ई-वॉलेट यूज़र्स हो जाएँ सावधान ! यह गैंग डाल सकता है आपके अकाउंट पर डाका

अहमदाबाद, 21 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। साइबर क्राइम के पाँव दिन प्रति दिन फैलते जा रहे हैं। अभी तक साइबर क्राइम के जालसाज़ क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से ही लोगों को चूना लगाते थे, परंतु अब सुरक्षित कहलाने वाले भीम, पेटीएम और गूगल पे जैसी ऐप भी इन जालसाज़ों की पहुँच से दूर नहीं रह गई हैं। अकेले उत्तर प्रदेश में पिछले पाँच महीने में साइबर सेल में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जो दर्शाते हैं कि अगर आप मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा का लाभ ले रहे हैं तो आपको जालसाज़ों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है।

ऐप डाउनलोड करने का ऑफर देकर होती है ठगी

साइबर क्राइम के एसपी सुशील शुले के अनुसार साइबर क्राइम के जालसाज़ पहले मोबाइल फोन पर एक ऐप डाउनलोड करने का ऑफर देते हैं। यह ऐप डाउनलोड किये जाने के बाद जालसाज़ों का गिरोह आपके अकाउंट को उससे लिंक कराने से लेकर स्टेप बाई स्टेप पेमेंट की प्रोसेस को भी पूरा कराते हैं, इसके बाद चालाकी से अपनी यूपीआई आईडी को पैकेज का कूपन बताकर मोबाइल में सेव करा देते हैं। इसके बाद पैसे ट्रांसफर करने के लिये कहते हैं, जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है, बस यहीं पर व्यक्ति इन जालसाज़ों की ठगी के शिकार हो जाते हैं। पूरी प्रोसेस से यह आपके अकाउंट के बारे में पूरी जानकारी एकत्र कर लेते हैं और आपके अकाउंट में हाथ साफ कर जाते हैं।

उत्तर प्रदेश में 5 महीने में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज

सुशील शुले के अनुसार पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक अदनान नाम के व्यक्ति ने जब साइबर सेल में उसके साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई तो साइबर सेल के सामने ठगी का यह नया मामला सामने आया। साइबर सेल की छानबीन में पता चला कि अदनान का पैसा झारखंड के एक खाते में ट्रांसफर हुआ है। खाते की डिटेल जानकारी ली गई तो पता चला कि वह एकाउंट फर्जी था और एकाउंट से सारा पैसा निकाला जा चुका था। एसपी शुले के अनुसार यह साइबर जालसाज़ लिमिट के कारण एक बार में 20 से 30 हजार रुपये तक का चूना लगा सकते हैं। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पिछले पाँच महीनों में इस तरह की जालसाज़ी के एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

नाइज़ीरिया का गिरोह भारत में कर रहा है धोखाधड़ी

सुशील शुले ने मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले लोगों को सतर्क करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले ग्राहक इस प्रकार की ठगी का शिकार ज्यादा बनते हैं। ऐसे मामलों में बैंक ग्राहकों की कोई मदद नहीं कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि जांच में पता चला है कि नाइजीरिया का एक गिरोह अपने देश में सक्रिय है जो इस प्रकार की जालसाज़ी को अंजाम दे रहा है। इस गिरोह के लोग फेसबुक अकाउंट से शिकार की तलाश करते हैं। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश करके उसके एक सदस्य को गिरफ्तार किया था। इसकी पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने लखनऊ के केजीएमयू की एक महिला प्रोफेसर की एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़प कर ली थी।

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