दिल्ली और देश ने एक महीने में खो दीं दो महान बेटियाँ, श्राप बन गया ‘खान इरफान’ ?

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 7 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। दिल्ली और देश ने एक महीने के भीतर अपनी दो महान बेटियों को खो दिया। अभी 18 दिन पहले ही जब शीला दीक्षित ने अचानक अलविदा कहा था और अब सुषमा स्वराज ने भी शीला के ही अंदाज़ में दुनिया को अलविदा कह कर समग्र देश को शोकमग्न कर दिया।

सुषमा और शीला का वैसे राजनीतिक रूप से आपस में कोई संबंध नहीं था, परंतु उनके राजनीतिक जीवन का एक कालखंड ऐसा भी था, जब दोनों के राजनीतिक युद्ध का मैदान दिल्ली था। दोनों ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी थीं। शीला दीक्षित कांग्रेस की नेता थीं, जबकि सुषमा स्वराज भाजपा की। दोनों का ही अपनी पार्टी में दिग्गज स्थान था। दोनों ही महिला नेताओं ने ऐसे समय में देश को अलविदा कहा, जब उनकी पार्टी को नहीं, अपितु पूरे देश को उनके मार्गदर्शन की महती आवश्यकता थी।

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित का निधन 20 जुलाई, 2019 को उस समय हुआ, जब कांग्रेस पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर शीला से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी थी। पार्टी को लगता था कि शीला के नेतृत्व में दिल्ली में फिर एक बार कांग्रेस सत्ता हासिल करेगी, परंतु शीला का अचानक निधन हो गया। ठीक इसी प्रकार सुषमा स्वराज भले ही चुनावी राजनीति से दूर हो गई थीं, परंतु वे भाजपा संगठन के लिए अब भी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभाने में सक्षम थीं। जब मोदी सरकार कश्मीर को धारा 370 को धराशायी कर रही थी, तब सुषमा के ट्वीट्स से अनुमान लगाया जा सकता है कि वे कितनी खुश थीं। उनका अंतिम ट्वीट भी कश्मीर पर ही था, जिसमें उन्होंने मोदी को संबोधित करते हुए लिखा था, ‘प्रधानमंत्री जी, मैं इस दिन (कश्मीर से धारा 370 हटने) का इंतज़ार कर रही थी।’

दिल्ली के अखाड़े में सुषमा V/S शीला

सुषमा और शीला दोनों ही राजनीतिक कैरियर दिल्ली से आरंभ नहीं किया था। सुषमा ने जहाँ हरियाणा विधानसभा चुनाव 1977 में अंबाला छावनी सीट से विधायक बन कर चुनावी राजनीति आरंभ की, वहीं शीला ने लोकसभा चुनाव 1984 में उत्तर प्रदेश की कनौज सीट से सांसद बन कर चुनावी राजनीति का सूत्रपात किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शीला को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में स्थान दिया। दिल्ली की राजनीति में सुषमा और शीला की एंट्री अलग-अलग समय और कारणों से हुई। सुषमा ने लोकसभा चुनाव 1996 में दक्षिण दिल्ली से चुनाव लड़ कर विजयी आरंभ किया, वहीं शीला ने लोकसभा चुनाव 1998 में पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ कर पराजयी आरंभ किया। हालाँकि बाद में ये दोनों महिलाएँ दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। सुषमा को जहाँ दिल्ली पहली मुख्यमंत्री बनने का श्रेय हासिल हुआ, वहीं शीला ने दिल्ली में सबसे लम्बे समय तक मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया।

‘खान इरफान’ का कटाक्ष श्राप बन गया

जब शीला दीक्षित का निधन हुआ, उस समय ट्विटर पर कुछ निहित स्वार्थी तत्वों ने सुषमा स्वराज के स्वास्थ्य को लेकर खूब अफवाहें उड़ाईं। सुषमा ने हर अफवाह का खंडन करते हुए कहा, ‘मैं बिल्कुल ठीक हूँ।’ सुषमा ने शीला दीक्षित के निधन पर भी गहरा दुःख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया था, ‘मैं शीला दीक्षित के अचानक निधन से दु:खी हूँ। हम दोनों राजनीति में एक-दूसरे के विरोधी थे, परंतु निजी जीवन में मित्र थे। वे अच्छी इंसान थीं।’

जब सुषमा स्वराज शीला दीक्षित के निधन पर शोक संवेदना प्रकट कर रही थीं, तभी ट्विटर हैण्डल https://twitter.com/KhanAIrfan_/status/1152890133483536384 से एक ट्वीट किया गया। इस ट्वीट में कहा गया, ‘आपकी भी बहुत याद आएगी एक दिन शीला दीक्षित की तरह अम्मा।’ खान इरफान नामक किसी यूज़र ने जो यह ट्वीट किया था, वह बाद में उसने डिलीट कर दिया, परंतु ट्वीट डिलीट होने से पहले सुषमा स्वराज ने इस खान इरफान नामक यूज़र को संयम के साथ जवाबी ट्वीट करते हुए लिखा था, ‘इस भावना के लिए आपको मेरा अग्रिम धन्यवाद।’

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