CAA : बढ़ते बवाल पर सरकार सख्त, हिंसा पर राज्यों को दी हिदायत

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 16 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। नये नागरिकता कानून पर बढ़ते बवाल को देखते हुए अब मोदी सरकार भी एक्शन मोड में आ गई है। सरकार ने हिंसक प्रदर्शनों को रोकने के लिये दो-दो मोर्चे संभाल लिये हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी झारखंड की चुनावी रैलियों और ट्वीट के माध्यम से नागरिकों को समझाने में जुटे हैं कि इस नये कानून से देश के किसी भी नागरिक की नागरिकता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगता है। यह कानून केवल पड़ोसी देशों से आये शरणार्थियों को नागरिकता और सुरक्षा प्रदान करने के लिये बनाया गया है। दूसरी तरफ हिंसक प्रदर्शन जो कि पूर्वोत्तर के राज्यों में शुरू हुआ था वह अब पश्चिम बंगाल होते हुए दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक फैलता जा रहा है। अन्य राज्यों से भी प्रदर्शनों की ख़बरों को देखते हुए गृह मंत्रालय भी गंभीर हो गया है और उसने सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के लिये एडवाइज़री जारी की है, जिसमें विभिन्न राज्यों को उनके यहाँ शांति और कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिये उचित कदम उठाने को कहा गया है।

दरअसल पड़ोसी इस्लामिक देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफग़ानिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू, जैन, बौद्ध, पारसी, इसाई आदि समुदायों के जो लोग भारत में आकर शरणार्थी जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान करके सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार देने के लिये केन्द्र सरकार ने नया नागरिकता कानून बनाया है। हालाँकि इस कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर पहले पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मेघालय आदि में प्रदर्शन हुए थे, परंतु केन्द्र सरकार ने क्रिसमस के बाद बैठक करके पूर्वोत्तर के नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रावधानों में बदलाव करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद वहाँ विरोध प्रदर्शन शांत हो गया, परंतु इसके बाद शनिवार को पश्चिम बंगाल और इसके बाद दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने हिंसक विरोध प्रदर्शन किया और कुछ बसों, पुलिस वाहनों तथा आम नागरिकों के कुछ वाहनों में आग लगा दी। पुलिस पर पथराव भी किया, जिससे पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी। पुलिस के सख्ती बरतने से मुस्लिम संगठन और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले कुछ राजनीतिक दल हिंसक प्रदर्शन के समर्थन में आ गये और हिंसक विरोध प्रदर्शन की आग अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, आगरा होते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक पहुँच गई। अब इस आग ने उत्तर प्रदेश के मऊ को भी अपनी चपेट में ले लिया है। मुंबई, पुणे समेत कुछ अन्य प्रदेशों में भी विरोध के चलते सरकार को सख्त कदम उठाने के लिये विवश होना पड़ा है। मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक दलों के कूद पड़ने से स्थिति और बिगड़ गई, जिससे यह आग अन्य प्रदेशों में भी फैले, उससे पहले ही केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के लिये एडवाइज़री जारी करके उन्हें प्रदर्शनों को रोकने के लिये उचित कदम उठाने की हिदायत दी है।

दूसरी तरफ सरकार समझाइश से भी काम ले रही है। खुद पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता कानून को लेकर समुदाय विशेष में फैली भ्राँतियों को दूर करने के लिये मोर्चा खोल दिया है। पीएम मोदी ने ट्वीट के माध्यम से स्पष्टता की है कि यह कानून केवल शरणार्थियों के लिये है और इससे किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों को कोई खतरा नहीं है। भारत की संस्कृति एकता और भाईचारे की रही है, इसलिये इस कानून को लेकर फैलाये जा रहे झूठ के झाँसे में न आयें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाएँ। शांति बनाये रखें और जो भी प्रश्न हैं उनका मिल बैठ कर चर्चा के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है।

इसी प्रकार अमित शाह ने भी स्पष्टता की है कि ऐसा नहीं है कि यह कानून पास हो गया तो सभी शरणार्थियों को नागरिकता दे दी जाएगी। अभी केन्द्र सरकार को इस कानून के प्रावधानों को अमल में लाने के लिये भी नियम बनाने पड़ेंगे और फिर शरणार्थियों को भी नागरिकता के लिये सरकार के समक्ष आवेदन करना पड़ेगा, जिसमें उन्हें सरकार की ओर से रखी गई शर्तों का पालन करना होगा और कुछ कागजी प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद सक्षम अधिकारी उनके आवेदन पर विचार विमर्श करने के बाद सभी पात्रताएँ पूरी करने वाले लोगों को ही नागरिकता देंगे। इसलिये इस कानून को लेकर किसी को भी भ्रमित होने की कोई आवश्यकता नहीं है।

उल्लेखनीय है कि इस कानून विशेष को मुस्लिम समुदाय स्वयं के लिये चुनौती के रूप में देख रहा है और इसी लिये मुस्लिम संगठन और छात्र इसका विरोध कर रहे हैं। उनके मन में यह भय भी है कि इस नागरिकता कानून के बाद अब सरकार पूरे देश में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़नशिप (एनआरसी) लागू करेगी, जिसमें इस समुदाय के लोगों को हासिये पर धकेल दिया जाएगा। जबकि अन्य देशों से आने वाले गैर-मुस्लिम समुदाय के लोगों को नागरिकता प्रदान की जाएगी। कुछ राजनीतिक दल भी मुस्लिम वोट हासिल करने के लिये इस समुदाय के विरोध का राजनीतिक लाभ लेने में जुट गये हैं, जिससे हिंसक प्रदर्शन देश के अलग-अलग हिस्सों में फैलता जा रहा है। सरकार ने इस कानून को लेकर फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों से निपटने के लिये भी राज्यों को नसीहत दी है। क्योंकि सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहें भी हिंसक प्रदर्शनों के लिये जिम्मेदार हैं। युवाPRESS भी लोगों से शांति बनाये रखने और अपने मुद्दों को शांतिपूर्वक ढंग से उठाने तथा सरकार के समक्ष प्रस्तुत करके उनका समाधान माँगने की सार्वजनिक अपील करता है।

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