EXCLUSIVE : धिक्कार है राहुल-ममता पर ! आपकी दोस्ती ढोंग न होती, तो बच जाती एक निर्दोष VOTER की जान

पिछले कई महीनों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध मोर्चा खोलने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ सर्वाधिक उत्साह से खड़ी रहने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी, उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उनकी सरकार के ख़ौफनाक चेहरे का फिर एक बार पर्दाफाश हो गया, तो ममता का हाथ थाम कर मोदी विरोध के लिए गर्व से अपना हाथ ऊँचा करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की भी बदनीयती से पर्दा उठ गया।

वास्तव में पश्चिम बंगाल से एक ऐसी ख़बर आई कि जिसे पढ़ कर मोदी विरोध के नाम पर महागठबंधन का दिखावा करने वाले राहुल और ममता दोनों के प्रति तिरस्कार की भावना पैदा हुए बिना नहीं रह सकती। दिल्ली और बेंगलुरू में मोदी विरोधी नेताओं के मंचों पर राहुल का हाथ थामने वालीं और यहाँ तक कि कोलकाता में सभी मोदी विरोधी नेताओं का जमघट लगा कर शक्ति प्रदर्शन करने वालीं ममता बैनर्जी इस हद तक राजनीतिक अवसरवादिता और स्वार्थ की शिकार हैं कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनावी मैदान में कांग्रेस और राहुल का हाथ नहीं थामा। इसके साथ ही मोदी विरोध के नाम पर दिखाई जा रही दोस्ती ढोंग साबित हुई और परिणाम यह है कि मोदी विरोध के नाम पर एकता का दिखावा करने वाले राहुल-ममता की पार्टियाँ कांग्रेस और टीएमसी एक-दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ रही हैं। दिल्ली में दोस्ती का नाटक करने वाले राहुल-ममता की पार्टियों के कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में एक-दूसरे के ख़ूने के प्यासे बने हुए हैं।

गंदी राजनीति ने ली मतदाता की जान

दरअसल लोकसभा चुनाव 2019 में मंगलवार को तीसरे चरण में पश्चिम बंगाल की भी 5 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है। ममता के राज में पंचायत से लेकर विधानसभा चुनाव तक टीएमसी कार्यकर्ताओं की दबंगई किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में टीएमसी के गुंडे कहाँ शांत बैठने वाले थे। ऐसी ही एक घटना में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के बलिग्राम मतदान केन्द्र पर उस कांग्रेस और टीएमसी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके मुखिया राहुल-ममता दिल्ली से लेकर कोलकाता तक दोस्ती का ढोंग करते रहे। कांग्रेस-टीएमसी कार्यकर्ताओं की यह झड़प राहुल-ममता के लिए इसलिए शर्मशार करने वाली है, क्योंकि इस राजनीतिक रंजिश में एक आम नागरिक को अपनी जान गँवानी पड़ी, जो बेचारा मतदान करने के लिए कतार में खड़ा था।

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