13 महीने 47 फ़ैसले : ‘इतिहास पुरुष’ बन कर सेवानिवृत्त हुए देश के 46वें CJI रंजन गोगोई

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 15 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। देश के 46वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) रंजन गोगोई शुक्रवार को सेवा निवृत्त हो गये। भारतीय संविधान में देश के मुख्य न्यायाधीश के सेवा निवृत्त होने की उम्र 65 वर्ष है, जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर शनिवार को 65 वर्ष के हो जाएँगे और 18 नवंबर को अपना जन्मदिन मनाएँगे। अगले दो दिन शनिवार और रविवार हैं, इसलिये आज ही उनका सुप्रीम कोर्ट में लास्ट वर्किंग डे था। इस अवसर पर उन्होंने न्यायपालिका के जजों तथा सहकर्मियों को अपना संदेश दिया। इस संदेश में उन्होंने जजों को ‘मौन-मंत्र’ दिया। उन्होंने कहा कि जजों को मौन रह कर अपनी स्वतंत्रता का प्रयोग करना चाहिये। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौन रहने का अर्थ चुप रहना नहीं है, बल्कि जजों को अपने दायित्वों के निर्वाह के लिये ही बोलना चाहिये, इसके अलावा उन्हें मौन रहना चाहिये। जस्टिस गोगोई ने मीडिया से प्राप्त हुए सकारात्मक सहयोग के लिये उसको भी धन्यवाद कहा। जस्टिस गोगोई का सीजेआई के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में साढ़े 13 महीने का कार्यकाल रहा, जिसमें उन्होंने 47 फैसले लिए। वे कई ऐतिहासिक फैसलों के लिये याद रखे जाएँगे। 491 वर्ष पुराने अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्ज़िद ज़मीन विवाद का ऐतिहासिक निराकरण करने की उपलब्धि उनके नाम दर्ज हुई है। इसके अलावा तीन तलाक, सबरीमाला, राफेल सौदा, असम एनआरसी मामला, सीजेआई कार्यालय को आरटीआई के दायरे में लाने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी उन्होंने लिये हैं। उनके बाद सीनियर जज जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े देश के 47वें सीजेआई का पदभार सँभालेंगे।

कौन हैं जस्टिस रंजन गोगोई ?

जस्टिस रंजन गोगोई असम के हैं। 18 नवंबर 1954 को जन्मे रंजन गोगोई असम की राजधानी गोवाहाटी में स्कूली पढ़ाई खत्म करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिये दिल्ली आये थे। यहाँ उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से इतिहास में ग्रेज्युएशन कंपलीट किया और बाद में इसी यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री प्राप्त की। उनके पिता केसब चंद्र गोगोई असम में कांग्रेस के बड़े नेता थे और वे 1982 में 2 महीने के लिये असम के मुख्यमंत्री भी बने थे। पिता का आग्रह था कि उनका पुत्र यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा क्लियर करे, इसलिये उन्होंने वह परीक्षा क्लियर करके पिता की अपेक्षा भी पूरी की, परंतु इसके बाद उन्होंने पिता से विनम्रतापूर्वक आग्रह किया कि वे कानून की पढ़ाई करके वकील बनना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने लॉ की पढ़ाई पूरी करके गोवाहाटी हाईकोर्ट में 1978 में वकालत की प्रेक्टिस शुरू की थी। 28 फरवरी 2001 को वे गोवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने। इसके 9 साल बाद सितंबर-2010 में उन्हें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। 2011 में वे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट में जज बनाये गये थे।

पहली बार 2016 में सुर्खियों में आए थे गोगोई

जस्टिस रंजन गोगोई पहली बार वर्ष 2016 में तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ही एक रिटायर्ड जज मार्कंडेय काटजू को कोर्ट की अवमानना का नोटिस भेज दिया था। दरअसल काटजू ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में सौम्या रेप और मर्डर केस में शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में आरोपी को रेप का दोषी ठहराया था, परंतु हत्या का नहीं। इस मुकदमे का फैसला जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने ही सुनाया था। अवमानना नोटिस के बाद सेवा निवृत्त जस्टिस काटजू को कोर्ट में उपस्थित होकर फेसबुक पोस्ट के लिये माफी माँगनी पड़ी थी। इसके बाद यह मामला वहीं पर खत्म हो गया था।

प्रामाणिकता के प्रतीक हैं गोगोई, अपना मकान भी नहीं है

दूसरी बार जस्टिस रंजन गोगोई 2018 के शुरुआती महीने में तब सुर्खियों में आए थे, जब सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर के नेतृत्व में मीडिया के समक्ष आये थे और सुप्रीम कोर्ट की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। इन चार जजों में एक जस्टिस रंजन गोगोई भी शामिल थे। इसके बाद इसी साल सितंबर 2018 में उन्हें 45वें सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा के स्थान पर 46वाँ सीजेआई नियुक्त किया गया था। उन्होंने 3 अक्टूबर-2018 को देश के प्रधान न्यायाधीश का पदभार सँभाला था। सीजेआई गोगोई पूर्वोत्तर के पहले ऐसे जज हैं, जो सीजेआई बने। इसके अलावा वह सुप्रीम कोर्ट के उन 11 जजों में भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी संपत्ति सार्वजनिक की है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जस्टिस गोगोई के पास अपना कोई मकान नहीं है। उनके पास अपनी कोई ज्वैलरी भी नहीं है और उनकी पत्नी के पास जो ज्वैलरी है वह शादी के समय गिफ्ट के तौर पर मिली ज्वैलरी है।

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