं, जो सरकार को सर्वाधिक कर चुकाते हैं। इतना ही नहीं वह आपदा पीड़ितों की मदद के लिये तत्पर रहने वाले देश भक्त हैं।

इससे पहले वह नक्सली हमले में शहीद हुए भारतीय जवानों के परिवारजनों को आर्थिक मदद दे चुके हैं। पुलवामा हमले में शहीद हुए जवान जीतराम गूर्जर की पत्नी सुंदरी देवी को अक्षय कुमार ने 15 लाख रुपये की आर्थिक मदद देकर अपनी देशभक्ति का परिचय दिया। केन्द्रीय गृह मंत्रालय के साथ मिलकर अक्षय कुमार ने शहीदों के परिवारजनों की मदद के लिये ‘भारत के वीर’ नामक ऐप भी शुरू की थी, जिसकी मदद से कोई भी भारतीय जवानों के परिवारजनों तक अपनी मदद पहुँचा सकता है। इससे पहले वर्ष 2015 में उन्होंने केरल और चेन्नई के बाढ़ पीड़ितों के लिये एक करोड़ रुपये की मदद दी थी और अब अक्षय कुमार ने फानी तूफान से पीड़ित हुए लोगों की मदद के लिये ओडिशा के मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है। अक्षय कहते आये हैं कि वह अपने देश के लिये जो भी कर सकते हैं, वह करते रहेंगे और वह अपने इस संकल्प को समय-समय पर सिद्ध भी करते हैं।

दूसरी ओर वह वर्ग है, जो अक्षय कुमार को निशाना बनाता है। पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गैर-राजनीतिक इंटरव्यू लेने पर अक्षय कुमार की आलोचना की और इसके बाद मतदान नहीं करने को लेकर उन्हें ट्रोल कर रहा है। इससे पहले जब रुस्तम फिल्म के लिये अक्षय कुमार को राष्ट्रीय अवॉर्ड मिला था, तब भी उन्हें ट्रोल किया गया था।

हालाँकि अच्छी बात यह है कि बॉलीवुड के फिल्म निर्माता राहुल धोळकिया और अभिनेता अनुपम खेर जैसी हस्तियाँ अक्षय कुमार के बचाव में आई हैं, परंतु बॉलीवुड की प्रख्यात सैलिब्रिटीज का सामने नहीं आना और चुप्पी साधे बैठे रहना जरूर सवाल उठाता है। सवाल उन पर भी उठना चाहिये जो केवल ऐसे अनर्गल मुद्दों को लेकर बवाल मचाते हैं, परंतु कभी खुद पीड़ितों की मदद के लिये आगे नहीं आते और जो आते हैं, उनका मोरल तोड़ने का काम करते हैं।

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