गुजरात की तरफ बढ़ रहा है ‘महा’ संकट : प्रशासन हुआ सतर्क, किसानों की बढ़ी चिंता

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। अरब सागर में चक्रवाती तूफान ‘वायु’ के बाद अब ‘महा’ ने आकार लिया है, जो तेजी से गुजरात तट की तरफ आगे बढ़ रहा है। इस तूफान के प्रभाव से देश के 16 राज्यों में बारिश हो रही है, वहीं सर्वाधिक 5 राज्य प्रभावित होने की संभावना है। इनमें विशेष कर गुजरात और महाराष्ट्र में इसका विनाशकारी प्रभाव देखने को मिल सकता है। गुजरात तट से लगभग 550 कि.मी. की दूरी पर स्थित महा तूफान आगामी 6 नवंबर को दीव और द्वारिका के समुद्र तट को पार कर सकता है। इसे लेकर गुजरात प्रशासन सतर्क हो गया है और मछुआरों को समुद्र में जाने से रोक दिया गया है। तूफान के प्रभाव से गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में बारिश हो रही है, जिससे किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं।

6 नवंबर को गुजरात पहुँचेगा महा संकट

चक्रवाती तूफान महा 6 नवंबर की मध्य रात्रि को सौराष्ट्र के समुद्री तट से टकराने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार इस तूफान के कारण सौराष्ट्र के बोटाद, भावनगर, अमरेली, द्वारका, गीर सोमनाथ और जूनागढ़ जिलों में भारी बारिश की संभावना है। जबकि 7 नवंबर को उत्तरी गुजरात, मध्य गुजरात तथा दक्षिण गुजरात में बारिश हो सकती है। महा तूफान की दस्तक को लेकर राज्य प्रशासन सतर्क हो गया है। सूरत, वड़ोदरा, नवसारी, अहमदाबाद, राजकोट, जामनगर और वेरावल में एनडीआरएफ की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा तटीय इलाकों में तटरक्षक बल और नौसेना भी अलर्ट पर है। राजधानी गांधीनगर में आपदा प्रबंधन को लेकर उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है। अभी सौराष्ट्र के कई क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। बताया जा रहा है कि भारत से नमी को शोख कर महा तूफान मजबूत बन रहा है और इसी कारण पूरे राज्य में वातावरण में शुष्कता का अनुभव हो रहा है, लोग सर्दी के मौसम में भी गर्मी के मौसम जैसी गर्मी तथा उमस का अनुभव कर रहे हैं।

महा तूफान के कारण 16 राज्यों में बारिश

महा तूफान के कारण देश के 16 राज्यों में भारी बारिश हो रही है। इनमें भी विशेष कर 5 राज्यों में सर्वाधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के 27 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। महाराष्ट्र में सर्वाधिक वर्षा पालघर, नासिक, जलगाँव और अकोला में हुई है। पिछले 24 घण्टे के दौरान तूफान की गति प्रति घण्टा 19 से बढ़ कर 25 कि.मी. प्रति घण्टा हो गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि तूफान के कारण अरब सागर में 10 से 15 फुट ऊँची लहरें उठने की संभावना है। दक्षिणी राज्य फिलहाल इस तूफान के प्रभाव की जद से बाहर हो गये हैं, परंतु जैसे यह गुजरात तट की तरफ आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए गुजरात, महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल में वर्षा की संभावना बढ़ सकती है।

वलसाड़ के धरमपुर में 4 इंच बरसा पानी

गुजरात के तटीय इलाकों की बात करें तो सौराष्ट्र में जाफराबाद बंदरगाह, शियालबेट, पीपावाव के पास समुद्र में ऊँची लहरें उठ रही हैं। सोमवार को तूफान का प्रभाव और अधिक देखने को मिल सकता है। दक्षिण गुजरात में तूफान का प्रभाव दिखने लगा है। भरूच, अंकलेश्वर और नवसारी के वातावरण में बदलाव आया है। रविवार को सुबह इन क्षेत्रों में बारिश हुई। इससे सुबह छठ पूजा के अंतर्गत उगते सूर्य को अर्ध्य देने वाले लोग जो नदी तट और समुद्र तट पर एकत्र हुए थे, वे 100 से 120 कि.मी. प्रति घण्टे की रफ्तार से चली हवाओं और बारिश के कारण परेशानी में पड़ गये थे। वड़ोदरा और अहमदाबाद के वातावरण में भी बदलाव देखने को मिला और सुबह के समय बारिश हुई। जबकि वलसाड़ में तो शुक्रवार शाम से ही वातावरण में बदलाव देखने को मिल रहा था और शुक्रवार शाम से शनिवार सुबह तक 14 घण्टे में 4 इंच जितनी भारी वर्षा हुई।

किसानों की बढ़ी चिंता

शहरी इलाकों में भीषण ताप का सामना करने वाले लोग बारिश से ठंडक का अहसास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी फसलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। बिन मौसम की बारिश से खेतों में खड़ी कपास, मूंगफली और बाजरी की फसलों को व्यापक नुकसान होने की संभावना है। इसके अलावा मंडियों में बिकने के लिये आ रहे अनाज भी पर्याप्त शेड के अभाव में खुले में पड़ा है, जो बारिश में भींगने से नुकसान हो रहा है। इस प्रकार किसानों को दोहरी मार पड़ रही है।

कैसे होता है समुद्री तूफान का नामकरण ?

उल्लेखनीय है कि गत 12 जून को अरब सागर में समुद्री तूफान वायु ने आकार लिया था। इसके बाद हिक्का और क्यार ने दस्तक दी और अब महा नामक तूफान ने आकार लिया है। इसका नाम ओमान ने रखा है। इसके बाद जो तूफान आकार लेगा उसका नाम बुलबुल होगा, जिसे पाकिस्तान ने नाम दिया है। अभी तक 8 देश समुद्री तूफानों को कुल 64 नाम दे चुके हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में उठने वाले समुद्री तूफानों का नाम रखने की परंपरा 15 वर्ष पहले 2004 में शुरू हुई थी। ज्ञात हो कि किसी तूफान को जो नाम दे दिया जाता है, फिर एक दशक तक वह नाम रिपीट नहीं किया जाता है। इसके लिये एक सूची तैयार की जाती है। इस सूची में 8 देश शामिल हैं। आठ देशों में से क्रमानुसार देश तूफान को नाम देते हैं। फानी तूफान का नामकरण बांग्लादेश ने किया था, जबकि वायु का नामकरण भारत ने किया था। 2014 से लेकर अभी तक गुजरात के पास समुद्र में निलोफर, ओखी, चपाला, अशोबा, सागर, ननौक, वायु, हिक्का, क्यार आदि तूफान आकार ले चुके हैं। हालाँकि यह सभी तूफान समुद्र में उठे और थोड़ी हलचल मचाने के बाद समुद्र में ही शांत हो गये। अब महा तूफान को लेकर तटवर्ती देशों में हलचल देखने को मिल रही है। भारत के अलावा पाकिस्तान और ओमान भी इस तूफान को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।

You may have missed