VIDEO : महाराष्ट्र में नहीं बन सकी सरकार, लागू हुआ राष्ट्रपति शासन

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 12 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2019 के परिणाम घोषित होने के 19 दिन बाद भी जब सरकार नहीं बन सकी, तो अंततः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने संवैधानिक तरीके से राज्य में सरकार गठित करने के प्रयास किये, परंतु किसी भी राजनीतिक दल को प्रदेश में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और राजनीतिक विचारधाराओं के मेल नहीं खाने से किसी दल के बीच सरकार गठन के लिये गठजोड़ या समझौता नहीं हो सका, जिसके चलते राज्य में सरकार गठित नहीं हो पाई। इसलिये राज्यपाल ने केन्द्र सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की गई थी। केन्द्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने फाइल राष्ट्रपति के पास भेजी थी, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूर कर लिया है और संविधान की धारा 356 के तहत प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है।

राष्ट्रपति शासन की सिफारिश पर कोविंद ने किये हस्ताक्षर

पंजाब के दौरे से लौटने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गृह मंत्रालय की ओर से भेजी गई महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने वाली फाइल पर अपनी मंजूरी की मुहर लगा दी। इसी के साथ महाराष्ट्र में पिछले 24 अक्टूबर को चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद से शुरू हुई सरकार गठन की अनिश्चितता का फिलहाल पटाक्षेप हो गया है।

शिवसेना की महत्वाकांक्षा ने नहीं बनने दी सरकार

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिये पिछले महीने 21 अक्टूबर को मतदान हुआ था। 24 अक्टूबर को हुई मतगणना में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने का जनादेश मिला था। भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें प्राप्त हुई थी। एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें प्राप्त हुई हैं। प्रदेश में सरकार बनाने के लिये 145 सीटों की आवश्यकता थी। इस महायुति के पास सरकार बनाने का अवसर था, परंतु शिवसेना की सरकार में 50-50 भागीदारी और प्रथम ढाई वर्ष के लिये मुख्यमंत्री पद की महत्वाकांक्षा ने राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर दी, जिसके चलते महायुति टूट गई। ऐसे में भाजपा ने बहुमत न होने के चलते प्रदेश में सरकार बनाने से इनकार कर दिया। भाजपा के इनकार के बाद शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के पाले में गेंद आई और उन पर आपसी तालमेल से प्रदेश में स्थिर शासन देने की जिम्मेदारी आई, परंतु कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन और शिवसेना के बीच राजनीतिक विचारधारा में मतभेद के चलते यह युति भी नहीं बन पाई। इस बीच 9 नवंबर को प्रदेश में वर्तमान देवेन्द्र फडणविस सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया, इसलिये 8 नवंबर को ही फडणविस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी थी। हालांकि नई सरकार के गठन तक राज्यपाल ने उनसे पद पर बने रहने के लिये कहा था, परंतु जब विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के तीन दिन बाद तक किसी दल की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया गया तो राज्यपाल ने प्रदेश में राजनीतिक अनिश्चितता की अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेज कर उससे प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर दी। केन्द्रीय कैबिनेट ने इस पर अपनी मुहर लगाने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय के माध्यम से सिफारिश को मंजूरी के लिये राष्ट्रपति के पास भेजा तो राष्ट्रपति कोविंद ने भी उस पर हस्ताक्षर कर दिये। इसी के साथ अब प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है।

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