जानिए चेन्नई में निराश्रित लोगों पर कैसे हो रही है ‘भगवान की कृपा’ ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। कहते हैं कि ‘जिसका कोई नहीं, होता, उसका ख़ुदा होता है।’ ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान प्रत्यक्ष रूप में आकर नहीं, अपितु अपने किसी नेक बंदे के माध्यम से असहाय की सहायता करते हैं। दक्षिण भारत के सबसे बड़े महानगर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भी आजकल ऐसे ही कुछ निराश्रित लोगों पर ‘भगवान की कृपा’ खूब बरस रही है। इस कृपा का नाम है ‘अरुल।’ अरुल का हिंदी भाषा में अर्थ होता है ‘भगवान की कृपा।’

कौन हैं अरुल और कैसे बने असहाय लोगों के ‘मसीहा’ ?

मसीहा का अर्थ होता है वह ईसा मसीह जो मरे हुए व्यक्ति को भी जीवित कर देते हैं और रोगियों को भी स्वस्थ कर देते हैं। चेन्नई में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहने वाले 34 वर्षीय डी. अरुल राज अपने शहर में सिग्नलों और फुटपाथों पर निराश्रित जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के लिये मसीहा हैं जो बेघरों को छत उपलब्ध कराते हैं और यदि उनमें से कोई बीमार है तो उसका प्राथमिक उपचार करके उसे स्वस्थ करने का काम भी करते हैं। डी. अरुल राज अपने काम से पूरे मानव समुदाय के लिये प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। डी. अरुल राज भी एक सामान्य गृहस्थ ही हैं, परंतु कहते हैं कि दुनिया बदलने के लिये पहले खुद को बदलना पड़ता है। डी. अरुल राज ने इस कथ्य को सार्थक कर दिखाया है। एक सामान्य गृहस्थ ने खुद को बदल कर अपना जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित कर दिया। इस बदलाव के बारे में डी. अरुल राज का कहना है कि एक सामान्य फोन कॉल ने उनके जीवन की पूरी दिशा ही बदल दी। घटना 2015 में चेन्नई में आई बाढ़ के समय की है, जब एक दिन अरुल की पत्नी के पास उनके एक मित्र ने कॉल करके बताया कि वो बाढ़ में फँस गये हैं और उनके पास खाने-पीने के लिये कुछ नहीं है। यह सुन कर अरुल उन्हें खाना पहुँचाने गये, तो उन्होंने देखा कि वहाँ केवल उनका मित्र ही नहीं, अपितु कई अन्य लोग भी फँसे हुए हैं, उन्हें भी मदद की आवश्यकता है। इसलिये अरुल ने एक हाथ-गाड़ी की मदद से उन सभी लोगों को वहाँ से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने डी. अरुल राज पर कुछ ऐसा प्रभाव डाला कि जब भी किसी को किसी प्रकार की मदद की आवश्यकता होती तो डी. अरुल राज लोगों की मदद करने के लिये वहाँ पहुँच जाते।

लोगों की सेवा करने के लिये नौकरी खोई

ऐसा करने से वे अपनी बैंक की नौकरी में अनियमित हो गये, जिसके चलते पहले तो उन्हें कुछ चेतावनियाँ मिलीं और जब इसके बावजूद वे लोगों की मदद करने के चलते बैंक में अनियमित पहुँचते रहे तो उन्हें अपनी नौकरी खोनी पड़ी। इससे भी डी. अरुल राज को कोई फर्क नहीं पड़ा और उन्होंने लोगों की मदद करने का जो बीड़ा उठाया था, उस संकल्प पर दृढ़ता से आगे बढ़ते रहे। अरुल व उनके साथियों ने बारिश के दौरान लगातार छह महीनों तक बाढ़ राहत और सफाई का काम किया। इसके बाद 2016 के अंत में वे फुटपाथ पर बैठी एक ऐसी वृद्ध महिला से मिले तो असहाय थी। अरुल उसकी मदद करना चाहते थे, इसलिये उन्होंने उसे एक शेल्टर होम में ले जाने की बात की। हालाँकि तब तक खुद अरुल शेल्टर होम के बारे में बिल्कुल बेख़बर थे। अरुल के अनुसार बाढ़ राहत के दौरान भी एक महिला ने उनसे कहा था कि वे उसे शेल्टर होम में पहुँचा दें, परंतु उन्हें शेल्टर होम के बारे में पता नहीं होने से वे उस समय उसकी मदद नहीं कर पाये। बाद में उन्होंने शेल्टर होम के बारे में पता किया और इसी के साथ शुरू हो गया निराश्रितों को आश्रय दिलाने का सेवायज्ञ। इस सेवा यज्ञ ने अरुल के जीवन को बदल कर रख दिया।

हर व्यक्ति को अरुल से प्रेरणा लेने की जरूरत

जनवरी-2017 में अरुल के पास एक घायल और बेघर व्यक्ति की मदद करने के लिये फोन आया, तब अरुल ने कुछ सामाजिक संगठनों से बात की और उस व्यक्ति को एक प्राइवेट शेल्टर होम में आश्रय दिलाया। ऐसी कुछ घटनाओं से अरुल को पता चल गया कि अब उन्हें जीवन में आगे क्या करना है और उनकी निराश्रितों को आश्रय दिलाने की मुहिम ने ज़ोर पकड़ लिया। डी. अरुल राज 320 से अधिक निराश्रित लोगों को आश्रय दिला चुके हैं और इनमें से कई लोगों को उनके परिवारों से भी मिलवा चुके हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत फेसबुक पेज को भी अपनी मुहिम का हिस्सा बना लिया और उसके माध्यम से सामाजिक कार्य को बढ़ावा देने के लिये उसका नाम बदल कर ‘करुणाई उल्लंगल ट्रस्ट’ रख दिया है। उनके इस पेज पर लोग निराश्रितों की तस्वीर और जानकारी पोस्ट करते हैं तो अरुल उनकी मदद के लिये पहुँच जाते हैं। डी. अरुल ने 2019 में गूगल प्ले स्टोर में इसी ट्रस्ट के नाम से एक एप्लीकेशन भी लॉन्च की है, जिसके माध्यम से भी लोग उन्हें चेन्नई में निराश्रित लोगों की तस्वीरें भेजते हैं। अरुल जिन निराश्रित लोगों की मदद करते हैं, उनका डेटाबेस भी इस ऐप में मेंटेन करते हैं, जिससे उनके परिवार को खोज कर उनसे संपर्क किया जा सके। अरुल ने लोगों की मदद करने के लिये लॉन पर एक ऑटो रिक्शा भी खरीदा है, जिसकी मदद से वे लोगों की सहायता करने का काम करते हैं। इसके अलावा उन्होंने प्राथमिक उपचार करने की पद्धति का ज्ञान भी प्राप्त किया है ताकि असहाय लोगों के छोटे-बड़े घावों की मरहम-पट्टी वे खुद कर सकें। कभी-कभी वे अस्पतालों में जाकर कैंसर पीड़ितों की भी मदद करते हैं। अरुल अपना गृहस्थ जीवन व्यतीत करते हुए भी इस सेवा के लिये समय निकाल लेते हैं। यदि अन्य लोग भी अरुल से प्रेरणा लेकर एक-दूसरे की मदद के लिये ऐसे ही हाथ बढ़ाने लगें तो मानवता सचमुच महक उठेगी।

You may have missed