कश्मीर पर कांग्रेस की भ्रांत दशा : अब EU दौरे के ‘मायने’ समझने में कर डाली ग़फ़लत

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 30 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। कश्मीर को लेकर कांग्रेस अभी तक भ्रांत दशा में ही है। 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस कन्फ्यूज़ है और अभी तक वह अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पाई है। अब विदेशी सांसदों के कश्मीर दौरे को लेकर भी ‘मोदीफोबिया’ से ग्रस्त कांग्रेस इस दौरे के मायने समझने में ग़फ़लत कर रही है। दरअसल कांग्रेस एक राजनीतिक दल के रूप में हर मोर्चे पर मोदी सरकार से गच्चा खा रही है। लोकसभा चुनाव हो या मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक का बिल हो अथवा कश्मीर से धारा 370 को हटाने का मामला। हर जगह मोदी सरकार ने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों और नेताओं को मात दी है। यूरोपियन यूनियन के 27 सांसद दो दिन के कश्मीर दौरे पर आये हैं। सोमवार को इन सांसदों ने दिल्ली पहुँचने के बाद पीएम मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और मंगलवार तथा बुधवार को कश्मीर का दौरा किया। इस दौरे के बाद विदेशी सांसदों ने जो कुछ कहा, उससे न सिर्फ कांग्रेस, एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन औवेसी, अन्य विपक्षी नेताओं के अलावा विदेशी मीडिया और पाकिस्तान को भी करारा जवाब मिल गया।

मोदी विरोध की सोच से उबर नहीं पा रही कांग्रेस

ये और बात है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी की राजनीतिक अपरिवक्वता यहाँ भी जाहिर हो गई। विदेशी सांसदों के दौरे से पहले राहुल गांधी ने ट्वीट करके कहा था कि विदेशी सांसदों को कश्मीर दौरा करने की इजाजत दी गई है, जबकि उनके नेतृत्व में स्वदेश के विपक्षी नेताओं के दल को दौरा करने से रोक दिया गया था, इससे ऐसा लगता है कि कुछ न कुछ ऐसा है जो बहुत गलत है। प्रियंका गांधी भी विदेशी सांसदों के पीएम से मिलने पर सवाल उठा रही हैं, वे कहती हैं कि किसान और बेरोजगार लोगों को भले ही पीएम से मिलने की इजाज़त न मिले, परंतु एक विदेशी बिज़नेस ब्रोकर विदेशी सांसदों को न सिर्फ पीएम से मिलवाती हैं, बल्कि उनके भारत दौरे का सरकार खर्च भी उठाती है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला विदेशी सांसदों को कश्मीर दौरे पर बुलाने को देश की संसद और प्रजातंत्र का घोर अपमान बताते हैं। वे यह भी कहते हैं कि मोदी सरकार ने कश्मीर पर भारत की नीति को पलटकर अक्षम्य अपराध किया है। अनजान थिंक टैंक द्वारा यूरोपीय सांसदों को भारत ला कर कश्मीर का दौरा करवा कर मोदी सरकार ने कश्मीर का अंतरराष्ट्रीयकरण किया है। कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने भी कहा कि यदि विदेशी प्रतिनिधिमंडल को अतिथि बना कर कश्मीर का दौरा और सैर करवाई जाती है तो स्वदेशी सांसदों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जाता है ? यह बयान दर्शाते हैं कि कांग्रेस मोदी विरोध की सोच से बाहर नहीं निकल पा रही है।

इससे पहले भी 5 अगस्त को धारा 370 हटाये जाने के बाद से कांग्रेस नेता ग़ुलामनबी आज़ाद, अधीररंजन चौधरी, पी. चिदंबरम सहित नेताओं ने मोदी सरकार के विरोध की अपनी पार्टी लाइन को मजबूती से पकड़े रखा था, जबकि कई युवा नेताओं ने कांग्रेस की इस सोच का खुल कर विरोध किया था और मोदी सरकार का समर्थन भी किया था। इससे कांग्रेस में घमासान मच गया था।

कांग्रेस वालों को कश्मीर जाने से किसने रोका, जाएँ : भाजपा

हालांकि मंगलवार को ही भाजपा ने कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के नेताओं को जवाब दे दिया था। भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि कांग्रेस वालों को कश्मीर जाना है तो सुबह की फ्लाइट पकड़ कर चले जायें। गुलमर्ग जायें, अनंतनाग जायें, सैर करें, घूमें-टहलें, किसने उन्हें रोका है ? अब तो आम पर्यटकों के लिये भी कश्मीर को खोल दिया गया है। कांग्रेस के नेता जिस समय की बात कर रहे हैं, उस समय तो बाबा बर्फानी की यात्रा भी रोक दी गई थी, उस पर तो कांग्रेस के नेता क्यों कुछ नहीं कहते। दरअसल जब धारा 370 हटाई गई थी तब सुरक्षा कारणों से कुछ कदम उठाने पड़े थे, जिससे कुछ लोगों को परेशानी भी हुई, परंतु जैसे-जैसे कश्मीर में हालात सामान्य होते गये, वैसे-वैसे पाबंदियाँ हटती गईं और अब कहीं भी कोई पाबंदी लागू नहीं है।

औवेसी को यूरोपीय सांसदों का करारा जवाब

भाजपा ने तो जवाब दिया ही, विदेशी सांसदों ने भी कांग्रेस के साथ-साथ असदुद्दीन औवेसी को भी कड़ी लताड़ लगाई। औवेसी ने विदेशी सांसदों के बारे में कहा था कि मोदी सरकार कश्मीर में नाज़ी समर्थकों को भेज रही है। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों को कश्मीर भेजा जा रहा है, जो नाज़ी विचारधारा के समर्थक रहे हैं और खुद को फासिस्ट कहते रहे हैं। इसके जवाब में फ्रांस की दी रिपब्लिकंस पार्टी के सदस्य 61 वर्षीय थियरी मरिआनी ने कहा कि मैंने कुछ अखबारों और टीवी में देखा है, जिसमें कुछ लोग हमें नाज़ी समर्थक कह रहे हैं, यह सुनकर मुझे हैरानी हुई। उन्होंने कहा कि ऐसा कहने से पहले हमारे बारे में जान लेना चाहिये, किसी के बारे में भी कुछ कहने से पहले उनके बारे में पढ़ लेना चाहिये। मरिआनी ने कहा कि उनका 40 साल का पॉलिटिकल करियर है, यदि ऐसा होता तो उन्हें चुना नहीं जाता। वे फ्रांस में परिवहन मंत्री रहे हैं। अलग-अलग पदों पर 14 बार चुने गये हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में उन्होंने आम लोगों से बात की, जिन्होंने कहा कि वे भी वैसे ही भारतीय हैं, जैसे देश के अन्य हिस्सों के लोग हैं। उन्होंने कहा कि वे लगभग 20 बार भारत आ चुके हैं। इससे पहले वे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में गये थे। उनका लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के बारे में जानकारी हासिल करना था। उन्होंने देखा है कि अब कश्मीर में स्थितियाँ बहाल होने लगी हैं।

कश्मीर भारत का आंतरिक मामला : यूरोपीय सांसद

फ्रांस के ही एक अन्य सांसद हेनरी मलोसे ने कहा कि धारा 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है, हमारी चिंता आतंकवाद को लेकर है, जो एक वैश्विक समस्या और खतरा है, इससे लड़ाई में हम पूरी तरह से भारत के साथ हैं। उन्होंने डेलीगेशन के कश्मीर दौरे के दौरान ही मंगलवार रात को कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा की गई 6 गैर कश्मीरी मजदूरों की हत्या की घटना की निंदा की और कहा कि ऐसा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। हेनरी ने कहा कि उनकी टीम ने घाटी में सेना और पुलिस से काफी जानकारियाँ प्राप्त की, इसके अलावा युवा एक्टिविस्ट्स से भी बात की और शांति के विचारों को साझा किया। यूनाइटेड किंगडम के सांसद न्यूटन डन और पोलैंड के सांसद रेजार्ड जानरनेकी ने अपने इस दौरे को आँखें खोलने वाला बताया। उन्होंने कहा कि हम यूरोप से हैं, जिसे सालों की लड़ाई के बाद शांति मिली है। हम ग्लोबल टेररिज्म के विरुद्ध लड़ाई में भारत के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जो दिखाया है, वह पक्षपातपूर्ण है। हमने ग्राउण्ड ज़ीरो पर जो देखा है, वह हम अपने देश लौटकर बताएँगे। न्यूटन ने कहा कि भारत का इतिहास शांति का रहा है। एक अन्य सांसद ने कहा कि हमें भारत का समर्थन करने की जरूरत है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। एक यूरोपीय सांसद निकोलस फेस्ट ने कहा कि यदि यूरोपीय सांसद कश्मीर आ सकते हैं तो मुझे लगता है कि भारतीय विपक्ष को भी कश्मीर जाने की अनुमति देनी चाहिये। एक यूरोपीय सांसद ने भारत का पुरजोर समर्थन करते हुए यहाँ तक कहा कि घाटी में पाकिस्तान से आतंकवादियों को फंडिंग होती है। घाटी में आतंकवाद बड़ी समस्या है और इससे निपटने में हम भारत के साथ हैं।

मोदी सरकार की कूटनीति समझ नहीं पा रही कांग्रेस ?

इस प्रकार यूरोपीय सांसदों के शब्दों से साफ है कि यह मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता है, जिसे दुनिया में कश्मीर पर प्रोपेगेंडा फैला रहे पाकिस्तान की पोल खोलने के लिये मोदी सरकार की ओर से अपनाया गया। अब स्वयं यूरोप के ये सांसद पाकिस्तान की पोल खोलेंगे और उस विदेशी मीडिया को भी धता बताएँगे, जो कश्मीर को लेकर दुनिया में गलत जानकारियाँ पहुँचा रहा है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस समेत विपक्षी दल मोदी विरोध के अंधानुकरण में सही गलत का अंतर भूल से गये हैं और यूरोपीय सांसदों को बुलाकर कश्मीर का दौरा कराने के पीछे छिपे मोदी सरकार के मायने को समझने में ग़फलत कर रहे हैं, जिसे वे मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता बता रहे हैं, दरअसल वही मोदी सरकार की कूटनीतिक सफलता है, जिसे वे समझ नहीं पा रहे हैं। मोदी सरकार के इस एक मात्र कदम ने दुनिया में भारत का सकारात्मक पहलू पहुँचाया है, वहीं आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर झूठ फैलाने वाले विदेशी मीडिया को पीएम मोदी ने करारी शिकस्त दी है।

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