जा रही है ये 5 जून भी, इस ‘आधार’ को आधार देने के लिए कुछ किया आपने ?

* नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की गुजरात सरकार को फटकार

* देश के टॉप मोस्ट प्रदूषित शहरों में अहमदाबाद भी शामिल

* अहमदाबाद को 2 करोड़ पेड़ों की आवश्यकता, पर केवल 6 लाख पेड़ ही खड़े हैं

* AMC का मिशन मिलियन ट्री : शहर को दे पाएगा ग्रीन कवर ?

अहमदाबाद, 5 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। इस ख़बर के आरंभ में ही जिस शहर का नाम और जो तारीख लिखी है, उसे ध्यान से फिर एक बार पढ़िए। जी हाँ, शहर का नाम अहमदाबाद है, जो पश्चिमी भारत में स्थित गुजरात राज्य की आर्थिक राजधानी है और तारीख है 5 जून, जिस दिन पूरी दुनिया विश्व पर्यावरण दिवस मनाता है। प्रश्न यह उठता है कि क्या तुम्हें याद है कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है ? दूसरा प्रश्न यह उठता है कि विश्व पर्यावरण दिवस की तिथि 5 जून क्षण-क्षण करके बीती जा रही है, परंतु क्या आपने आपको आधार देने वाली धरती को आधार देने के लिए कोई आधारभूत कार्य किया ?

जी हाँ। हम बात करते हैं तपती धरती को तृप्त करने की एकमात्र क्षमता रखने वाले पेड़-पौधों और हरियाली की। आज जब विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को, वहीं गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने भी प्रदेश के नागरिकों को शुभकामनाएँ दीं, परंतु इस दिवस पर हर नागरिक को कम से कम एक पेड़ लगाने का संकल्प तो करना ही चाहिए। यह अत्यंत आवश्यक है।

जहाँ तक शासन-प्रशासन की बात है, तो सीएम रूपाणी ने पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में अहमदाबाद में दो महत्वपूर्ण अभियान भी शुरू किये। एक यह कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर देश की सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में शुमार गुजरात की सबसे प्राचीन, बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण साबरमती नदी की स्वच्छता का अभियान शुरू कराया। दूसरा यह कि उन्होंने देश और दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल अहमदाबाद में महानगर पालिका के मिशन मिलियन ट्री को शुरू किया। इस अभियान के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में जन भागीदारी से 10.90 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। इसी के साथ सीएम रूपाणी ने पूरे गुजरात में 10 करोड़ पौधे रोपने की भी घोषणा की है। साबरमती स्वच्छ होगी। अहमदाबाद में लाखों पौधे रोपने से हरित क्रांति होगी। यह सब सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है, परंतु वास्तविकता इससे न सिर्फ भिन्न है, बल्कि विपरीत है।

गुजरात सरकार का काम संतोषजनक नहीं

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरण के क्षेत्र में गुजरात सरकार के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया है और गंभीर कदम नहीं उठाने के लिये सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की है। एनजीटी ने सरकार के कामों की त्रुटियों को गंभीरता से लेते हुए पर्यावरण के क्षेत्र में और असरकारक कदम उठाने के लिये महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं और अक्टूबर-2019 में आयोजित होने वाली हीयरिंग में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये भी कहा है।

पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखकर सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में की गई एक पिटीशन को लेकर कुछ निष्कर्ष और सुझाव देकर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी को कुछ विशेष निर्देश दिये थे और एनजीटी ने दिसंबर 2016 में सरकार को आदेश दिये थे। इनकी समीक्षा में गुजरात पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड (GPCB) महानगर पालिका तथा विशेषज्ञों की बैठक में सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट सम्बंधी उठाए गये कदमों को अपर्याप्त बताया था और प्लास्टिक वेस्ट, बायो मेडिकल वेस्ट, सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत निर्धारित अवधि में नियमों का पालन करने के लिये कहा था।

एनजीटी के अनुसार गुजरात में पर्यावरण का चित्र निराशाजनक है और पर्यावरण जतन के लिये अभी बहुत कुछ करना बाकी है। धुआँ ओकने वाले वाहन, औद्योगिक इकाइयाँ तथा पावर हाउस की चिमनियों के कारण उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण का जन-जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। गुजरात में वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के रोगों और अस्थमा के कारण वर्ष में लगभग 52 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है।

डंपिंग स्टेशन पर बढ़ रहा कचरे का ढेर

साबरमती नदी जो अहमदाबाद और गुजरात की पहचान है, वह राज्य की 20 सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल है। देश के सबसे प्रदूषित 5 राज्यों में भी गुजरात शामिल है और वह चौथे स्थान पर है। अहमदाबाद के पिराणा में डंपिंग साइट पर कचरे का ढेर 95 लाख मेट्रिक टन हो चुका है और निकट भविष्य में ही कचरे का यह ढेर 1 करोड़ मेट्रिक टन को छू लेगा। कचरे का यह पहाड़ 84 एकड़ भूमि में फैला हुआ है और 75 फुट ऊंचा है।

मिशन मिलियन ट्री शुरू

वृक्षों के अभाव में भूमि तप रही है और गरमी रिकॉर्ड तोड़ रही है। ऐसे में अब महानगर पालिका ने विश्व पर्यावरण दिन से शहर में मिशन मिलियन ट्री शुरू किया है। मुख्यमंत्री के हाथों से अभियान की शुरुआत कराई है। इस अभियान के तहत 5 से 15 जून के भीतर अपने यहाँ पौधे रोपने के इच्छुक लोगों के नाम दर्ज किये जाएँगे। इसके बाद 20 जून से 30 सितंबर तक उन्हें पौधे वितरित किये जाएँगे। महानगर पालिका के अनुसार 2011 के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति वर्ष लगभग एक लाख पौधे रोपे जाते हें, जिनमें से 40 प्रतिशत वृक्ष ही बचते हैं। परिणामस्वरूप शहर के ग्रीन कवर में प्रति वर्ष मात्र 0.03 प्रतिशत का इजाफा होता है।

अहमदाबाद में मात्र 6.18 लाख वृक्ष

महानगर पालिका के अनुसार शहर में अभी 6.18 लाख वृक्ष हैं और ग्रीन कवर 4.66 प्रतिशत है, जो 10 लाख नये पौधे रोपे जाएँगे, उससे आगामी 3 वर्ष में शहर का ग्रीन कवर 5 प्रतिशत तक बढ़ने की आशा व्यक्त की जा रही है। महानगर पालिका जापानी टेक्नोलॉजी मायावाकी से 47 प्लॉट्स में 2.41 लाख पौधे रोपे जाएँगे। पौधारोपण के लिये 108 प्लॉट सुनिश्चित किये गये हैं, जिनमें 81 हजार पौधे रोपे जाएँगे। प्लॉट की बाउंड्री पर 71 हजार पौधे रोपे जाएँगे। रोड साइड तथा सेंट्रल वर्ज में भी 275 स्थानों पर 30 हजार से अधिक पौधे लगाये जाएँगे। इसी प्रकार साबरमती रिवरफ्रंट पर 73 हजार, अहमदाबाद जनमार्ग में 8 हजार, औडा क्षेत्र में 2 लाख, गुजरात युनिवर्सिटी क्षेत्र में 25 हजार, एज्युकेशन सोसाइटी क्षेत्र में 10 हजार, केंटोनमेंट बोर्ड में 10 हजार, एयरपोर्ट ऑथोरिटी के क्षेत्र में 4 हजार, जीआईडीसी क्षेत्र में 50 हजार, नेशनल हाई-वे पर 25 हजार, रेलवे के क्षेत्र में 50 हजार, मेट्रो रेल क्षेत्र में 20 हजार, निजी कंपनियों के क्षेत्र में 3 लाख तथा अन्य 3.15 लाख सहित कुल 10.90 लाख पौधे रोपे जाएँगे।

शहर में चाहिये 2 करोड़ वृक्ष

उल्लेखनीय है कि एक व्यक्ति की स्वस्थता के लिये कम से कम 3 वृक्षों का होना आवश्यक है, इस प्रकार अहमदाबाद की आबादी 65 लाख से भी आगे निकल चुकी है, ऐसे में अहमदाबाद में लगभग 1.95 करोड़ पौधों की आवश्यकता है, जिसकी तुलना में खुद एएमसी का कहना है कि शहर में मात्र 6.18 लाख वृक्ष ही मौजूद हैं, इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि शहर में पर्यावरण की स्थिति कितनी खराब है।

कंक्रीट का जंगल और एयरकंडीशन

शहर में अंधाधुंध तरीके से कंक्रीट का जंगल पाँव फैलाता जा रहा है, पक्के मकान कड़ी धूप में तपकर हवा को गर्म कर देते हैं, जिससे शहर में पक्के मकानों में रहने वाले लोग खुद ही गरमी से बेहाल हो उठते हैं। फिर वह गरमी से राहत के लिये एयरकंडीशन आदि का उपयोग करते हैं और अपने घर-ऑफिसों की गरमी को बाहर फेंकते हैं, यह एयरकंडीशन भी हवा को गरम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसके अलावा पक्की सड़कें, ईंट-पत्थरों के फर्श से सूर्य की किरणें टकराकर गरमी पैदा करती हैं। इन सड़कों पर दौड़ते लोहे के वाहन और उनसे निकलने वाला धुआँ भी गरमी और प्रदूषण बढ़ाते हैं। ऐसे में अब लोगों को ही जागृत होने की आवश्यकता है और सरकार तथा एएमसी के अभियान से जुड़कर पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़-चढ़कर योगदान देना होगा, तभी भविष्य सुरक्षित होगा, अन्यथा आगामी दिनों में शहर में साँस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।

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