शादी करनी है, तो दिखानी होगी ‘कर्म कुंडली’ : जानिए कहाँ लागू होगा नया कानून ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 जुलाई 2019 (YUVAPRESS)। यूँ तो भारतीय परंपरा में विवाह के 8 प्रमुख प्रकार दर्शाए गये हैं, परंतु हाल में इनमें से दो प्रकार सर्वाधिक प्रचलित हैं। इनमें परिवारों और वर-कन्या की सहमति से जन्म कुंडली मिलाकर किया जाने वाला विवाह ‘ब्रह्म विवाह’ कहलाता है, जबकि परिवार की सहमति के बिना तथा बिना किसी रीति-रिवाज के जो विवाह किया जाता है वह ‘गंधर्व विवाह’ कहलाता है, जो आजकल ‘प्रेम विवाह या लव मैरिज’ के नाम से जाना जाता है। हालाँकि हम बात कर रहे हैं गोवा सरकार के एक ऐसे फैसले की, जिसके अनुसार अब विवाह के लिये जन्म कुंडली मिलाएँ अथवा न मिलाएँ, परंतु उम्मीदवार वर तथा कन्या को अपनी ‘कर्म-कुंडली’ अवश्य दिखानी होगी।

गोवा में शादी से पहले कराना होगा एचआईवी टेस्ट

दरअसल गोवा सरकार शादी से पहले वर-कन्या के लिये ह्यूमन इम्युनडिफिशियंसी वायरस अर्थात् (HIV) यानी एड्स का परीक्षण कराना अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। यदि गोवा सरकार ने यह नियम लागू किया तो गोवा में शादी करने के लिये उम्मीदवार वर और कन्या दोनों के ही लिये एचआईवी टेस्ट करवाना अनिवार्य हो जाएगा। गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे के कथनानुसार गोवा सरकार अभी इस प्रकार का कानून लागू करने पर विचार कर रही है। जल्दी ही विचार-विमर्श के बाद इस नियम को लागू किया जा सकता है। इससे पहले सरकार शादी का पंजीकरण अनिवार्य कर चुकी है। अब शादी का पंजीकरण कराने से पहले युगल को अपने एचआईवी टेस्ट की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करनी होगी, जो अभी तक अनिवार्य नहीं है। राणे के अनुसार अभी सरकार इस प्रस्ताव पर कानून विभाग की राय ले रही है। राणे ने कहा कि सरकार इस कानून को मंजूर किये जाने को लेकर प्रयास कर रही है। अभी इस प्रस्ताव पर कानून सहित कुछ विभागों की राय ली जा रही है। इन विभागों की राय प्राप्त होने के बाद उनके सुझावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा और इसके बाद इस कानून को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएँगे। राणे के मुताबिक राज्य विधानसभा के मॉनसून सत्र में इस प्रस्ताव को कानून का रूप दिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि गोवा विधानसभा का मॉनसून सत्र 15 जुलाई से आरंभ हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव की घट चुकी है चौंकाने वाली घटना

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की एक घटना ने सरकार को यह कानून बनाने की प्रेरणा दी है। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के बांगरमऊ इलाके में 3 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग की ओर से खून की जाँच के लिये एक कैंप लगाया गया था, जिसमें एक साथ लगभग 50 लोगों की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आने से कोहराम मच गया था। इस घटना के बाद इस इलाके के लोगों को अब शादी को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस इलाके में जो लोग शादियाँ कर रहे हैं, वह फूँक-फूँककर कदम उठा रहे हैं और जिस परिवार में वर या कन्या की शादी तय करते हैं, उस पूरे परिवार से इस बात की पूरी पुष्टि करवाते हैं कि उनके परिवार में कोई भी सदस्य एचआईवी पॉजिटिव तो नहीं है। इसके बाद ही उस परिवार में रिश्ता किया जाता है। इस घटना के बाद इलाके के अधिकाँश लोग एचआईवी टेस्ट करवा रहे हैं और रिश्ता तय होने पर इसे सर्टिफिकेट की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इस घटना के बाद से ही इस इलाके में लोग जन्म कुंडली मिलाने से ज्यादा एचआईवी टेस्ट की रिपोर्ट को ज्यादा तरजीह देते हैं। एड्स सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. आई.एस. गिलाड़ा सहित कुछ लोग इस क्षेत्र के लोगों की इस पहल को अच्छी पहल भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार एचआईवी टेस्ट का आग्रह करने की शर्त के कारण रिश्ता टूट जाता है, परंतु इस मामले में दोनों ही पक्ष के लोगों की प्रशंसा करनी चाहिये कि वह इस तरह का आग्रह करके वर और कन्या के स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित कर रहे हैं। इस तरह के कुछ मामलों में तो लोग सीख लेते हुए बिना कहे ही जाँच करवा रहे हैं, ताकि संदेह की कोई गुंजाइश ही न रहे और जिन्हें यह बीमारी होती है, उनका भी पता चल जाता है।

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