राज्यसभा में भी चुटकियों में पास हो जाएगा CAB, ‘धर्म’ की राजनीति करने वाले ‘धर्मसंकट’ में…

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। मोदी सरकार का बहुचर्चित नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लोक सभा में बहुमत से पारित हो गया। अब बिल को संसद के उच्च सदन यानी राज्य सभा में बुधवार को पेश किया जाएगा। राज्य सभा की बुधवार की सूची के अनुसार दोपहर 2 बजे बिल पेश किया जाएगा और इसके बाद इस पर चर्चा के लिये 6 घण्टे का समय तय किया गया है। राज्य सभा में बिल के पारित होने को लेकर अलग-अलग लोग अपने-अपने मतानुसार कयास लगा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार राज्य सभा में भी चुटकियों में इस बिल को पारित कराने में सफल हो जाएगी। हम किसी चमत्कार की बात नहीं कर रहे हैं। इससे पहले भी मोदी सरकार तीन तलाक प्रतिबंधक विधेयक और जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करने से जुड़े विधेयक को राज्य सभा में पारित कराने में सफल रही है। आँकड़े भी मोदी सरकार के पक्ष में हैं। इसलिये प्रबल संकेत मिल रहे हैं कि सरकार बिल को सफलतापूर्वक पारित कराने में सफल हो जाएगी। दूसरी तरफ जो लोग ‘धर्म (तुष्टिकरण)’ की राजनीति करते रहे हैं वे इस बिल को लेकर अब ‘धर्म संकट’ में दिखाई दे रहे हैं।

राज्य सभा के आँकड़ों से समझें किसकी और क्या है स्थिति ?

राज्य सभा में कुल सदस्य संख्या 245 है। हालाँकि वर्तमान में 240 सदस्य हैं और 5 सांसदों की सीटें खाली हैं। बहुमत के लिये 121 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता है। राज्य सभा में एनडीए के पास 106 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन यूपीए के पास 62 सीटें हैं। जो क्षेत्रीय या राष्ट्रीय राजनीतिक दल एनडीए या यूपीए के साथ नहीं हैं, ऐसे दलों के पास राज्य सभा में 72 सीटें हैं। इनमें से 44 सदस्य बिल के विरोध में तो 28 सांसद बिल के समर्थन में हैं। राज्य सभा में शिवसेना के 3 और जेडीयू के 6 सांसद हैं।

लोक सभा में तो इन दोनों ही दलों ने बिल के समर्थन में मतदान किया है, परंतु अब सुनने में आ रहा है कि कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बनाने वाली शिवसेना इन दोनों दलों के दबाव में आ गई है। क्योंकि लोक सभा में बिल का समर्थन करने के बाद अब राज्य सभा में बिल आने से पहले ही शिवसेना का रुख बदला-बदला-सा नज़र आने लगा है। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे अब बिल पर सवाल पूछने लगे हैं। इससे जाहिर होता है कि उनका रुख बदल सकता है। अब उद्धव ठाकरे कह रहे हैं कि उनके कुछ सवाल हैं, जो वह राज्य सभा में पूछेंगे और इनका उत्तर मिलने पर ही वे बिल का समर्थन या विरोध करने का निर्णय लेंगे। दरअसल एक ज़माने में मुस्लिमों से मताधिकार छीनने की बात करने वाली शिवसेना अब ‘धर्म संकट’ में फँस चुकी है और बिल पर सवाल उठाना उसकी मजबूरी बन गई है। क्योंकि आज वह उन राजनीतिक दलों के साथ खड़ी है, जिनके ऊपर मुस्लिमों के तुष्टिकरण की राजनीति करने का ठप्पा लगा हुआ है। ऐसे में उद्धव को भी उनके सुर में सुर मिला कर कहना पड़ रहा है कि ‘अगर हम बिल से असहमत होते हैं तो क्या हम देश द्रोही हैं।’

शिवसेना और जेडीयू के बिना भी निश्चिंत है मोदी सरकार

दूसरी तरफ ऐसी भी खबरें छन कर आ रही हैं कि बिल के समर्थन को लेकर एनडीए के घटक दल जेडीयू में भी विवाद उत्पन्न हो गया है। इस दल ने भी लोक सभा में बिल का समर्थन किया था, परंतु अब राज्य सभा में उसके रुख को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है। हालाँकि इन सबके बावजूद मोदी सरकार या गृह मंत्री अमित शाह राज्य सभा में बिल के पारित होने को लेकर निश्चिंत हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने आँकड़े जुटा लिये हैं और उनके लिये 121 का जादुई आँकड़ा कोई चुनौती पेश नहीं करने वाला है।

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