और FAIL हो गया कांग्रेस का ‘STOP MODI-SHAH’ प्लान : SC के DOUBLE DOSE के आगे राहुल ने जोड़े हाथ और सुष्मिता ने खाई मात

चुनावी सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) के अध्यक्ष अमित शाह को कानूनी दाँवपेच में फँसाने का कांग्रेस का ‘स्टॉप मोदी-शाह’ प्लान फेल हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के एक ही दिन में दो ऐसे झटके दिए कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को जहाँ माफी मांगनी पड़ी, वहीं महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव को मोदी-शाह को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में फँसा कर चुनाव प्रचार करने से रोकने की रणनीति में मात खानी पड़ी।

सबसे पहले बात करते हैं सुष्मिता देव की। सुष्मिता महिला कांग्रेस की अध्यक्ष होने के साथ-साथ असम की सिल्चर लोकसभा सीट से पार्टी प्रत्याशी भी हैं, जहाँ उन्हें भाजपा के राजदीप रॉय से कड़ी टक्कर मिल रही है। कांग्रेस ने सुष्मिता को माध्यम बना कर चाल चली और सुप्रीम कोर्ट (SC) में याचिका दायर कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को चुनाव प्रचार अभियान से हटा कर कानूनी पचड़े में डालने की कोशिश की। सुष्मिता ने याचिका में आरोप लगाया था कि मोदी-शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान अपने वक्तव्यों से कई बार आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया था कि वह चुनाव आयोग (EC) को मोदी-शाह के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दे।

EC दे चुका क्लीन चिट : SC

सुष्मिता देव की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग मोदी और शाह को आचार संहिता के उल्लंघन के विभिन्न मामलों में क्लीन चिट दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि आपको ईसी के फैसले पर आपत्ति है, तो नई याचिका दायर की जा सकती है। इससे पहले एससी के निर्देश पर ईसी ने अपने जवाब में कहा था कि ईसी के पास जो शिकायत आई थी, वह कांग्रेस के नाम से आई थी, सुष्मिता देव के नाम से नहीं। एससी ने सोमवार को सुष्मिता से कहा था कि वे मोदी-शाह को ईसी के क्लीन चिट देने संबंधी आदेश को रिकॉर्ड पर लाए। एससी ने कहा कि ईसी ने शिकायतों पर ‘सही’ या ‘ग़लत’ फ़ैसला कर लिया है। ऐसी स्थिति में ईसी के निर्णय को चुनौती दी जा सकती है। इसीलिए सुष्मिता की याचिका ख़ारिज की जाती है। ईसी के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिन लोगों ने शिकायत की थी, उनमें से किसी भी व्यक्ति ने ईसी के निर्णय पर आपत्ति नहीं जताई है। सुष्मिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ईसी ने मोदी-शाह के विरुद्ध शिकायतें निरस्त करने के पीछे कोई कारण नहीं बताए हैं। इस तरह तमाम दलीलों और वाद-विवाद के बावजूद कांग्रेस को मोदी-शाह को टार्गेट करने के अपने प्लान में सफलता नहीं मिली।

जेल जाने से घहराए राहुल ने घुटने टेके

उधर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के गत 10 अप्रैल के फ़ैसले पर ग़लतबयानी कर अदालती अवमानना के केस में बुरी तरह फँस गए। राहुल ने एससी के राफेल डील के लीक दस्तावेजों पर पुनर्विचार के लिए तैयार होने का जो फ़ैसला सुनाया था, उस पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने माना की चौकीदार चोर है। सुप्रीम कोर्ट के हवाले से बयान देकर फँसे राहुल को भाजपा नेता मिनाक्षी लेखनी कोर्ट में घसीटा। राहुल ने पहले तो अपनी अपरिपक्वता का प्रदर्शन करते हुए एक बार नहीं, बल्कि दो बार अपने बयान पर ख़ेद जताया। राहुल ने समझा कि खेद से काम चल जाएगा, परंतु जब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ाई बरती, तो राहुल को एहसास हो गया कि हाथ जोड़े बिना जेल जाने से बचा नहीं जा सकेगा। इसीलिए राहुल गांधी ने अदालती अवमानना के केस में बुधवार को तीसरा हलफनामा देकर माफी मांग ली। यद्यपि यह माफी स्वीकार होती है या नहीं ? इस पर सुनवाई शुक्रवार को होनी है।

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