जानिए कहाँ हो रहा है अल्पसंख्यकों पर जुल्म : कैसे खुली पाकिस्तान के झूठ की पोल ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की बौखलाहट मंगलवार को एक बार फिर तब सामने आई, जब वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद में गिड़गिड़ाया और जम्मू कश्मीर में कश्मीरियों के मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा उन पर भारतीय सेनाओं की ओर से सितम ढाए जाने के आरोप लगाये। यहाँ भी उसे भारत से करारा जवाब मिला और भारत की ओर से विदेश मंत्रालय की सचिव विजय ठाकुर सिंह ने पाकिस्तान के साथ-साथ जिनेवा के मंच से दुनिया को भी जता दिया कि जम्मू कश्मीर भारत का अंदरूनी मामला है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कश्मीर पर झूठ की कहानी वहाँ से आई है, जो वैश्विक आतंकवाद का केन्द्र है। इससे पहले जिनेवा में यूएनएचआरसी में कश्मीर मुद्दे पर अपना पक्ष रखने पहुँचे पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के मुँह से खुद ही सच निकल गया और वह कह गये कि भारत के कश्मीर में…। इससे पहले पाकिस्तान जम्मू कश्मीर को भारत प्रशासित कश्मीर कहता आया है। पाकिस्तान के झूठ की पोल तो तब ही खुल गई थी, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के एक पूर्व विधायक बलदेव कुमार ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार से दुःखी होकर भारत से शरण मांगी।

कौन हैं बलदेव कुमार और उन्होंने क्या कहा ?

बलदेव कुमार इमरान खान की पार्टी तहरीके-इंसाफ के नेता हैं। वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारीकोट रिज़र्व सीट से विधायक रहे हैं। इन दिनों वह पंजाब के खन्ना में पूरे परिवार के साथ रह रहे हैं। बलदेव कुमार ने कुछ महीने पहले परिवार को पंजाब के लुधियाना में स्थित खन्ना शहर में अपने रिश्तेदारों के यहाँ भेज दिया था। 12 अगस्त को तीन महीने के वीज़ा पर खुद बलदेव कुमार भी यहाँ आ गये, परंतु अब वह पाकिस्तान नहीं लौटना चाहते हैं। उनके कथनानुसार वर्ष 2016 में उनके विधानसभा क्षेत्र के एक विधायक की हत्या हो गई। इस मामले में उन पर झूठे आरोप लगा कर उन्हें दो साल तक जेल में रखा गया। हैरानी की बात तो यह है कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के दो दिन पहले उन्हें हत्या के मामले से बरी कर दिया गया। ऐसे में बलदेव कुमार शपथ लेकर मात्र 36 घण्टे ही विधायक रह पाये। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर भारी अत्याचार हो रहे हैं। इन अत्याचारों को देख कर वह काफी दुःखी हैं और अब पाकिस्तान नहीं जाना चाहते। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का एक मामला तब सामने आया था, जब एक सिख समुदाय की लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर उसका मुस्लिम लड़के के साथ निकाह करवा दिया गया था और उसका नाम भी बदल दिया गया था।

झूठ बोलने वाले पाकिस्तान को दुनिया डाँटे

जम्मू कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की हर जगह फजीहत हुई है। इससे पहले वह संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में यह मामला लेकर गया था, जहाँ उसे तो परिषद की बैठक में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला था, परंतु उसकी तरफ से उसका हमदर्द चीन यह मुद्दा लेकर पहुँचा था और वहाँ से खाली हाथ लौटा था। फिर पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हमदर्दी हासिल करने की कोशिश की। डोनाल्ड ट्रंप ने भी हमदर्द बनने की कोशिश में अपनी फजीहत करवा ली। इस्लामिक देशों के समक्ष भी पाकिस्तान ने गुहार लगाई, परंतु वहाँ से भी उसे खरी-खरी सुना दी गईं, तब खुद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बयान दिया था कि जम्मू कश्मीर मामले में पाकिस्तान को इस्लामिक देशों समेत किसी की भी मदद नहीं मिल रही है और वह अलग-थलग पड़ गया है। इसके बावजूद पाकिस्तान जम्मू कश्मीर मामले को वैश्विक मसले का रूप देने के लिये हर मुमकिन कोशिश कर रहा है और झटके पर झटके खा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान की माली हालत खस्ता हो चुकी है और कोई देश उसे कर्ज देने को तैयार नहीं है। उस पर आतंकवादियों के खिलाफ कार्यवाही करने का भी दबाव है, जिससे ध्यान भटकाने के लिये एक मात्र कश्मीर मामले को उछालने के सिवाय उसके पास दूसरा कोई चारा भी नहीं है। हालांकि सच क्या है, यह खुद पाकिस्तान के विदेश मंत्री की ज़ुबान पर आ गया।

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