गुजरात-महाराष्ट्र पर मंडराया ‘वायु’ संकट : आफत से निपटने को तैयार प्रशासन

गृहमंत्री अमित शाह ने तैयारियों की समीक्षा की

तूफान के प्रभाव से गुजरात में मौसम बदला

सौराष्ट्र-दक्षिण गुजरात में धूल भरी आँधी के साथ बारिश शुरू

बंदरगाहों पर लगे चेतावनी वाले सिग्नल

मछुआरों को समुद्र में जाने से रोका गया

तूफान के कारण मुंबई और गुजरात में भारी बारिश की संभावना

अहमदाबाद, 11 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम। लोकसभा चुनाव के दौरान ओडिशा में फानी तूफान ने तबाही मचाई थी और अब पश्चिम भारत में गुजरात व महाराष्ट्र पर ‘वायु’ का संकट मंडरा रहा है। ‘वायु’ अरब सागर में उठा एक चक्रवाती तूफान है, जो गुजरात के समुद्री तट की ओर तेजी से बढ़ रहा है और बुधवार देर रात या गुरुवार तक सौराष्ट्र-कच्छ के तटों से टकरा सकता है। तूफान के प्रभाव से गुजरात के मौसम में अचानक बदलाव आया है और सौराष्ट्र व दक्षिण गुजरात में धूल भरी आँधी के साथ बारिश शुरू हो गई है। यदि तूफान दिशा बदली तो यह मुंबई की तरफ भी जा सकता है, इसलिये गुजरात व महाराष्ट्र की सरकारों ने तूफान से उत्पन्न होने वाली आपात परिस्थितियों से निपटने के लिये सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। केन्द्र सरकार भी तूफान पर नज़र बनाये हुए है। गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक करके दोनों सरकारों की तैयारियों का जायजा लिया और उन्हें आवश्यक निर्देश भी दिये।

दरअसल मानसून से पहले अरब सागर में चक्रवाती तूफान ने आकार लिया है, जो तेजी से गुजरात की तरफ बढ़ रहा है। भारत ने इस तूफान का नाम ‘वायु’ रखा है। यह तूफान बुधवार से गुरुवार तक गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ के समुद्र तटों से टकरा सकता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार अभी तूफान ‘वायु’ की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घण्टा है। अगले कुछ घण्टों में जब यह सौराष्ट्र-कच्छ के समुद्र तट पर पहुँचेगा तब तक इसकी गति बढ़कर 110 से 135 किलोमीटर प्रति घण्टा तक हो सकती है। इस प्रकार जैसे-जैसे समय गुजर रहा है, वैसे-वैसे यह तूफान गंभीर चक्रवात में परिवर्तित होने की संभावना है।

मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर में कम दबाव के साथ 12 से 14 जून के बीच गुजरात के वेरावल, जामनगर, माँगरोळ, पोरबंदर और अमरेली जिलों के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात के टकराने की आशंका है। इसके चलते अगले कुछ घण्टों में सौराष्ट्र-कच्छ में आँधी के साथ तेज बारिश होने की भी संभावना है। तटीय क्षेत्रों में नुकसान की आशंका के चलते गुजरात सरकार ने सभी प्रकार की पूर्व तैयारियाँ कर ली हैं। सरकार की ओर से आपातकालीन बैठकों का दौर लगातार जारी है। वहीं मछलियाँ पकड़ने वाले मछुआरों को समुद्र में जाने से रोक दिया गया है। बंदरगाहों पर भी चेतावनी वाले सिग्नल लगाये गये हैं। तूफान के प्रभाव से इसके जद में आने वाले क्षेत्रों में तीव्र गर्मी की भी चेतावनी दी गई है।

गुजरात के तटों पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 26 टीमों को पहले से तैयार रखा गया है। हर टीम राहत और बचाव काम में ली जाने वाली आवश्यक चीजों से लैस है। राज्य सरकार के अनुरोध पर केन्द्र सरकार ने एनडीआरएफ की और 10 टीमों को भी गुजरात के तटवर्ती इलाकों में भेजने का निर्देश दिया है। शाह ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को तूफान के खतरे वाले तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिये हर संभव उपाय करने के निर्देश दिये हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्री ने तटीय इलाकों में बिजली, टेली-कम्युनिकेशन, स्वास्थ्य सेवाएँ, खान-पान जैसी सभी आवश्यक सेवाओं को बरकरार रखने और चक्रवात से नुकसान होने की स्थिति में तत्काल इन सेवाओं को बहाल करने के भी निर्देश दिये हैं। चक्रवात का खतरा गुजरात के अलावा महाराष्ट्र, गोवा और कर्णाटक पर भी बना हुआ है। इसके अलावा यह दिशा बदलकर केन्द्र शासित प्रदेश दीव और दमण की ओर भी जा सकता है। इस आशंका को देखते हुए गृह मंत्री इन राज्यों के स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाये हुए हैं और समय-समय पर उन्हें आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।

अधिकारी ने बताया कि आपात स्थिति से निपटने के लिये इंडियन कोस्ट गार्ड, नेवी और एयरफोर्स की यूनिट को भी अलर्ट पर रखा गया है और सर्विलांस एयरक्राफ्ट तथा हेलीकॉप्टर से स्थिति पर निगरानी की जा रही है। शाह ने कंट्रोल रूम को चौबीसों घण्टे अलर्ट रहने के भी निर्देश दिये हैं।

10 साल में पहली बार गुजरात से टकराएगा चक्रवात

2010 में आया था फेट

गुजरात में पिछले 10 साल में कई बार मानसून से पहले और मानसून के बाद चक्रवाती तूफान आया है। हालांकि किसी भी तूफान ने सीधे-सीधे गुजरात तट को हिट नहीं किया है। जून-2010 में आया फेट नामक तूफान गुजरात के निकट आने के बाद ओमान की तरफ चला गया था। घूमकर फिर गुजरात की तरफ आय़ा और बाद में गुजरात को डराते हुए पाकिस्तान की तरफ चला गया था।

2014 में नौनक व नीलोफर की दस्तक

वर्ष 2014 में गुजरात के पास समुद्र में दो चक्रवात आये थे। मानसून से पहले चक्रवात नौनक ने डराया, परंतु वह अरब सागर में ही खत्म हो गया था। इसी प्रकार अक्टूबर में चक्रवात नीलोफर ने दस्तक दी, परंतु यह भी समुद्र के बीच में ही समाप्त हो गया।

2017 में ओखी तूफान

वर्ष 2017 के नवंबर महीने में ओखी चक्रवात आया था। इसने केरल और तमिलनाडु में व्यापक स्तर पर नुकसान पहुँचाया था। इसके कारण सैकड़ों लोग मारे गये थे। इसके बाद यह तूफान गुजरात की तरफ बढ़ा था। गुजरात में सभी प्रकार की आपातकालीन तैयारियाँ कर ली गई थी, परंतु तभी चक्रवात ओखी भी गुजरात तट को स्पर्श करने से पहले ही खत्म हो गया था।

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