अपनी गद्दी का गदर आते ही केजरीवाल ‘चुनावी मेंढक’ के रंग में, लाने लगे FREE OFFERS !

भाजपा का कटाक्ष :  ‘घोषणामंत्री’ की अगली घोषणा, ‘अब घर पर लेने आएगी बस…’

2015 में 70 में से 67 सीटें जीतने वाले केजरीवाल की 2019 में जनता ने की दुर्गति

अब 10 महीनों बाद होने वाले ‘आप’ के फ़ैसले से पहले फिर मुफ्त की रेवड़ियाँ बाँटने निकले केजरीवाल

दिल्ली की जनता 2014 VS 2015 की तर्ज पर AAP को सत्ता देगी या 2019 दोहराएगी ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 जून, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 सम्पन्न हो चुके हैं। इन चुनावों की घोषणा से पहले पिछले तीन-साढ़े तीन वर्षों तक केन्द्र की मोदी सरकार के साथ शासकीय-प्रशासकीय मुद्दों पर संघर्ष करने वाले और राजनीतिक रूप से केन्द्र के सिंहासन से नरेन्द्र मोदी को हटाने के लिए हर मोदी विरोधी मंच पर नजर आने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आआपा-एएपी-AAP) का चुनावों में बुरा हाल हुआ। मोदी विरोधी मोर्चे के जिन दो मुख्यमंत्रियों की सबसे बड़ी दुर्गति हुई, उनमें एक थे तेलुगू देशम् पार्टी (तेदेपा-टीडीपी-TDP) अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू, जो अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं रहे और दूसरे थे AAP संयोजक केजरीवाल, जिनकी पार्टी को दिल्ली की 7 में से 1 भी सीट नहीं मिली। इतने बड़े चुनावी समर में AAP को केवल 1 सीट मिली, वह भी पंजाब में। दिल्ली के अपने घर से काफी दूर।

मोदी विरोधी एजेंडा लेकर चलने वाले केजरीवाल ने जब लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस से समझौता नहीं हो सका, तब यह प्रचारित किया कि यह चुनाव आम आदमी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस बनाम भाजपा और राहुल बनाम मोदी का था, परंतु दिल्ली की चुनावी ज़मीन जिस कदर AAP के हाथों से सरकी, उसे देखते हुए अब केजरीवाल को फरवरी-2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता सताने लगी है। इसीलिए अब केजरीवाल ने 2015 की तर्ज पर फ्री ऑफर्स का सिलसिला शुरू कर दिया है।

अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव 2015 में 70 में से 67 सीटें जीतने का करिश्मा दोहराने के लिए विधानसभा चुनाव 2020 की वोटों की राजनीति अभी से शुरू कर दी है। इसी श्रृंखला में उन्होंने आज दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों, कलस्टर बसों तथा सभी प्रकार की बसों और मेट्रो ट्रेन में महिलाओं के लिये मुफ्त यात्रा की घोषणा की है।

अरविंद केजरीवाल ने आज घोषणा की कि दिल्ली सरकार महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दिल्ली में डेढ़ लाख सीसीटीवी कैमरे लगवाएगी और बसों व मेट्रो ट्रेन में महिलाओं को मुफ्त में यात्रा करने की सुविधा देगी। इसके लिये उन्होंने अधिकारियों को 1 सप्ताह का समय दिया है कि वह इस प्लान को कब और कैसे लागू किया जाए, इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंपें। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास होगा कि अगले 2 से 3 महीने में इस योजना को लागू कर दिया जाए।

इस घोषणा के बाद ही केजरीवाल राजनीतिक दलों के निशाने पर आ गये। उनकी इस घोषणा को दिल्ली विधानसभा के आगामी चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घोषणा मंत्री की संज्ञा देते हुए कहा कि केजरीवाल को दिल्ली में अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती नज़र आ रही है, इसलिये वह सत्ता में वापसी करने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। यह घोषणा भी उसी का हिस्सा है। तिवारी ने कहा कि केजरीवाल को दिल्ली में शासन करते हुए 52 महीने का लंबा समय गुज़र गया, अब जब मात्र 7-8 महीने का समय बचा तो वह नींद से जागते ही घोषणाएँ करने लगे। लोकसभा चुनाव के परिणामों ने उनकी नींद उड़ा दी है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल विधानसभा की 70 में से 67 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में आये थे, परंतु हाल ही में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में उनकी सत्तारूढ़ पार्टी का प्रदर्शन बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा और वह एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई। इतना ही नहीं वह तीसरे नंबर पर खिसक गई है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जहाँ आम आदमी पार्टी को मिले वोटों का प्रतिशत 33.1 था, वहीँ 2019 में यह औसत घटकर 18.1 प्रतिशत रह गया है। इस बार कांग्रेस ने दूसरा नंबर हासिल किया, यह भी केजरीवाल के लिये चिंता का विषय बन गया है। 2020 के शुरुआती महीनों में ही दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में केजरीवाल के पास अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिये अंतिम 7-8 महीनों का ही समय बचा है, जिसमें वह हर पेंतरा आजमाने का प्रयास करेंगे। दिल्ली के अलावा आम आदमी पार्टी का कोई और बेज़ नहीं है। ऐसे में केजरीवाल के पास अपना घर बचाने की कड़ी चुनौती होगी।

भाजपा ने यहाँ 2014 में भी सभी 7 सीटों पर कब्जा जमाया था और 2019 में भी वही सभी 7 सीटों पर विजयी हुई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों का खाता तक नहीं खुल पाया है। वहीं 2015 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और दूसरे नंबर पर भाजपा रही थी, 2015 में भी कांग्रेस यहाँ खाता तक नहीं खोल पाई थी। अब सवाल यह उठता है कि क्या केजरीवाल यहाँ 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में जो करिश्मा करने में कामयाब हुए थे, वह करिश्मा 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में दोहरा पाएँगे या उनका राजनीतिक सूरज डूब जाएगा।

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