VIDEO : शहला राशिद के मुँह पर करारा तमाचा हैं ये 32 कश्मीरी लड़कियाँ : जानिए कौन हैं इनके ‘भाईजान’ ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की छात्रा और छात्र संघ की पूर्व नेता शहला राशिद जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से सेना और सरकार के विरुद्ध लगातार ट्वीट करके चौतरफा घिर गई हैं। उन्होंने भाजपा और उसके नेतृत्व वाली मोदी सरकार पर अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिये जम्मू कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, वहीं सेना और पुलिस पर कश्मीरी नागरिकों के घर में जबरन घुसकर लोगों को हिरासत में लेने और उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप लगाये हैं। सेना की ओर से जहाँ उनके आरोपों का खंडन किया गया है, वहीं एक वकील ने शहला के विरुद्ध राजद्रोह और सामुदायिक सामंजस्य को बिगाड़ने के लिए झूठ फैलाने के मामले दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने की माँग के साथ सुप्रीम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। शहला राशिद कश्मीर में स्थिति तनावपूर्ण होने के आरोप लगा रही हैं वहीं उनके आरोपों की पोल खोलने वाली तस्वीरें कश्मीर से ही सामने आ रही हैं, जहाँ स्कूल कॉलेज खुल चुके हैं और सरकारी दफ्तरों में भी नियमित कामकाज शुरू हो चुका है। ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, जिसमें दिल्ली के तीन सिख युवकों ने पुणे में पढ़ने गई 32 कश्मीरी लड़कियों को कड़े सुरक्षा बंदोबस्त के बीच भी सुरक्षित उनके घर पहुँचाकर ‘भाईजान’ की भूमिका निभाई है।

कौन हैं शहला राशिद ?

शहला राशिद कश्मीरी हैं और मूल रूप से श्रीनगर की रहने वाली हैं। वह भी अन्य कश्मीरी नेताओं की तरह ही जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाये जाने के विरुद्ध हैं और केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा तथा उसके नेतृत्व वाली एनडीए की मोदी सरकार की कड़ी विरोधी हैं। जबसे जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाई गई है, तब से ही वह आक्रामक रुख अपनाये हुए हैं और ट्विटर पर मोदी सरकार के विरुद्ध सक्रिय हैं। रविवार को शहला ने एक के बाद एक 10 ट्वीट करके दावा किया कि कश्मीर में धारा 370 हटाये जाने के बाद से हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं। वहाँ सेना और पुलिस लोगों के घरों में जबरन घुस रही है और लोगों को सता रही है। शोपियां में सुरक्षाबलों ने कुछ लोगों को जबरन हिरासत में लिया है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा और मोदी सरकार पर अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिये कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया। उनके आरोपों पर भारतीय सेना ने प्रतिक्रिया दी और खुलासा किया कि शहला के सारे आरोप बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं, जिनमें कोई सच्चाई नहीं है। सैन्य बलों तथा प्रशासन की ओर से भी कहा गया है कि कश्मीर में स्थिति शांतिपूर्ण है और हालात नियंत्रण में हैं। कश्मीर के मुख्यालय श्रीनगर में सोमवार से स्कूल-कॉलेज भी खुल गये हैं और सरकारी दफ्तरों में भी नियमित कामकाज शुरू हो गया है।

शहला के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शहला के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें उनकी तत्काल गिरफ्तारी की माँग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शहला कश्मीर के हालात को लेकर झूठ फैला रही हैं और इस प्रकार वह नफरत फैलाने की साजिश में शामिल हैं। याचिकाकर्ता ने शहला राशिद के ट्वीट को अपनी शिकायत का आधार बनाया है और शहला के विरुद्ध भारतीय दंडसंहिता (IPC) की धारा 124 A, 153, 153 A, 504, 505 और IT एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करके कार्यवाही करने की माँग की है। श्रीवास्तव ने याचिका में आरोप लगाया कि शहला ने अपने ट्वीट्स के माध्यम से भारतीय सेना पर निराधार आरोप लगाये हैं, इसलिये उनके खिलाफ देशद्रोह और समुदाय के बीच वैमनस्य फैलाने के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज कर कार्यवाही की जानी चाहिये।

32 कश्मीरी लड़कियाँ सुरक्षित घर लौटी

शहला राशिद के दावे कितने झूठे और खोखले हैं, इसका प्रमाण इस बात से भी मिलता है कि पुणे में नर्सिंग का कोर्स करने के लिये गईं 32 कश्मीरी लड़कियों को जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद कड़े सुरक्षा प्रबंध किये जाने से अपने घर लौटने और अपने परिवार वालों की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी थी। उन्हें यह भी चिंता थी कि पुलवामा हमले के बाद कश्मीर से बाहर पढ़ाई के लिये गये कुछ छात्रों पर हमले हुए थे, वैसा ही कुछ उनके साथ भी ना हो जाए। इसलिये यह लड़कियाँ अपने घर लौटना चाहती थी और अपने परिवार वालों से मिलना चाहती थी। क्योंकि सुरक्षा प्रबंधों के तहत कश्मीर में इंटरनेट और मोबाइल सेवा भी बंद कर दी गई थी, इसलिये वह परिवार वालों से बात भी नहीं कर पा रही थी। तभी दिल्ली के तीन सिख युवक इन कश्मीरी लड़कियों के लिये ‘भाईजान’ बनकर सामने आये।

32 कश्मीरी लड़कियों के 3 सिख ‘भाईजान’ !

दरअसल कश्मीर में सुरक्षा कारणों से पाबंदियाँ लगाये जाने के बाद कश्मीरी लोगों का दूसरे लोगों से संपर्क विच्छेद हो गया था। ऐसे में कश्मीरी लोगों की मदद के लिये दिल्ली के सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के तीन युवकों हरमिंदर सिंह, बलजीत सिंह और अरमीत सिंह ने फेसबुक लाइव के माध्यम से उनसे संपर्क करने की अपील की। पुणे में रहने वाली 32 कश्मीरी लड़कियों ने पुणे स्थित एसजीपीसी की सुपरवाइज़र रुकैया किरमानी की मदद से दिल्ली स्थित इन तीनों युवकों का संपर्क किया तो इन तीनों ने चंदा इकट्ठा करके सभी लड़कियों को सुरक्षित जम्मू कश्मीर पहुँचाने का प्रबंध किया और खुद उन्हें उनके घर तक छोड़कर आये। सभी छात्राओं की भारतीय सेना की मदद से सेना के वाहनों में बारामूला, शोपियां, कुपवाड़ा और श्रीनगर समेत पाँच अलग-अलग जिलों में पहुँचाया। अपने बच्चों को सही सलामत घर पहुँचा देखकर माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू छलक आए। परिवार और लड़कियों ने तीनों सिख दोस्तों और भारतीय सेना को धन्यवाद दिया। सोशल मीडिया पर इन लड़कियों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इन सिख भाईजान की जमकर तारीफ कर रहे हैं। इन तीनों दोस्तों ने कश्मीरी लड़कियों को सही सलामत उनके घर पहुँचाकर एक तरफ मानवता की मिशाल पेश की है, वहीं दूसरी ओर सामुदायिक वैमनस्य फैलाने वाले लोगों के गालों पर करारा तमाचा भी जड़ा है।

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