‘मोदी ज़िनपिंग से डरते हैं’ कहने वाले राहुल के मुँह पर सिंघवी का तमाचा, SC में TIK TOK का किया बचाव, सरकार ने फैसले से ही पहले लगा दिया TIK TOK पर प्रतिबंध

कांग्रेस का भारतीय संस्कृति से खिलवाड़ करने वाला चेहरा एक बार फिर उजागर हुआ है। मोदी सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट (HC) के आदेश का पालन करते हुए भारतीय संस्कृति से खिलवाड़ करने वाले और विशेषकर अवयस्क बालकों को सेक्स रैकेट की ओर धकेलने वाले चीनी शॉर्ट वीडियो मोबाइल एप्लिकेशन TIK TOK को अपने एप स्टोर से हटाने का एपल और गूगल को आदेश दिया है, वहीं ? उच्चतम् न्यायालय में कांग्रेस का फ़रेबी चेहरा एक बार फिर तब उजागर हो गया, जब कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी इस एप की मालिक चीनी कंपनी का बचाव करते हुए दिखाई दिए।

सुप्रीम कोर्ट में चीनी कंपनी का बचाव कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी कदाचित यह भूल गए कि वे उसी कांग्रेस के नेता भी हैं, जिनके अध्यक्ष राहुल गांधी अक्सर कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से डरते हैं। एक तरफ राहुल चीनी राजदूत से गोपनीय तरीके से मिलते हैं, दूसरी तरफ अभिषेक मनु सिंघवी भारत के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली मोबाइल एप की मालिक कंपनी के लिए पैरवी करते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नीति और विचारधारा तथा कथनी और करनी में फर्क साफ झलकता है। सिंघवी ने वकालत के पेशे के जरिए पार्टी और राहुल गांधी के मुँह पर जोरदार तमाचा जड़ा है।

HC ने क्यों दिया था टिक टोक पर रोक लगाने का आदेश ?

एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट ने गत 3 अप्रैल को माना कि टिकटोक एप का शॉर्ट वीडियो बनाने के लिये बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है और अवयस्क बालकों को सेक्स रैकेट की ओर धकेला जा रहा है। मद्रास हाई कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए केन्द्र सरकार को इस टिक टोक एप पर तत्काल प्रतिबंध लगाने के लिये कहा था। इस एप की मालिक चीनी कंपनी बाइट डांस की ओर से मद्रास हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, परंतु सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि मद्रास हाईकोर्ट का आदेश एक अंतरिम आदेश है और वह अभी इस मामले की सुनवाई कर रही है।

SC का रोक से इनकार, हरकत में मोदी सरकार

सुप्रीम कोर्ट की ओर से मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करने के साथ ही मोदी सरकार हरकत में आ गई और उसने सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश की प्रतीक्षा न करते हुए तत्काल टिक टोक एप पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाया। मोदी सरकार के इलेक्ट्रोनिक्स और सूचना प्रोद्योगिकी मंत्रालय (MEIT) ने तत्काल कदम उठाया और गूगल व एप्पल को उनके एप स्टोर से इस एप्लीकेशन को तुरंत हटाने को कहा है।

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करते नजर आए सिंघवी

दूसरी तरफ चीनी कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेशन का बचाव करने के लिये उतरे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील पेश की कि अभी तक एक अरब से भी ज्यादा बार इस एप को डाउनलोड किया गया है। मद्रास हाईकोर्ट को एप पर पाबंदी लगाने का आदेश देने से पहले कोई नोटिस जारी करना चाहिये था, जो कि नहीं किया गया। कंपनी की ओर से दलील भी नहीं सुनी गई और कंपनी का पक्ष सुने बिना ही आदेश दे दिया गया है। बचाव पक्ष की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट में अभी इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई है और जहाँ तक सुप्रीम कोर्ट का प्रश्न है तो सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हो जाने के बाद विचार करने का विकल्प खुला रखा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 22 अप्रैल को करेगी।

पहले भी कांग्रेस के वकील रहे हैं विवादों में

इससे पहले भी कांग्रेस नेता इस देश के बहुसंख्यकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले और अल्पसंख्यकों की तुष्टिकरण वाले कदम उठा चुकी है। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही राम मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने तक सुनवाई टालने की दलील पेश करके राम मंदिर मामले की सुनवाई में रोड़ा अटकाने का काम किया था। यह वही कांग्रेस है जो राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े करती आई है।

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