भयावह विस्फोट में भाई की मौत ने अल्फ्रेड को ‘नोबेल’ के रूप में अमर कर दिया…

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 10 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। अपने-अपने क्षेत्र में कुछ अलग कर दिखाने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को दिसंबर की हर 10 तारीख़ को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में यह विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार है। इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति-पत्र और 14 लाख डालर (9,92,12,820.00 Indian Rupee) की राशि प्रदान की जाती है। 1901 में प्रथम नोबेल शांति पुरस्कार रेड क्रॉस के संस्थापक हेनरी ड्युनेंट और फ़्रेंच पीस सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप प्रदान किया गया था। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1968 से की गई, परंतु क्या आप जानते हैं कि नोबेल पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर दिया जाता है। 10 दिसम्बर, 1896 को 63 वर्षीय अल्फ्रेड नोबेल का इटली के सैनरेमो में निधन हुआ था। आज उनकी 123वीं पुण्यतिथि (Death anniversary) है। आइए जानते है कौन थे अल्फ्रेड नोबेल ?

ऐल्फ्रेड बर्नार्ड नोबेल (Alfred Bernhard Nobel, 1833-1896) स्वीडन निवासी और रसायनशात्री तथा इंजीनियर थे। उनका जन्म 21 अक्टूबर, 1833 को स्वीडन के बाल्टिक सागर के किनारे बसे स्टॉकहोम नामक नगर में हुआ था। उनके पिता अपने परिवार सहित सेंट पीटर्सबर्ग में रहते थे और रूस की सरकार के लिए खेती के औज़ारों के अतिरिक्त आग्नेयास्त्र (Agneyastra), सुरंग (Mines) और टॉरपिडो (Toropedo) का निर्माण करते थे। 1850 में अल्फेड नोबेल अमेरिका पढ़ने गए, परंतु 1 वर्ष पश्चात ही बिना पढ़ाई पूरी किए वह स्वीडन लौट आए। स्वीडन आने के बाद वह अपने पिता के कारखाने में विस्फोटकों विशेषकर नाइट्रोग्लिसरिन (Nitroglycerin) के अध्ययन में लग गए। 3 सितंबर, 1864 को अल्फ्रेड के पिता के कारखाने में एक भयानक विस्फोट हुआ और संपूर्ण कारखाना नष्ट हो गया। इस दुर्घटना में अल्फ्रेड के छोटे भाई की मृत्यु हो गई। उसके बाद अल्फ्रेड नाइट्रोग्लिसरिन जैसे अप्रत्याशित रूप से विस्फोट करने वाले द्रव्य को शांत करने और उस पर नियंत्रण पाने की खोज में लग गए।

1867 में अल्फ्रेड ने धूमरहित (Smokeless) बारूद की भी खोज की, जो कॉर्डाइट (cordite) का आविष्कार कहलाया। इन दोनों उत्पादों का प्रयोग उद्योग और युद्ध में होने लगा। इससे उन्होंने काफी धन अर्जित कर लिया और उनके शोध कार्यों में तेजी आई। अल्फ्रेड नोबेल ने शोध किया और पाया कि जब नाइट्रोग्लिसरीन को कोसलेगुर (Diatomaceous Earth) जैसे शोषक अक्रिय पदार्थ में शामिल किया गया, तो यह सुरक्षित तथा अधिक सुविधाजनक हो जाता है। इस मिश्रण को उन्होंने 1867 में डायनामाइट (Dynamite) के रूप में पेटेंट कराया। डायनामाइट के निर्माण में नाइट्रोग्लिसरीन प्रयुक्त होता है। नाइट्रोग्लिसरीन आवश्यकता से अधिक सुग्राही होता है। अल्फ्रेड ने डाइनामाइट से दुनिया में शांति लाने की बात कही थी।

अल्फ्रेड नोबेल ने जीवन पर्यंत विवाह नहीं किया तथा एकाकी जीवन बिताया। मानव हित की आकांक्षा से प्रेरित होकर उन्होंने अपने धन का उपयोग एक न्यास (Trust) स्थापित करने में किया, जिससे प्रति वर्ष भौतिकी, रसायन, शरीर-क्रिया-विज्ञान व चिकित्सा, आदर्शवादी साहित्य तथा विश्व शांति के क्षेत्रों में सर्वोत्तम कार्य करने वालों को पुरस्कार दिया जाता है। ये पुरस्कार नोबेल पुरस्कार कहलाए। नोबेल पुरस्कारों की स्थापना अल्फ्रेड नोबेल के वसीयतनामे के अनुसार 1895 में हुई थी। अल्फ्रेड ने अपनी वसीयत में अपने रिश्तेदारों को पैसा दिए जाने के बाद बचे हुए पैसों से एक निधि की स्थापना की बात कही थी। उन्होंने वसीयत में लिखा कि इन पैसों से मिलने वाले ब्याज से उन लोगों को पुरस्कार दिए जाएँ, जिन्होंने मानव जाति के लिए अपनी सेवाएँ दी हों। 29 जून, 1900 को नोबेल फाउंडेशन का प्रारम्भ किया गया, जिसका उद्देश्य नोबेल पुरस्कारों का आर्थिक रूप से संचालन करना था। इसके 1 वर्ष पश्चात यानी 10 दिसंबर, 1901 से नोबेल पुरस्कार देने का आरंभ किया गया, जो आज तक जारी है। 2019 के नोबेल पुरस्कार विजेता को लगभग 6.45 करोड़ रुपये की धनराशि दी जाएगी। इसके साथ ही स्वर्ण से बना 200 ग्राम का पदक और प्रशस्ति पत्र भी दिया जाएगा। पदक के एक ओर नोबेल पुरस्कार के जनक अल्फ्रेड नोबेल की छवि, उनके जन्म तथा मृत्यु की तारीख लिखी होती है। पदक की दूसरी तरफ यूनानी देवी आइसिस का चित्र, रॉयल एकेदमी ऑफ साइंस स्टॉकहोम तथा पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति की जानकारी होती है।

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