CRPF MADADGAAR : जिसने कश्मीर घाटी में पहुँचाई दवाइयों से लेकर हवाई टिकट तक की मदद

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। एक तरफ जब पाकिस्तान कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद (UNHRC) तक ले गया है, जहाँ वह भारत पर कश्मीरी नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन करने और सेनाओं के माध्यम से कश्मीरी नागरिकों पर अत्याचार किये जाने के आरोप लगा रहा है। वहीं दूसरी ओर हम आपको बताते हैं कि भारतीय सैन्य बल किस तरह से कश्मीरियों की मदद और सेवा कर रहे हैं। भारतीय सैन्य बल केवल दुश्मनों से लड़ने के लिये ही नहीं जाने जाते हैं, बल्कि प्राकृतिक और कृत्रिम आपदाओं के समय वे राहत और बचाव कार्यों में भी उतने ही जोशो-खरोश से बढ़-चढ़ कर भूमिका निभाते हैं। ऐसा ही सेवा यज्ञ इन दिनों कश्मीर में चल रहा है, जिसके प्रायोजक हैं केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल यानी सीआरपीएफ।

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद सुरक्षा कारणों से कुछ पाबंदियाँ लगाई गईं थी। इन पाबंदियों के बावजूद आम नागरिकों को कोई परेशानी न हो, इसके लिये केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की ‘CRPF MADADGAAR’ द्वारा लोगों को हर संभव मदद पहुँचाई गई। सीआरपीएफ की ‘मददगार’ हेल्प लाइन नंबर 14411 व अन्य मोबाइल नंबरों पर अभी तक कुल लगभग 34,274 कॉल आईं। अधिकांश लोगों ने जम्मू कश्मीर में अपने परिवारजनों और रिश्तेदारों की कुशलता जानने के लिये कॉल कीं, वहीं कुछ लोगों ने गंभीर प्रकार के रोगों से ग्रस्त अपने रोगियों के लिये दवाइयाँ मंगाईं, कुछ लोगों ने बस, रेलवे और हवाई जहाज के टिकट की भी मदद मांगी, तो उन्हें मुहैया कराई गई।

मददगार के रूप में सीआरपीएफ ने पहुँचाईं सुविधाएँ

सीआरपीएफ के अधिकारियों के अनुसार जम्मू कश्मीर में 5 अगस्त को धारा 370 खत्म करने का संसद में संकल्प लाया गया था। इससे पहले ही जम्मू कश्मीर में सुरक्षा कारणों से कुछ कड़े प्रबंध किये गये थे। हालाँकि सामान्य लोगों को कोई परेशानियाँ न हों, इसके लिये सीआरपीएफ की मददगार हेल्पलाइन ने लोगों को हर संभव मदद पहुँचाई। एक अधिकारी के अनुसार वैसे तो सीआरपीएफ हेल्पलाइन जून-2017 से कार्यरत है, परंतु 5 अगस्त से लेकर मंगलवार तक इस हेल्पलाइन के विविध मोबाइल नंबरों पर 34,274 कॉल रिसीव की गईं। अधिकारी के अनुसार इनमें से अधिकांश कॉल कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे परिवारजनों तथा रिश्तेदारों की कुशलता और स्थिति जानने के लिये आईं थी, जबकि 1,227 कॉल आपात स्थिति से जुड़े मामलों को लेकर आईं थी और इन मामलों में सीआरपीएफ कर्मियों ने कश्मीरी लोगों के घर-घर जाकर कॉल करने वाले लोगों तथा उनके परिवारजनों के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद की। क्योंकि कश्मीर में सुरक्षा कारणों से टेलीफोन सुविधा भी बंद की गई थी। ऐसे हालात में लोगों ने सीआरपीएफ की हेल्पलाइन की मदद से अपने परिवारजनों से बात करके अपनी चिंता दूर की।

इंटरव्यू से लेकर हवाई टिकट पहुँचाने में की मदद

अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ के जवान अन्य कारणों से भी लोगों के घर पहुँचे, इनमें हवाई टिकट देना, लोगों को जम्मू कश्मीर से बाहर पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षा या इंटरव्यू की तारीख में बदलाव आदि के बारे में सूचित करना और कॉल करने वाले व्यक्ति के अनुरोध पर स्थानीय लोगों को किसी आपात स्थिति के बारे में सूचित करने जैसे भी कारण रहे। अधिकारी के मुताबिक हेल्पलाइन पर मिली कॉल के बाद सीआरपीएफ के जवानों ने लगभग 123 मरीजों को उनके घर पर दवाइयाँ उपलब्ध कराईं। इनमें किडनी, कैंसर, डायाबिटीज़ व अन्य गंभीर प्रकार की बीमारियों से पीड़ित रोगी शामिल थे। अधिकारी ने बताया कि हेल्पलाइन ने कुछ मोबाइल नंबरों के जरिये भी काम किया, क्योंकि इस अवधि के दौरान संचार पाबंदियों के चलते मानक लैंडलाइन नंबर 14411 बाधित हो गया था। अधिकारी ने बताया कि ऐसा नहीं है कि धारा 370 के बाद ही सीआरपीएफ ने यह हेल्पलाइन शुरू की। वास्तव में यह हेल्पलाइन जून-2017 में कश्मीरी लोगों की मदद के लिये शुरू की गई थी। इसका संचालन श्रीनगर में स्थित सीआरपीएफ के एक शिविर से किया जाता है। यह हेल्पलाइन ट्विटर पर भी सीआरपीएफ मददगार के रूप में संचालित होती है।

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