जिनपिंग का ऑफर बनेगा ‘वरदान’ ? : लगातार ‘गो बैक मोदी’ कहने वाला तमिलनाडु पहली बार कह रहा ‘वेलकम मोदी’

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। तमिलनाडु के राजनीतिक वातावरण में पहली बार इतनी सकारात्मकता और सर्वसम्मति देखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के चिरायु राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महाबलिपुरम् में हो रही अनौपचारिक शिखर वार्ता ने तमिलनाडु को गर्व और गौरव से भर दिया है। मोदी-जिनपिंग शिखर वार्ता के लिए महाबलिपुरम् का चयन किए जाने से सबसे अधिक ख़ुश केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) है, वहीं महाबलिपुरम् के चयन ने राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के सहयोगी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम् (अन्नाद्रमुक-AIADMK) तथा मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम् (द्रमुक-DMK) को भी एक साथ ला खड़ा किया है। जिस तमिलनाडु में पिछले पाँच वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हर दौरे के दौरान डीएमके ‘गो बैक मोदी’ के नारे लगाता था, वही डीएमके आज ‘वेलकम मोदी’ कह रहा है।

तमिलनाडु में मोदी के लिए डीएमके सहित अन्य विपक्षी दलों द्वारा ‘गो बैक मोदी’ के स्थान पर ‘वेलकम मोदी’ के नारे लगाए जा रहे हैं, तो इसका श्रेय चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ही जाता है। नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद जिनपिंग से कई औपचारिक मुलाक़ातें कर चुके हैं, परंतु अनौपचारिक मुलाक़ात का सिलसिला वुहान (चीन) से आरंभ हुआ था और अब महाबलिपुरम् में मोदी-जिनपिंग के बीच दूसरी बार अनौपचारिक मुलाक़ात होने जा रही है, परंतु भारत-चीन संबंधों के लिहाज़ से जहाँ यह अनौपचारिक मुलाक़ात अनेक प्रकार से महत्वपूर्ण है, वहीं तमिलनाडु की राजनीति के लिहाज़ से इस दूसरी अनौपचारिक मुलाक़ात के लिए महाबलिपुरम् का चयन किया जाना भाजपा-एआईएडीएमके को राजनीतिक लाभ पहुँचा सकता है, क्योंकि पहली बार डीएमके के सुर भी मोदी को लेकर बदले हैं और इसका श्रेय जिनपिंग को जाता है, क्योंकि इस अनौपचारिक शिखर वार्ता के स्थल के रूप में महाबलिपुरम् का चयन स्वयं शी जिनपिंग ने किया है।

तमिलनाडु में क्यों है मोदी के प्रति आक्रोश ?

तमिलनाडु में वैसे तो केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा का कोई राजनीतिक अस्तित्व नहीं है, परंतु एक प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी को लेकर तमिलनाडु के लोगों के मन में नकारात्मक छवि का होना राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए ही नहीं, अपितु भारत के संघीय ढाँचे की मूल भावना के लिए भी चिंता का कारण है। दिल्ली की गद्दी पर किसी भी राजनीतिक दल का नेता प्रधानमंत्री हो सकता है, परंतु वह पूरे देश का प्रधानमंत्री होता है। मोदी से पहले देश के 13 प्रधानमंत्रियों को लेकर तमिलनाडु के लोगों में इतना द्वेष नहीं रहा, जितना कि मोदी को लेकर है। इसके पीछे कई कारण बताए जाते हैं। जब-जब मोदी तमिलनाडु जाते हैं, ट्विटर पर #GoBackModi ट्रेंड करने लगता है और यह किसी राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं होता। इस हैशटैग पर तमिलनाडु की आम जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध जम कर आक्रोश व्यक्त करती है। इसी साल जनवरी की बात करें, तो मोदी तमिलनाडु के मदुरै में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMS) की आधारशिला रखने पहुँचे थे। तब भी ट्विटर पर #GoBackModi ट्रेंड कर रहा था। इसके पीछे मुख्य कारण यह माना जाता है कि तमिलनाडु के लोग चक्रवात के दौरान केन्द्र सरकार द्वारा मदद नहीं किए जाने से नाराज हैं। इसके अलावा तूतीकोरिन में स्टरलाइट प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी पर भी मोदी मौन रहे, जिस गोलीबारी में 13 लोगों की मौत हो गई थी। कावेरी जल विवाद में केन्द्र सरकार के रवैये को लेकर भी तमिलनाडु की जनता में मोदी के प्रति रोष है।

पहली बार ‘वेलकम मोदी’ कर रहा ट्रेंड

मोदी और जिनपिंग के बीच शिखर वार्ता के लिए महाबलिपुरम् का चयन किया गया, तो पिछले पाँच वर्षों में पहली बार मोदी के तमिलनाडु दौरे से पहले ट्विटर पर #TNWelcomesModi ट्रेंड कर रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि तमिलनाडु के दौरे से पहले मोदी के स्वागत में पर #GoBackModi ट्रेंड कर रहा है। यद्यपि पर #GoBackModi भी ट्रेंड कर रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बजाए जिनपिंग की प्रशंसा की जा रही है। ट्विटर पर #GoBackModi के साथ ही पहली बार #TNWelcomesModi के ट्रेंड करने से तमिलनाडु भाजपा के नेता उत्साहित व आशावादी हैं। प्रदेश भाजपा सचिव प्रो. आर. श्रीनिवासन ने कहा, ‘अब तक यहां विपक्ष का ‘गो बैक मोदी’ नारा चलता रहा है, परंतु अब डीएमके चीफ एम. के. स्टालिन समिट के लिए मल्लापुरम को चुनने के लिए मोदीजी को धन्यवाद दे रहे हैं। अब यह नारा बदल गया है। वे ‘वेलकम मोदी’ बोल रहे हैं। यह गेमचेंजर है।’ उल्लेखनीय है कि डीएमके प्रमुख स्टालिन ने कहा है कि मोदी-जिनपिंग शिखर वार्ता के लिए महाबलिपुरम् के चयन पर उन्हें गर्व है।

तमिलनाडु चुनाव में होगा फायदा ?

लोकसभा चुनाव 2019 में भले ही भाजपा ने 2014 के मुक़ाबले अधिक सीटों के साथ मज़बूत बहुमत प्राप्त किया था, परंतु तमिलनाडु के लोगों ने भाजपा और राज्य में सत्तारूढ़ उसके सहयोगी एआईएडीएमके को क़रारी शिकस्त दी थी। लोकसभा चुनाव 2019 में तमिलनाडु की जनता ने डीएमके के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन यूपीए को 39 में से 36 सीटें जिताई थीं। इसमें अकेले डीएमके को 24, कांग्रेस को 8, वामपंथी दलों को 4 सीटें मिली थीं, जबकि राज्य में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके को केवल 1 सीट मिली थी, 2014 के मुक़ाबले 36 सीटें कम थीं। लोकसभा चुनाव 2019 के माध्यम से तमिलनाडु की जनता ने स्पष्ट संकेत दे दिया था कि वह केन्द्र में सत्तारूढ़ मोदी-भाजपा और राज्य में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के साथ नहीं है। राज्य की जनता में एआईएडीएमके की लोकप्रियता घटने का मुख्य कारण इस दल की संस्थापक और सबसे बड़ी नेता जे. जयललिता की अनुपस्थिति। तमिलनाडु में पिछला विधानसभा चुनाव 2016 में हुआ था और उस समय जयललिता जीवित थीं। उनके नेतृत्व में एआईएडीएमके ने बहुमत हासिल किया था। उन्हीं के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव 2014 में एआईएडीएमके को 39 में से 37 सीटें मिली थीं, परंतु जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके कमज़ोर पड़ गया है, जिसे 2019 के परिणामों से समझा जा सकता है। ऐसे में तमिलनाडु में दो वर्ष बाद होने वाले विधानसभा चुनाव 2021 से पहले मोदी-जिनपिंग की शिखर वार्ता के लिए महाबलिपुरम् का चयन सत्तारूढ़ एआईएडीएमके को फायदा पहुँचा सकता है। साथ ही भाजपा को भी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए ज़मीन तैयार करने में सहायता कर सकता है।

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