मोदी विरोधी मोर्चा या भ्रमजाल ? : कांग्रेस के इस सबसे बड़े सहयोगी नेता को सोनिया के विदेश मूल से आपत्ति, राहुल को नहीं मानते रेस में, तो फिर कौन बनेगा प्रधानमंत्री ?

लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा और एनडीए में शामिल दलों को छोड़ कर शेष जितने भी राजनीतिक दल चुनाव मैदान में हैं, उन सभी का एक ही लक्ष्य है नरेन्द्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनने से रोकना। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कांग्रेस सहित तमाम मोदी विरोधी राजनीतिक दलों ने अपने मतभेदों, मनभेदों और विरोधाभासों को दरकिनार करने की कोशिश में बेंगलुरू से लेकर कोलकाता और दिल्ली तक कई बार सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाई, परंतु जब लोकसभा चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है, तब आप स्वयं ही जानते हैं कि मोदी विरोधी मोर्चा हर राज्य में किस कदर बिखरा हुआ है।

यद्यपि मोदी विरोधी मोर्चा बनाने की कांग्रेस की कवायद में उसके सबसे बड़े भागीदार आज की तारीख में कोई है, तो वह है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और उसके अध्यक्ष शरद पवार। 1967 से कांग्रेस में सक्रिय हुए और एक समय महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक दबदबा रखने वाले शरद पवार भी अपने लंबे राजनीतिक कैरियर में प्रधानमंत्री बनने का सपना देखें, इसमें कोई बुराई नहीं है, परंतु 1999 में जब उन्हें लगा कि कांग्रेस में रहते हुए उनका पीएम बनने का सपना कभी पूरा नहीं हो पायेगा, तो उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठा कर एनसीपी बना ली।

कहीं स्वयं तो PM नहीं बनना चाहते शरद पवार ?

यद्यपि एनसीपी बनाने के बाद भी उनकी कांग्रेस से निकटता बनी रही, क्योंकि वे भाजपा-शिवसेना या एनडीए के साथ तो जा नहीं सकते थे। इसलिए उन्होंने हर चुनाव में महाराष्ट्र में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और लोकसभा चुनाव 2019 में भी महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के विरुद्ध कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन है।

अब सवाल यह उठता है कि मोदी विरोध के नाम पर उभरता दिखता और विरोधाभासों से भरपूर यह मोदी विरोधी मोर्चा है या कोई भ्रमजाल ? यह सवाल इसलिए उठता है, क्योंकि मोदी विरोधियों की टोली में मायावती, अखिलेश, ममता, चंद्रबाबू नायडू, केसीआर जैसे नेता ‘अपनी-अपनी डफली, अपना-अपना राग’ आलाप रहे हैं, तो इसी टोली में शामिल कांग्रेस के सबसे बड़े सहयोगी नेता शरद पवार ने अब कांग्रेस और राहुल गांधी को चुभने वाला वक्तव्य दे दिया है। इनके इस वक्तव्य का एक अर्थ यह भी निकलता है कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल हुईं, तो वे शरद पवार भी प्रधानमंत्री बनने का अवसर हाथ से नहीं जाने देंगे।

‘राहुल ही क्यों, कोई भी बन सकता है PM’

एक तरफ जब लोकसभा चुनाव 2019 के प्रथम चरण के अंतर्गत आज जब महाराष्ट्र की 7 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है, तब शरद पवार ने मतदान से ठीक एक घण्टे पहले कहा कि विपक्ष का पहला लक्ष्य भाजपा को हराना है। राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने की रेस में नहीं हैं। कांग्रेस को 100 से अधिक सीटें मिल सकती हैं और परिणाम के बाद का गठबंधन ही निर्णय करेगा कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा ? जिस तरह देश की जनता ने 2004 और 2009 में मनमोहन सिंह को PM के रूप में स्वीकार किया, उसी तरह कोई और चेहरा देश के पीएम के रूप में सामने आएगा। पवार से पूछा गया कि प्रधानमंत्री के रूप में वह चेहरा किस पार्टी का होगा, तो वे बोले कि वह चेहरा कांग्रेस और उसके साथ शामिल पार्टी में से ही किसी का होगा।

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