चाँद पर खरीदना चाहते हैं प्लॉट तो यह जान लीजिए : 28 दिन का होता है एक दिन

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 21 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों का एक सपना तो सोमवार को तब पूरा हो जाएगा, जब वह दोपहर 2.43 बजे अपना चंद्रयान-2 पृथ्वी से चाँद की ओर रवाना कर देंगे। हालाँकि कुछ वैज्ञानिकों ने आम लोगों को भी चाँद पर मानव आबादी बसाने का सपना दिखाया है, और कुछ लोग भी चाँद पर प्लॉट खरीदने का सपना संजोने लगे हैं, परंतु यह इतना आसान नहीं। क्यों ? आप भी जान लीजिये।

6 सितंबर को चाँद पर उतरेगा चंद्रयान-2

सबसे पहले भारत के चंद्रयान-2 मिशन की बात कर लेते हैं, जो भारत का संपूर्ण स्वदेशी मिशन है, जिसके लिये खर्च भी अन्य अंतर्राष्ट्रीय अभियानों से कम किया गया है। इसरो और चंद्रयान-2 से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पहले 15 जुलाई को ही नोटिस टू एयरमेन जारी कर दिया गया था, परंतु तकनीकी कारणों से देर रात को प्रक्षेपण से ठीक एक घण्टे पहले ही प्रक्षेपण को टाल दिया गया था। अब चाँद के दक्षिण ध्रुव पर एक रोवर को उतारने के लिये सोमवार को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पृथ्वी से चाँद की दूरी 3,34,404 कि.मी. है। 22 जुलाई को रवाना होने वाला यान 14 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुँचेगा और 6 सितंबर को चाँद पर उतरेगा। इस बीच यात्रा में यान को पूरे 51 दिन का समय लगेगा।

चाँद पर होता है 28 दिन का एक दिन

यदि आप चाँद पर प्लॉट लेने की सोच रहे हैं तो आपको जान लेना चाहिये कि जैसे पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, वैसे ही चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जैसे पृथ्वी अपनी धुरी पर भी घूमती है, वैसे ही चंद्रमा भी अपनी धुरी पर भी घूमता है। फर्क इतना ही है कि पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की गति अधिक है, जिससे यहाँ दिन और रात 12-12 घण्टे के होते हैं, जबकि चंद्रमा इस मामले में सुस्त है, उसकी गति धीमी होने के कारण वहाँ 28 दिन का एक दिन और लगभग इतनी ही लंबी रात होती है। पृथ्वी से चाँद को देखकर करवा चौथ का व्रत तोड़ा जाता है, परंतु चाँद पर यह संभव नहीं होगा। इसके अलावा जैसे पृथ्वी से हम चाँद का एक भाग ही देख सकते हैं, उसी तरह चाँद से भी हम पृथ्वी का एक भाग ही देख पाएँगे। जैसे हम किसी प्रतिमा की परिक्रमा करते हैं तो प्रतिमा को अपनी पीठ नहीं दिखाते हैं, वैसे ही चंद्रमा का पीठ वाला भाग पृथ्वी पर कभी नहीं दिखता है जबकि चंद्रमा के सामने वाले भाग से पृथ्वी कभी ओझल नहीं होती है। चंद्रमा के उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव पर किनारे वाले कुछ ही ऐसे स्थान हैं जहाँ से हम पृथ्वी का उदय और अस्त देख पाएँगे।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जितना प्रकाश पृथ्वी पर हमें चाँद देता है, उससे 45 से 100 गुना अधिक प्रकाश पृथ्वी चंद्रमा को देती है। पृथ्वी चाँद से बड़ी है। इसलिये चाँद से पृथ्वी चार गुना बड़ी दिखाई देती है। जब पृथ्वी पर अमावस होती है, तब चाँद पर पृथ्वी पूरी तरह खिली होती है और पूर्णिमा के दिन चाँद पर अमावस होती है।

चाँद से भी सुंदर दिखती है पृथ्वी !

पृथ्वी पर कवि और शायर चाँद की तारीफों के पुल बाँधने से नहीं थकते हैं, परंतु आपको बता दें कि चाँद से देखने पर पृथ्वी चाँद से भी कहीं अधिक सुंदर दिखाई देती है। लगभग 50 साल पहले अपोलो मिशन के अंतरिक्ष यात्री ने चंद्रमा की कक्षा से (चंद्रमा की सतह से नहीं) उदित हो रही पृथ्वी का चित्र भेजा था तो पूरा विश्व उस चित्र को देखकर पागल-सा हो गया था। चंद्रमा जब पृथ्वी की परिक्रमा करता है तो उसका परिक्रमा पथ वृत्ताकार नहीं, अपितु अंडाकार होता है। इसलिये जब चंद्रमा अंडाकार मार्ग के मध्य में रहता है तब वह पृथ्वी के सबसे निकट होता है और पृथ्वीवासियों को बड़ा दिखाई देता है, जिसे हम सुपर मून कहते हैं। जब वह अंडाकार मार्ग के सिरे पर होता है तो पृथ्वी से दूर हो जाता है। जब वह पृथ्वी के निकट होता है तो ध्रुव के कुछ इलाकों से पृथ्वी दिखना बंद हो जाती है वहीं उसके दूर जाने पर पृथ्वी दिखाई देने लगती है। इसी जगह से पृथ्वी के उदय और अस्त को देखा जा सकता है। इसलिये यदि आप चाँद पर प्लॉट खरीदने की सोच रहे हैं तो ध्यान रखें कि आपका प्लॉट पृथ्वी की दिशा में हो, विपरीत दिशा में नहीं। वैसे चाँद पर प्लॉट खरीदने से पहले आपको बृहस्पति पर भी नज़र जरूर डालनी चाहिये, जिसके पास अपने 60 से ज्यादा चंद्रमा हैं। पिछली शताब्दी तक माना जाता था कि बृहस्पति के पास मात्र 16 चंद्रमा हैं, परंतु खोज में इनकी संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। यदि आप बृहस्पति के किसी चाँद पर बसना चाहते हैं तो फिर कौन-से चाँद को देखकर करवा चौथ का व्रत तोड़ेंगे, यह भी पहले से ही तय कर लीजिएगा।

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