121 साल का हुआ RADIUM, जो कैंसर उपचार के लिए है वरदान

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 21 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। आज से ठीक 121 वर्ष पूर्व यानी 21 दिसंबर, 1898 में पोलैंड (POLLAND) की रसायनशास्त्री मैरी स्कोलोडोव्सका क्यूरी (Maria Salomea Skodowska) और फ्रांस के रसायन शास्त्री पियरे क्यूरी (Pierre Curie) ने रेडियम (Radium) नाम के रेडियोधर्मी (Radioactive) तत्व की खोज की। उस समय वह इस बात से अनभिज्ञ थे कि उनकी ये खोज चिकित्सा विज्ञान को एक नया आयाम देगी। उसे एक ऐसी ऊँचाईयों पर ले जाएगी, जो भविष्य में सभी के लाभदायक सिद्ध होगा। रासायन जगत में सक्रिय इस दंपत्ति ने रेडियम प्राप्त करने के लिए कई प्रयोग किए और कई टन पिचब्लेंड (अयस्क) को रिफाइन करने के पश्चात् उन्हें रेडियम की कुछ ही मात्रा प्राप्त हुई। 1902 में इसका विशुद्ध यौगिक बना और 1910 में रेडियम धातु का निर्माण हुआ।

यूरेनियम के एक टन अयस्क में मात्र 0.14 ग्राम रेडियम होता है। अतः यूरेनियम अयस्कों के साथ रेडियम सदा मिश्रित रहता है। यूरेनियम रेडियोऐक्टिव तत्व है। इसी क्रिया द्वारा रेडियम की उत्पत्ति होती है, परंतु रेडियम चूँकि स्वयं रेडियोऐक्टिव है, अत: उसका क्षय भी होता रहता है। इस कारण यूरेनियम अयस्क में रेडियम की मात्रा वस्तुत: स्थिर रहती है। इसके अतिरिक्त थोरियम अयस्क भी इसका स्रोत है। समुद्र तथा उसकी निचली सतह और कुछ नदियों के जल में भी इसकी सूक्ष्म मात्रा मिलती है। रेडियम देखने में तो साधारण नमक की भाँति लगता है, परंतु उसकी चमक अंधेरे को भी चीर सकती है। सफेद रंग का ये धातु एक रेडियोधर्मी धातु है। रेडियोधर्मी का अर्थ है, जो स्वयं प्रकाश उत्पन्न करते हैं। रेडियम भी अंधेरे में स्वयं में चमकने वाला धातु है। इसका नाभिकीय केंद्र अस्थिर होता है और स्वयं बहुत तेजी से टूटता रहता है। टूटने के कारण यह कई किरणें छोड़ता है और इससे एक प्रकार का प्रकाश, एक प्रकार की चमक उत्पन्न होती है, जो रेडियम को अंधेरे में भी प्रकाशमान बनाती है।

मैरी स्कोलोडोव्सका क्यूरी और पियरे क्यूरी के रेडियम की खोज करने के बाद रेडियम का प्रयोग पेंट (PAINT), विमान के स्विच, घड़ी के डायल, न्यूक्लियर पैनल, दंतमंजन, बालों की क्रीम आदि में होता था, परंतु जब स्वास्थ्य उपचार में इसके प्रतिकूल परिणाम सामने आए, तो इसका प्रयोग अन्य चीज़ों जैसे पेंट, कपड़े आदि में बंद कर दिया गया। 19वीं शताब्दी में रेडियम को चिकित्सा क्षेत्र में प्रयोग किया जाने लगा। रेडियम में बीमारी को ठीक करने का गुण पाया गया। उसकी गामा किरणों (Gamma Rays) का प्रयोग कैंसर (Cancer) के उपचार में किया गया, जिसका परिणाम बहुत सकारात्मक रहा। रेडियम और ब्रोमीन (Bromine) के प्रयोग से एक नया रसायन रेडियम ब्रोमाइड (Radium bromide) बनाया गया, जिसका प्रयोग शुरुआती स्टेज के कैंसर के उपचार में किया गया। रेडियम को ट्यूब में रख कर अथवा उससे निकलने वाली रेडॉन गैस की ट्यूब का प्रयोग कर कैंसर और ट्यूमर का उपचार किया जाने लगा। रेडियम के विघटन से पैदा होने वाली गैस रेडॉन का प्रयोग कैंसर के उपचार में किया गया, जिसे रेडिएशन थेरेपी रेडॉन कहा जाता है। यह प्रायः कैंसर के उपचार में ख़राब (Malignant) कोशिकाओं को मारने के काम आती है।

2006 में जर्मनी में रेडियम-224 के साथ क्लोराइड के इंजेक्शन को एक तरह के गठिया रोग के उपचार के लिए मान्यता दी गई थी, परंतु अब इसका प्रयोग नहीं होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में रेडियम-224 के साथ प्रयोग करके बिसमथ-212 और लेड-212 तैयार किया गया। इन 2 प्रॉडेक्ट का प्रयोग त्वचा कैंसर और अंडाशय के कैंसर को दूर करने वाले एंटीबॉडी के रूप में किया जाता है।

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