VIDEO : अंतरिक्ष में भारत ने दुनिया को दिखाया एक और दम : चांद की ओर चला CHANDRAYAAN 2

अहमदाबाद, 22 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। MISSION SHAKTI के बाद भारत ने अंतरिक्ष में दुनिया को एक बार फिर अपनी ताकत का दम दिखाया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का अत्यंत महत्वाकाँक्षी SECOND MISSION MOON यानी CHANDRAYAAN-2 आंध्र प्रदेश स्थित श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से जीएसएलवी मार्क-3 के जरिये सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है। इसी के साथ चंद्रयान 2 ‘चांद की ओर’ चल पड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रयान-2 बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी के साथ इसरो के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसरो में जश्न का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित विविध महानुभावों ने भी इस अभियान से जुड़े इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। लोकसभा और राज्यसभा से भी इसरो की टीम और वैज्ञानिकों को बधाई दी गई है।

चांद की तरफ भारत की ऐतिहासिक यात्रा शुरू

इसरो के चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण के साथ इसरो पर बधाइयों की बौछार शुरू हो गई। इसरो चीफ के. सिवन ने कहा कि हमने सफल लॉन्चिंग के साथ अपने तिरंगे को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि टास्क अभी खत्म नहीं हुआ है, हमें अगले मिशन पर लगना है। हम हर बार की तरह अपने मैनेजमेंट से दिये गये काम को इसी तरह मेहनत और लगन से सफलतापूर्वक पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह तीन सैटेलाइट का मिशन है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद की सतह पर उतरेंगे। उन्होंने कहा कि 250 वैज्ञानिक लगातार चंद्रयान-2 पर निगरानी कर रहे हैं। इसरो की टीम ने घर-परिवार छोड़कर पिछले 7 दिन से लगातार लॉन्चिंग की तैयारियों में जुटे थे। तकनीकी परेशानियों की पड़ताल करके उन्हें दुरुस्त किया। इसरो के इंजीनियरों, टेक्निकल स्टाफ ने कड़ी मेहनत की, जिसके परिणामस्वरूप हम यहाँ तक पहुँचे हैं।

यहाँ जानिये चंद्रयान-2 के पूरे ‘MOON WALK’ का शिड्यूल

सैटेलाइट से सिग्नल आने शुरू हो गये हैं और यान अंतरिक्ष की कक्षा में पहुँच गया है। क्रॉयोजेनिक स्टेज से सैटेलाइट को अलग कर दिया गया है। अब लगभग 23 दिनों तक यान पृथ्वी की कक्षा में रहेगा और अंडाकार में पृथ्वी के इर्द-गिर्द घूमता रहेगा तथा बार-बार छोटे-छोटे रॉकेट लॉन्च करके अपनी कक्षा को बढ़ाएगा। 23वें दिन चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में ट्रांसफर किया जाएगा, इसके लिये जो प्रक्रिया अपनाई जाएगी उसमें लगभग 7 दिन लगेंगे, यानी 30 दिन के बाद चंद्रयान-2 चंद्रमा की कक्षा में स्थापित होगा। इसके बाद 13 दिन तक वह चंद्रमा के आसपास घूमता रहेगा। लॉन्चिंग के 43वें दिन ऑर्बिटर से लैंडर को अलग किया जाएगा और 44वें दिन लैंडर की एक बार फिर से पैमाइश की जाएगी कि वह सही पॉजीशन में है या नहीं। इसके बाद लॉन्चिंग के 48वें दिन के बाद यानी लगभग 6 से 8 सितंबर को लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।

विक्रम और प्रज्ञान उतरेंगे चांद की ज़मीन पर

चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसमें से प्रज्ञान रोवर को बाहर निकाला जाएगा। प्रज्ञान रोवर लैंडिंग की जगह से 500 मीटर के दायरे में घूमेगा और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अगले 12 दिन तक यानी लगभग 20 सितंबर तक वैज्ञानिक प्रयोग करेगा। इन वैज्ञानिक प्रयोगों में जो सबसे खास है, वह ये कि चंद्रमा की सतह पर मौजूद मिट्टी को लेज़र बीम से जलाएगा और उसमें से मिलने वाले स्पेक्ट्रम के जरिये यह पता लगाएगा कि चंद्रमा की मिट्टी में कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं और कितनी-कितनी मात्रा में मौजूद हैं। इसके बाद दूसरा प्रयोग चंद्रमा की भूकंपीय गतिविधियों का पता लगाना होगा। पृथ्वी की तरह ही चंद्रमा के अंदर भी भूकंपीय हलचल होती है या नहीं, इसका पता लगाया जाएगा। प्रज्ञान रोवर से मिलने वाली जानकारियों को रेडियो फ्रिक्वेंसी के माध्यम से विक्रम लैंडर के पास भेजा जाएगा और विक्रम लैंडर इस जानकारी को चंद्रमा का चक्कर लगाने वाले ऑर्बिटर को भेजेगा। ऑर्बिटर इस जानकारी को भारत में मौजूद बंगलुरु के डीप स्पेस सेंटर को भेजेगा। यहाँ पर इसरो के वैज्ञानिक चंद्रमा की जानकारी का अध्ययन करेंगे।

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