और इस तरह राहुल के गुजराती ‘गुरु’ ने गुजराती PM मोदी को दे दिया FREE HIT का मौका

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी जिस न्यूनतम् आय योजना (NYAY) के बलबूते लोकसभा चुनाव 2019 का महासंग्राम जीतने का दम भर रहे हैं, उसके जनक हैं सैम पित्रोदा। मूलतः गुजराती सैम पित्रोदा इस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा के तमाम नेता सैम पित्रोदा को राहुल गांधी का राजनीतिक गुरु बता रहे हैं। वैसे राहुल गांधी ने गुजराती सैम पित्रोदा से न्याय के जरिए गुजराती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध मास्टरस्ट्रोक चला था, परंतु अब वही सैम पित्रोदा ने दो चरणों के मतदान से पहले नरेन्द्र मोदी को फ्री हिट मारने का मौका दे दिया।

दरअसल लोकसभा चुनाव 2019 के छठे और सातवें चरण में जहाँ मतदान होना है, उनमें पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्य शामिल हैं और इन राज्यों का जुड़ाव विशेष रूप से सिख विरोधी दंगों से है। यही कारण है कि पाँचवें चरण के मतदान के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार में अचानक पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी की एंट्री करा दी। मोदी ने राजीव को भ्रष्टाचारी नंबर 1 बताने से शुरुआत की और फिर राजीव की कथित छुट्टियों, बोफोर्स तोप घोटाले से लेकर सिख विरोधी दंगों को भी मुद्दा बना डाला। इसके साथ ही राहुल गांधी सहित पूरी कांग्रेस बौखला गई। राहुल-प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों ने मोदी पर ताबड़तोड़ हमले बोले। कांग्रेस, राहुल और प्रियंका ने भी दिवंगत राजीव के नाम पर सहानुभूति जुटाने की कोशिश करते हुए मोदी पर निशाना साधा, परंतु अचानक कांग्रेस के नीति-निर्धारक और राहुल के कथित राजनीतिक गुरु सैम पित्रोदा ने NO BALL डाल दी।

सैम ने बोला और मोदी ने नारा बना डाला, ‘हुआ तो हुआ’ !

सैम पित्रोदा ने दरअसल सिख विरोधी दंगों पर एक वक्तव्य दे दिया, परंतु सैम के इस वक्तव्य ने 1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। सैम पित्रोदा ने कहा, ‘आप (भाजपा) तो लगातार झूठ बोलते ही रहते हैं, पहले हारे पर झूठ बोला, कल आप पर बोला। 1984 का मुद्दा क्या है, आप तो बात करिए। आपने पाँच साल में क्या किया, 84 में हुआ तो हुआ, आपने क्या किया ?’ इधर सैम ने तो आवेश में हुआ तो हुआ कहा, उधर मोदी ने हुआ तो हुआ को नारा बना डाला। सिख विरोधी दंगों को लेकर हमेशा घिर जाने वाली कांग्रेस को सैम पित्रोदा ने यह वक्तव्य देकर बैकफुट पर ला दिया। सैम का वक्तव्य कांग्रेस के लिए नो बॉल और भाजपा-मोदी के लिए फ्री हिट बन गया। मोदी ने छठे चरण के मतदान के लिए प्रचार के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को सैम पित्रोदा के बयान पर पूरी कांग्रेस पार्टी को लपेटा और सिख मतदाताओं के बीच यह संदेश पहुँचाने की कोशिश की कि कांग्रेस की सोच आज भी सिख विरोधी है।

2019 के मणिशंकर अय्यर सिद्ध होंगे सैम ?

लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कांग्रेस पार्टी के अधिवेश के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए कह दिया था कि नरेन्द्र मोदी अगर चाय वाले हैं, तो वे यहाँ (अधिवेशन में) आकर चाय बेच सकते हैं। भाजपा ने अय्यर के इस चाय वाले को ही चुनावी मुद्दा बना दिया था। अब ऐसे में जबकि अभी दो चरणों में महत्वपूर्ण राज्यों में 118 लोकसभा सीटों के लिए मतदान बाकी है, तब सैम पित्रोदा ने सिख विरोधी दंगों पर इस तरह की टिप्पणी करके भाजपा को फिर एक बार कारगर मुद्दा दे दिया। इससे पहले राहुल ने चौकीदार चोर का नारा दिया। भाजपा और मोदी ने इसके विरुद्ध मैं भी चौकीदार का नारा देकर जवाब दिया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पूर्वांचल, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में होने वाले छठे और सातवें चरण के मतदान से पहले इस तरह का बयान देकर सैम पित्रोदा कहीं 2019 के मणिशंकर अय्यर तो नहीं सिद्ध होंगे ?

राजीव के ज़माने से कांग्रेस से संबंध

सैम पित्रोदा ने गुरुवार को ही अपना 77वाँ जन्म दिन मनाया। उनका जन्म ओडिशा के तितलागढ़ में गुजराती माता-पिता के घर हुआ था। पित्रोदा ने गुजरात में आणंद जिले के वल्लभ विद्यानगर से स्कूली शिक्षा और वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव युनिवर्सिटी (MSU) से फिज़िक्स व इलेक्ट्रॉनिक्स की मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद वे अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने 1964 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की मास्टर डिग्री प्राप्त की। उनका स्थाई पता शिकागो-अमेरिका है, परंतु वे भारतीय नागरिक हैं और वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं। सैम पित्रोदा 1981 में अमेरिका से भारत लौटे। सैम पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के क़रीबी दोस्त हैं और वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उन्हीं की बताई-बनाई रणनीतियों पर आगे बढ़ रहे हैं।

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