विचित्र विडंबना : हिन्दुस्तान का ‘हिमा’लय उगल रहा है सोना और ‘दीवाने’ रो रहे ‘छोटी-सी हार’ का रोना !

कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 22 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। 9 जुलाई, 2019 को बीते आज पूरे 13 दिन हो गए, परंतु भारत के छोटे से लेकर बड़े अख़बारों, छुटभैया न्यूज़ चैनलों से लेकर बड़े-बड़े मीडिया हाउस के न्यूज़ चैनलों और छोटी-बड़ी सभी तरह की समाचार वेबसाइटों पर आज भी उस एक हादसे का रोना रोया जा रहा है। TRP के भूखे तरह-तरह के समाचार माध्यमों (NEWS MEDIA) में अभी-अभी विराट कोहली, महेन्द्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा जैसे धनाढ्य लोगों के नाम चर्चा में हैं और जो असली ख़बर की हक़दार है, उसको कोई तवज़्जो नहीं दी जा रही है।

आख़िर इसमें दोष अकेले मीडिया का नहीं, अपितु हमारे देश की 130 में से 110 करोड़ लोगों का है। जिस देश में 90 प्रतिशत लोग केवल और केवल क्रिकेट देखते, सुनते, पढ़ते हों, वहाँ का मीडिया एक 19 वर्षीय हिमालय जैसा हौसले रखने वाली लड़की की हौसलाअफज़ाई क्यों करेगा ? भले ही वह लड़की हिन्दुस्तान के लिए हिमालय जैसी उपलब्धियाँ हासिल कर रही हो या फिर सोना उगल रही हो, क्रिकेट के दीवानों के देश में ऐसी लड़की के स्वर्ण पदकों पर कौन ध्यान देगा ?

समाचार के आरंभ में हमने 9 जुलाई, 2019 का उल्लेख इसलिए किया, क्योंकि यह वह दिन था, जब भारत आईसीसी विश्व कप क्रिकेट प्रतियोगिता 2019 की ख़िताबी दौड़ से बाहर हो गया था। इसी दिन सेमी फाइनल में न्यूज़ीलैण्ड ने भारत को हराया था और तथाकथित धुरंधर खिलाड़ियों से बनी TEAM INDIA का वर्ल्ड कप जीतने का सपना चकनाचूर हो गया था। इस बात को 13 दिन हो गए, परंतु आज भी भारत के करोड़ों क्रिकेट फैन्स इस छोटी-सी हार का रोना रो रहे हैं। कहीं धोनी के संन्यास की चर्चा है, तो कहीं विराट की कप्तानी छिन जाने, भारतीय टीम के चयन और वेस्ट इंडीज़ के दौरे के समाचार सुर्खियाँ बँटोर रहे हैं।

चहुँओर वर्ल्ड कप में हार का रोना रोया जा रहा है, छाती पीटी जा रही है। ऐसे गुमराह दीवानों के लिए हिन्दुस्तान की हिमा मरहम बन कर उभरी हैं। भारत में खेलों की संख्या अगणित है, परंतु हम भारतीयों ने क्रिकेट को ही एकमात्र खेल बना कर खेलों के साथ बड़ा खेल कर दिया है। यही कारण है कि असम की मात्र 19 वर्षीय धाविका हिमा दास की हिमालय जैसी सफलता पर कोई ग़ौर नहीं कर रहा है।

देश में वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की हार के बाद मचे हाहाकार के बीच हिमा दास ने शनिवार को एक और गोल्ड जीता और 19 दिन में पाँचवाँ गोल्ड जीत कर करोड़ों हिन्दुस्तानियों का ही नहीं, अपितु राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी दिल जीत लिया है। असम के नगाँव के धिंग में जन्मीं होने के कारण धिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर हिमा दास ने चेक गणराज्य में आयोजित नोवे मेस्टो नाड मेटुजी ग्रां पी में 400 मीटर की रेस 52.09 सेकंड में पूरी कर स्वर्ण पदक हासिल किया। हिमा ने 52.09 सेकंड में 400 मीटर की रेस पूरी कर पिछले वर्ष एशियाई खेलों में बनाए अपने ही 50.79 सेकंड के रेकॉर्ड को तोड़ दिया। पाँचवाँ स्वर्ण पदक जीतने के बाद हिमा ने ट्वीट कर कहा, ‘चेक गणराज्य में 400 मीटर दौड़ में शीर्ष पर रह कर अपनी दौड़ पूरी की।’

उल्लेखनीय है कि हिमा दास के लिए जुलाई महीना मानों सोने की बरसात बन कर आया है। उन्होंने 19 दिन में यह पाँचवाँ स्वर्ण पदक जीता है। हिमा ने पहला गोल्ड मेडल 2 जुलाई को पोजनान एथलेटिक्स ग्रां पिक्स में 200 मीटर रेस 23.65 सेकंड में पूरा कर जीता था। 7 जुलाई को पोलैण्ड में कुटनो एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस में दूसरा गोल्ड जीतने वाली हिमा ने 13 जुलाई को चेक गणराज्य में क्लांदो मेमोरियल एथलेटिक्स में महिलाओं की 200 मीटर रेस में तीसरा गोल्ड जीता था। हिमा दास ने 17 जुलाई को चेक गणराज्य में ही ताबोर एथलेटिक्स मीट में 200 मीटर रेस में चौथा गोल्ड जीता था। हिमा दास की इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट कर उन्हें बधाई दी है। क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने भी खेलों के प्रति अपने समर्पण भाव को प्रदर्शित करते हुए हिमा को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

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