भारत ने पाकिस्तान को किया बेबस और हाफिज़ सईद को बरबाद

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत ने पाकिस्तान पर एक और बड़ी कूटनीतिक जीत दर्ज की है। भले ही फाइनांसियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) में पाकिस्तान फिलहाल ब्लैक लिस्ट होने से बच गया है, हालाँकि यह उसके लिये राहत की बात तो हो सकती है, परंतु यह खुशी की बात तो बिल्कुल भी नहीं है। क्योंकि ब्लैक लिस्ट होने की तलवार तो उसकी गर्दन पर अभी भी लटक ही रही है। पाकिस्तान को फिलहाल 4 महीने के लिये ऑक्सीजन मिली है, परंतु यह ऑक्सीजन भी उसे शर्तिया मिली है। इस शर्त पर कि अगले 4 महीने में वो उसके यहाँ मौजूद वैश्विक आतंकवादियों और उनके संगठनों को फण्डिंग के रूप में मिलने वाली ऑक्सीजन को बंद कर दे। यदि मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान अब बेबस है और उसे ऐसा करना ही होगा। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को कुछ कड़े कदम उठाने भी पड़े हैं, जिसके कारण जमात-उद-दावा और फलाहे-इंसानियत जैसे संगठनों के खिलाफ कार्यवाही की गई है। इन संगठनों का सरगना इनामी वैश्विक आतंकी हाफिज़ सईद है, जो मुंबई में 2008 में हुए 26-11 के आतंकी हमले का भी मास्टर माइंड है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह भारत के कूटनीतिक दबाव का ही परिणाम है कि पाकिस्तान आतंकियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिये विवश हो गया है और फण्डिंग बंद होने से पाकिस्तान में बैठे आतंकी व उनके संगठन पैसों के लिये मोहताज़ हो गये हैं।

क्या है FATF और क्या है इसका काम ?

वित्तीय कार्य बल यानी फाइनांसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है, जो काले धन को वैध बनाने (मनी लॉण्डरिंग) को रोकने से जुड़ी नीतियाँ बनाने के लिये सन 1989 में स्थापित किया गया है। वर्ष 2001 में इसका कार्य क्षेत्र विस्तारित किया गया और आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरुद्ध नीतियाँ बनाने कार्य भी इसके कार्य क्षेत्र में सम्मिलित किया गया है। इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पैरिस में स्थित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के मुख्यालय में है।

फरवरी-2018 में FATF की ग्रे लिस्ट में लाया गया पाकिस्तान

फरवरी 2018 में एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था। इस लिस्ट में शामिल देशों पर टेरर फण्डिंग के लिये कड़ी निगरानी रखी जाती है। भारत की कोशिशों के चलते ही पहले अमेरिका ने हाफिज़ सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया और उस पर इनाम की भी घोषणा की थी। इसके बाद भारत के कूटनीतिक दबाव के चलते ही अमेरिका भारत, ब्रिटेन, फ्रांस सहित विभिन्न देशों के समर्थन से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को डालने का प्रस्ताव लाया था। खास बात यह रही कि पाकिस्तान जिसकी दोस्ती का दम भरता है, उस चीन ने भी ऐन वक्त पर उसका साथ छोड़ दिया और अमेरिकी प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियाँ वापस ले लीं थी।

हर चार महीने में एफएटीएफ की बैठक होती है, जिसमें टेरर फण्डिंग वाले देशों द्वारा उनके यहाँ आतंकवादियों, उनके संगठनों तथा उनकी गतिविधियों को रोकने के लिये उठाये गये कदमों की समीक्षा की जाती है। फरवरी-2018 में ग्रे लिस्ट में शामिल किये गये पाकिस्तान द्वारा उसके यहाँ आतंकियों और उनके संगठनों के विरुद्ध उठाये गये कदमों की समय-समय पर समीक्षा की जा रही है। चूँकि 2012 से 2015 के दौरान भी उसे इस लिस्ट में डाला गया था और बाद में उसे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसलिये इस बार भी शुरुआत में पाकिस्तान ने ढिलमुल रवैया ही दिखाया, परंतु इस बार उसे तब पहला और बड़ा झटका लगा जब अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता रोक दी। इसके बाद दुनिया को दिखाने के लिये उसने हाफिज़ सईद पर दिखावटी कार्यवाही की और उसे जेल में डाल दिया, परंतु जल्दी ही उसके नाटक से पर्दा उठ गया, जब हाफिज़ सईद कई कार्यक्रमों में शिरकत करते देखा गया।

पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान पर बढ़ा अंतर्राष्ट्रीय दबाव

फरवरी में कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान में आतंकी संगठन के ट्रेनिंग सेंटर पर हमला करके उसे ध्वस्त किया, बल्कि दुनिया में और कड़े रुख के साथ पाकिस्तान पर पाबंदियाँ लगाने की माँग बुलंद की। इसके बाद पाकिस्तान को भी अहसास हो गया कि भारत की कूटनीति के दबाव में एफएटीएफ उसे ग्रे से ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है। ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान पर निगरानी की जाती है और ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को लगभग 10 अरब डॉलर यानी करीब 69 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक नुकसान हो रहा है। यदि ब्लैक लिस्ट हो गया तो यह नुकसान और भी बड़ा हो जाएगा। पुलवामा हमले और भारत की एयर स्ट्राइक के बाद एफएटीएफ की टीम ने मार्च-2019 में पाकिस्तान का दौरा भी किया था। इस दौरे में टीम ने 8 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के विरुद्ध कार्यवाही को लेकर पाकिस्तान की नीयत पर सवाल खड़े किये थे। एफएटीएफ के सदस्यों ने कहा था कि पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों के विरुद्ध ज़मीनी कार्यवाही तो दूर जाँच तक नहीं की। वे प्रतिबंधित संगठन अभी भी धन एकत्र कर रहे हैं और रैलियाँ कर रहे हैं। उस समय एफएटीएफ ने पाकिस्तान को आतंकी संगठनों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिये कहा था।

पाकिस्तान में आतंकियों के 5 हजार बैंक खाते हुए बंद

इसके बाद इस एफएटीएफ की पिछली बैठक में भी पाया गया कि पाकिस्तान एफएटीएफ की ओर से लागू नियमों को पूरा करने में सफल नहीं हुआ था, जिससे उसे शर्तें पूरी करने के लिये समय दिया गया था। इस अक्टूबर में हुई एफएटीएफ की बैठक में फिर पाकिस्तान की ओर से आतंकियों के विरुद्ध उठाये गये कदमों की समीक्षा की गई, जिसमें एक बार फिर पाकिस्तान फेल ही हुआ है, हालाँकि अब उसे ब्लैक लिस्ट करने से पहले अंतिम 4 महीने का समय दिया गया है। यदि इन 4 महीनों में उसने आतंकियों और उनके संगठनों को मिलने वाली फण्डिंग पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई तो पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा, जिसके बाद कोई भी देश अथवा कोई भी अंतर्राष्ट्रीय बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान पाकिस्तान को कर्ज नहीं देगा। इसके अलावा पाकिस्तान को विदेशी पूँजी निवेश हासिल करने में भी मुश्किल होगी। इसलिये मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान ने विवश होकर अब आतंकियों व उनके संगठनों के विरुद्ध कदम उठाने शुरू किये हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की विविध एजेंसियों ने लगभग 5 हजार बैंक खातों को बंद करके उनमें मौजूद 20 करोड़ से अधिक की धन राशि को जब्त कर लिया है। सबसे अधिक कार्यवाही पंजाब प्रांत में की गई है, जहाँ सबसे अधिक बैंक अकाउण्ट को बंद किया गया है। इसके अलावा पाकिस्तान ने अधिक से अधिक संदिग्ध लोगों को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत चौथी अनुसूची में रखा है, जबकि सैकड़ों ऐसे लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

भारत को मिली कूटनीतिक सफलता, मोहताज़ हुए आतंकी

मीडिया रिपोर्ट्स में भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान को इस कार्यवाही के लिये विवश करने का श्रेय भारत को जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार एफएटीएफ की संस्था एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) का नेतृत्व भारत कर रहा है। इस ग्रुप की बैठक में भारत ने जमात-उद-दावा और फलाहे-इंसानियत जैसे संगठनों के खिलाफ कार्यवाही को और तेज करने की माँग की है, जिसके आगे पाकिस्तान को कार्यवाही के लिये बेबस होना पड़ा है। इतना ही नहीं, कार्यवाही के कारण वहाँ के आतंकियों को मिलने वाली ऑक्सीजन बंद होने लगी है, जिससे उनका दम घुटने लगा है और वे पैसों के लिये मोहताज़ होने लगे हैं।

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