धनोआ ने खोली कांग्रेस की पोल : मनमोहन साहस करते, तो 2008 में ही हो जाती AIR STRIKE !

अहमदाबाद 28 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत ने अपने 1947 से लेकर 2015 तक के इतिहास में कभी भी अपनी सीमा को पार कर पाकिस्तान में सर्जिकल या एयर स्ट्राइक नहीं की थी। सितंबर-2016 में पहली बार भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LOC) पार कर सर्जिकल स्ट्राइक की और 2019 में एयर स्ट्राइक की। भारतीय थल सेना (INDIAN ARMY) और भारतीय वायुसेना (INDIA AIR FORCE) क्रमश: सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर सकीं, क्योंकि उनके पीछे दृढ़ राजनीतिक व शासकीय इच्छाशक्ति से परिपूर्ण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शक्तिशाली नेतृत्व था। भारतीय सैन्य बल की तीनों शाखाएँ किसी भी समय पर कोई भी कार्रवाई करने में सक्षम और सज्ज रहती हैं, बशर्ते कि उन्हें दृढ़ राजनीतिक-शासकीय इच्छाशक्ति का समर्थन मिले। जो एयर स्ट्राइक भारतीय वायुसेना यानी IAF ने 2019 में की, वह कदाचित पहली नहीं होती, यदि 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अपनी दृढ़ शासकीय इच्छाशक्ति का परिचय दिया होता।

कांग्रेस पार्टी अक्सर दावे करती है कि उसके शासनकाल में भारतीय सेना ने कई बार सीमा पार कर सर्जिकल स्ट्राइक्स कीं, परंतु इस बात की वास्तविकता का परिचय वायुसेना के हाल ही में सेवानिवृत्त हुए प्रमुख बी. एस. धनोआ के ताज़ा वक्तव्य से भी हो जाता है। धनोआ ने जो कहा है, उससे स्पष्ट है कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार केवल देश में सरकार चला रही थी। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर मनमोहन सरकार इतनी गंभीर नहीं थी जितनी कि वर्तमान मोदी सरकार है। यदि मनमोहन सरकार मज़बूत इरादों वाली होती, तो भारतीय वायु सेना ने 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर हुए आतंकवादी आक्रमण के बाद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में एयर स्ट्राइक कर दी होती, परंतु मनमोहन सरकार इसके लिए साहस नहीं जुटा पाई।

धनोआ ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों व अन्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि 26/11 के बाद भारतीय वायुसेना पूरी तरह तैयार थी पीओके में घुस कर एयर स्ट्राइक करने के लिए, परंतु सरकार ने आईएएफ के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। धनोआ ने कहा, ‘हम जानते थे कि पाकिस्तान में आतंकी ट्रेनिंग के ठिकाने कहाँ हैं और उन्हें नेस्तनाबूद करने के लिए हम तैयार थे, परंतु यह राजनीतिक फैसला था कि हमला करना है या नहीं।’ 31 दिसंबर, 2016 से 30 सितंबर, 2019 तक भारतीय वायुसेना प्रमुख रहे धनोआ के कहने का तात्पर्य स्पष्ट है कि मनमोहन सरकार ने राजनीतिक कारणों से एयर स्ट्राइक को स्वीकृति नहीं दी। धनोआ ने कहा कि वायुसेना के एयर स्ट्राइक के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया।

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