गुजरात : इन 10 सीटों पर भाजपा जीती, तो समाप्त हो सकता है इस नेता का सामाजिक-राजनीतिक भविष्य !

लोकसभा चुनाव 2019 गुजरात में कई महत्वपूर्ण नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना है, जिनमें सबसे बड़ा नाम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का है, तो कांग्रेस में विधानसभा में विपक्ष के नेता परेश धानाणी, पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी के पुत्र भरतसिंह सोलंकी सहित शामिल हैं, परंतु आज हम जिस नेता की बात कर रहे हैं, वह आज भले ही कांग्रेस का नेता हो, परंतु एक समय वह गुजरात के एक बड़े सामाजिक वर्ग का सबसे लोकप्रिय सामाजिक नेता था। वह आगे भी अपने विशाल समाज का सबसे प्रमुख नेता बना रहेगा या नहीं, इसका निर्णय 23 मई को होगा।

जी हाँ। बात हो रही है हार्दिक पटेल की। 25 अगस्त, 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में लाखों पाटीदारों की भीड़ एकत्र कर अपनी शक्ति और क्षमता का एहसास दिलाने वाले पाटीदार समुदाय के नेता हार्दिक पटेल मार्च-2019 से कांग्रेस नेता बन चुके हैं। इसके साथ ही उनकी प्रमुख पाटीदार नेता की छवि पर राजनीति का सिम्बॉल भी लग गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोधी चेहरे के रूप में उभरे हार्दिक पटेल ने कांग्रेस में शामिल होकर अंततः अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा उजागर कर दी और अपने ही समाज के हजारों लोगों के बीच सामाजिक नेता की मजबूत छवि गँवा बैठे। हार्दिक की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर तो विसनगर दंगा केस ने ब्रेक लगा दी, जिसके चलते वे गुजरात में लोकसभा चुनाव के मैदान में नहीं उतर सके, परंतु उन्होंने पूरे गुजरात में घूम-घूम कर भाजपा-मोदी के विरुद्ध कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए प्रचार अवश्य किया।

यद्यपि हार्दिक पटेल के पास स्वयं को सच्चा पाटीदार हितैषी नेता होने और स्वयं के कांग्रेस के जरिए राजनीति में आने के निर्णय को सही सिद्ध करने का अंतिम अवसर है। भले ही हार्दिक चुनावी मैदान में न उतर सके, परंतु मंगलवार के मतदान पर हार्दिक के प्रचार का जनता विशेषकर पाटीदार समाज पर कितना प्रभाव पड़ता है, उस पर हार्दिक पटेल का सामाजिक-राजनीतिक नेता के रूप में भविष्य निर्भर करेगा।

कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी ने हार्दिक पटेल को जिस उद्देश्य के लिए पार्टी में शामिल किया था, वह उद्देश्य यदि 23 मई को परिणाम वाले दिन सफल साबित हुआ, तो हार्दिक के राजनीतिक भविष्य के कई रास्ते खुल जाएँगे और पाटीदार समाज में भी उनकी स्वीकार्यता और प्रतिष्ठा सिद्ध हो जाएगी। इसके लिए आवश्यक यह है कि कांग्रेस गुजरात में लोकसभा की उन 10 सीटों को जीते, जहाँ पाटीदार मत निर्णायक हैं। इन सीटों पर कांग्रेस की जीत का अर्थ सीधा यह निकलेगा कि राहुल ने हार्दिक को जिस मिसन पाटीदार के साथ पार्टी में शामिल किया था, वह सफल रहा, परंतु यदि इन 10 सीटों पर भाजपा जीती, तो हार्दिक पटेल का न केवल सामाजिक नेतृत्व सवालों के घेरे में आ जाएगा, अपितु कांग्रेस पार्टी में उनकी प्रतिष्ठा और राजनीतिक भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

किन 10 सीटों पर हार्दिक की प्रतिष्ठा दाँव पर ?

गुजरात में पाटीदारों के वर्चस्व वाली लोकसभा की 10 सीटें हैं, जिनमें अहमदाबाद पूर्व, गांधीनगर, अमरेली, राजकोट, पोरबंदर, जामनगर, जूनागढ, भावनगर, मेहसाणा और सूरत शामिल हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा ने सभी 26 सीटें जीती थीं। ऐसे में जबकि हार्दिक ने कांग्रेस के पक्ष में पूरे गुजरात में घूम-घूम कर प्रचार किया है, तब उनके प्रचार का पाटीदारों पर प्रभाव कितना पड़ा है, यह बात इन 10 लोकसभा सीटों के परिणाम से समझ में आ जाएगी। यदि कांग्रेस इन 10 में से 6 से 7 सीटें भी जीतने में सफल रही, तो भी हार्दिक की मेहनत रंग लाई कहलाएगी, परंतु यदि भाजपा ने तमाम 10 सीटों पर कब्जा बनाए रखा, तो हार्दिक के लिए आगे की राह मुश्किल हो जाएगी। हार्दिक पटेल कांग्रेस जॉइन करने के बाद पाटीदार समाज के अनेक नेताओं और लोगों की नाराज़गी का पहले ही सामना कर रहे हैं और यदि दसों सीट पर भाजपा जीती, तो हार्दिक पटेल कांग्रेस पार्टी में भी विशेष महत्व खो बैठेंगे और राजनीतिक भविष्य अधर में लटक सकता है।

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