क्या आप जानते हैं कि तेलंगाना का त्रिशूलधारी शिव से क्या है संबंध ?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने राज्य में गोदावरी नदी के तट पर स्थित अत्यंत पौराणिक कालेश्वर-मुक्तेश्वर स्वामी मंदिर को पर्यटन तथा आध्यात्मिक केन्द्र के रूप में विकसित करने के लिये 100 करोड़ रुपये आबंटित किये हैं। राज्य के करीमनगर जिले के कालेश्वरम कस्बे में स्थित इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ एक ही आसन या ‘पानावत्तम’ पर भगवान शिव के दो लिंग बिराजमान हैं, जो जुड़वाँ शिवलिंग के रूप में पहचाने जाते हैं। इनमें से एक कालेश्वर और दूसरे मुक्तेश्वर स्वामी कहलाते हैं।

मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव रविवार को अपने परिवार के सदस्यों के साथ इस मंदिर में तथा देवी पार्वती के मंदिर में दर्शनार्थ पधारे थे। इसके बाद उन्होंने इस मंदिर क्षेत्र को आध्यात्मिक केन्द्र तथा धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिये 100 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की। सीएम की ओर से घोषणा के बाद उनके सीएम कार्यालय की ओर से एक विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें जिलाधिकारी को इस मंदिर के विकास के लिये मंदिर के आसपास की 600 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया गया है। तेलंगाना सरकार के पर्यटन विभाग के अनुसार यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस विभाग की देखरेख में ही मंदिर क्षेत्र को आध्यात्मिक केन्द्र तथा धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना है।

उल्लेखनीय है कि तेलंगाना भगवान शिव का धाम ही नहीं, अपितु तेलंगाना का नाम भी भगवान शिव के नाम पर ही रखा गया है। तेलुगू व्याकरण पुस्तक आंध्र कौमुदी के अनुसार आंध्र विहाऊ में एक विशाल दीवार का निर्माण किया गया है, जो श्रीसैलम, भीमेश्वर और कालेश्वरम को महेन्द्र पहाड़ियों से जोड़ती है। यहाँ पर भगवान शिव त्रिशूल लेकर बिराजमान हैं। आंध्र विहाऊ में दिव्य स्वर्गदूत भगवान शिव विशालकाय असुर निशम्भु से लगभग 13 युगों तक लड़े थे और उसका अंत करने के बाद उन्होंने गोदावरी नदी के तट को ही अपना निवास स्थान बना लिया था। तब से ही तेलुगू देश को त्रिलिंगम का नाम दिया गया है। भगवान शिव तीन पर्वतों पर लिंग के रूप में अवतरित हुए थे, इनमें कलेश्वरम्, रायलसीमा के श्रीसैलम त भीमेश्वर पर्वत शामिल हैं। इसलिये इस प्रदेश को त्रिलिंग के नाम से भी पहचाना जाता है, जिसका अर्थ है तीन लिंगों वाला देश। इसी त्रिलिंग और त्रिलिंगम तथा त्रिलिंगना नामों का अपभ्रंश से तेलंगाना शब्द की उत्पत्ति हुई।

आपको बता दें कि कलेश्वरम मंदिर को दक्षिणा गंगोत्री के नाम से भी जाना जाता है, जो तेलंगाना की सीमा और महाराष्ट्र की गोदावरी नदी के तट पर बना हुआ है। कलेश्वरम् मंदिर में पूजे जाने वाले मुख्य देवता भगवान शिव हैं। इस मंदिर में एक ही पीठ पर दो शिवलिंग बिराजमान हैं। इनमें से एक को भगवान शिव और दूसरी लिंग को मृत्यु के देवता यम की उपमा दी जाती है। इसी कारण मंदिर के देवता को कालेश्वर-मुक्तेश्वर स्वामी कहा जाता है।

श्रीसैलम आंध्र प्रदेश में आता है। श्रीसैलम में भी भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है, इस मंदिर के देवता को मल्लिकार्जुन स्वामी के रूप में पूजा जाता है और इनकी गणना भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की जाती है। इस मंदिर को भगवान शिव के 18 महा शक्तिपीठों में से एक भी माना जाता है।

इसी प्रकार भीमेश्वर भी आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के दक्षिणा काशी नाम से प्रसिद्ध गाँव में स्थित है। आंध्र प्रदेश में भगवान शिव के पंचराम क्षेत्रों में यह भी एक पवित्र स्थान है। इस मंदिर को द्रक्षरामं मंदिर के रूप में भी पहचाना जाता है और इस मंदिर में बिराजमान भगवान शिव को भीमेश्वर स्वामी के नाम से पूजा जाता है। यह मंदिर भी द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल है।

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