राजीव-राहुल के ‘उस्ताद’ अय्यर ने ‘नीचता’ दोहराई और आरोप मीडिया पर लगा कर ‘निर्लज्जता’ भी दिखाई !

मणिशंकर अय्यर को 28 वर्षों से क्यों ‘झेल’ रही है कांग्रेस ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 14 मई, 2019। जब कोई व्यक्ति किसी तारीख और वर्ष विशेष का उल्लेख करते हुए यह कहता है कि मैंने सही कहा था न ? तो इसका क्या अर्थ निकाला जाएगा ? अर्थ निकालने के लिए उस व्यक्ति के उस तारीख और वर्ष विशेष के कथन को ही तो खंगाला जाएगा। ऐसा ही मीडिया ने किया और मणिशंकर अय्यर बेशर्मी पर आमादा हो गए।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धुर विरोधियों में एक कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने एक लेख लिखा। इस लेख से स्पष्ट निष्कर्ष निकला कि अय्यर ने अपनी ‘नीचता’ को फिर एक बार दोहराया। उस ‘नीचता’ को दोहराया है, जिसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कहने पर अय्यर ने माफी तक मांग ली थी। अय्यर के सेल्फ गोल से गुजरात में कांग्रेस मुसीबत में पड़ गई। राहुल के कहने पर अय्यर की माफी भी काम नहीं आई और गुजरात की जनता ने कांग्रेस के लिए शासन के दरवाजे नहीं खोले। गुजरात के लोगों ने कम सीटों के साथ ही सही, पर सत्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) के हाथों में ही सौंपना ठीक समझा।

‘नीचता’, निलंबन, निरस्त और फिर ‘नीचता’

यहाँ गुजरात का उल्लेख इसलिए करना पड़ा, क्योंकि मणिशंकर अय्यर ने अपने लेख में जिस तारीख और वर्ष का उल्लेख किया है, उस समय गुजरात में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। इस लेख में मणिशंकर ने मणिशंकर अय्यर ने लिखा, ‘क्या प्रधानमंत्री मोदी जीतेंगे ? 23 मई को देश की जनता उन्हें सत्ता से बाहर कर देगी। क्या आपको याद है कि मैंने 7 दिसम्बर, 2017 को क्या कहा था, क्या मेरी भविष्यवाणी सही नहीं थी ?’ अब जबकि अय्यर अपने लेख में 7 दिसम्बर, 2017 का उल्लेख करते हैं, तो स्वाभाविक है मीडिया उनके उस दिन के बयान को ही आधार बनाएगा। मीडिया की याददाश्त तो वैसे भी बहुत मजबूत होती है। मीडिया को तुरंत पता चल गया कि 7 दिसम्बर, 2017 को अय्यर ने गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ कहा था। इसके बाद कांग्रेस ने अय्यर को पार्टी से निलंबित कर दिया था, परंतु 8 महीने में ही कांग्रेस को लगा कि अय्यर सुधर गए होंगे इसलिए उनका निलंबन रद कर दिया गया और वे फिर से कांग्रेसी बन गए। नीच वाले बयान के कारण आठ महीनों तक निलंबित रहने के बावजूद आज अय्यर ने लेख में अपनी उसी ‘नीच’ सोच को प्रकट करके यह बता दिया कि वे अपनी ‘नीचता’ से बाज़ नहीं आएँगे।

मीडिया के सही अर्थघटन पर अय्यर की बेशर्मी

अय्यर ने अपने लेख में तारीख-वर्ष सहित अपने कथन का उल्लेख किया। ऐसे में मीडिया उस कथन को आधार बना कर लेख से यही निष्कर्ष निकेलागा न कि मणिशंकर अय्यर यह कहना चाहते हैं कि उन्होंने मोदी को नीच किस्म का आदमी कहा था और वह सही था। जब मीडिया ने सही अर्थघटन किया, तो अय्यर बेशर्मी पर आमादा हो गए। उन्होंने उल्टे मीडिया पर आरोप मढ़ दिया कि मीडिया ने उन्हें बदनाम कर दिया है। अय्यर ने मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘मैं मीडिया का शिकार रहा हूँ और इससे मेरी छवि को नुकसान पहुँचा है। एक पूरा आर्टिकल है, आप उसकी एक पंक्ति चुन कर कहें कि इस पर बताइए, तो मैं तुम्हारे (मीडिया के) खेल में पड़ने को तैयार नहीं हूँ। मैं उल्लू हूँ, लेकिन इतना बड़ा उल्लू नहीं हूँ। कुछ लोग हैं, जो मुझसे नफरत करते हैं और मुझे निशाना बनाते हैं, क्योंकि मैं सच कहता हूँ। ऐसे लोग पिछले समय में मुझे नुकसान पहुँचा चुके हैं।’

कौन हैं मणिशंकर अय्यर ?

वर्तमान कांग्रेस में वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर का जन्म 1941 में लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने दिल्ली और कैम्ब्रिज युनिवर्सिटी से विविध शैक्षणिक उपाधियाँ ग्रहण कीं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ही वे सहपाठी राजीव गांधी के सम्पर्क में आए। 1963 में अय्यर ने भारतीय विदेश सेवा (IFS) में सेवाएँ शुरू कीं। वे देश के संयुक्त विदेश सचिव रहे। अय्यर ने कराची में प्रथम भारतीय कॉन्सल जनरल के रूप में 1978 से 1982 तक सेवाएँ दीं। 1989 में इस्तीफा देकर उन्होंने मीडिया और राजनीति में प्रवेश किया। अय्यर ने 1991 में कांग्रेस जॉइन कर तमिलनाडु की माइलादुथुराई लोकसभा सीट से चुनाव जीत कर पहली बार संसद पहुँचे। 1999 और 2004 में भी वे इसी सीट से जीते। यद्यपि 1996, 1998 और 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस प्रकार अय्यर पिछले 28 वर्षों से कांग्रेस में हैं और इस दौरान अपनी विवादास्पद करतूतों से कई बार पार्टी को संकट में डाल चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण के मतदान से पहले नीच वाला बयान दोहरा कर अय्यर ने फिर एक बार कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है।

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