मोदी गंगा के, तो रूपाणी बनने जा रहे हैं गंगा पुत्री के ‘भगीरथ’ : जानिए कैसे ?

अहमदाबाद में 5 जून से जनभागीदारी से शुरू होगा साबरमती स्वच्छता महाभियान

शहर की सड़कों की तर्ज पर प्रति दिन होगी साबरमती नदी की सफाई

नदी में खुलने वाली गटरों का पानी ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाया जाएगा

तटों से जमा 250 टन कचरा हटाया, अब कूड़ा फेंकने वालों पर लगेगा फाइन

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 3 जून, 2019। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी माँ गंगा के और उनके निकटतम शिष्य गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी गंगापुत्री के भगीरथ बनने जा रहे हैं। 2014 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में विश्वनाथ महादेव की नगरी वाराणसी से जब पहली बार लोकसभा चुनाव के लिये पर्चा दाखिल किया था, तब उन्होंने घोषणा की थी कि उन्हें माँ गंगा ने बुलाया है। इसके बाद पीएम बनने पर उन्होंने न सिर्फ शिव नगरी वाराणसी के विकास के लिये काम किया बल्कि माँ गंगा की सफाई के लिये भी कई महत्वपूर्ण कार्य करके वह गंगा के आधुनिक भगीरथ बन गये। अब उनके शिष्य और गुजरात के सीएम विजय रूपाणी भी अपने गुरु पीएम मोदी के पदचिह्नों पर चलते हुए गंगापुत्री साबरमती की सफाई के लिये आगे आये हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार शिवजी माँ गंगा को गुजरात लेकर आए थे, तब ही साबरमती नदी का जन्म हुआ था। इस प्रकार साबरमती को माँ गंगा की पुत्री के रूप में जाना जाता है। गुजरात के मुख्यमंत्रित्व काल में तत्कालीन सीएम नरेन्द्र मोदी ने सूखी पड़ी साबरमती में नर्मदा का पानी लाकर पहले इसका उद्धार किया और इसके बाद अहमदाबाद में इस नदी के तट पर बसी झुग्गियों को हटाकर सिंगापुर की तर्ज पर साबरमती नदी पर रिवरफ्रंट का विकास करके इस प्रोजेक्ट से देश और दुनिया का ध्यान खींचा।

हालाँकि एक तरफ जहाँ भारतीय संस्कृति में नदियों को पवित्र और माँ का दर्जा दिया जाता है, वहीं धार्मिक भावना वाले लोग ही नदियों में होम-हवन, पूजा-पाठ की सामग्री और मूर्तियों का विसर्जन करके नदियों को प्रदूषित करते हैं। इसके अलावा नदियों के आसपास विकसित शहरों की गटरों का पानी भी नदियों में जाकर नदियों की पवित्रता और स्वच्छता को दूषित करता है।

केन्द्र की सत्ता में पहुँचने के बाद जहाँ एक ओर पीएम मोदी ने गंगा की सफाई के लिये कई महत्वपूर्ण कदम उठाए और गंगा नदी में जानेवाले कई शहरों की गटरों के पानी को रोकने के साथ-साथ उद्योगों के केमिकल वाले पानी को भी गंगा में जाने से रोकने की दिशा में कई कदम उठाये हैं। वहीं अब उनके शागिर्द गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने अपने राज्य में गंगा की बेटी साबरमती को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठाया है। रूपाणी की देखरेख में अहमदाबाद महानगर पालिका 5 जनवरी से जनभागीदारी के साथ साबरमती स्वच्छता महाभियान की शुरुआत करने जा रही है, जिसे सीएम रूपाणी हरी झंडी दिखाएँगे।

अहमदाबाद की महापौर बीजल पटेल तथा अहमदाबाद महानगर पालिका के आयुक्त विजय नेहरा के अनुसार पहली बार जनभागीदारी से अहमदाबाद में साबरमती नदी की स्वच्छता का महाभियान शुरू किया जा रहा है। 5 जून से महाभियान की शुरुआत होगी, जो 9 जून तक चलेगा। इस दौरान दधीचि ब्रिज से लेकर इंदिराब्रिज तक प्रतिदिन सफाई की जाएगी।

विजय नेहरा के अनुसार नदी में 98 प्रतिशत गंदगी शहर की गटरों के गंदे पानी से होती है और 2 प्रतिशत गंदकी लोग नदी में कचरा फेंककर करते हैं। शहर में लगभग 14 आउटलेट्स नदी में खुलते हैं, जिनके माध्यम से 178.5 एमएलडी पानी नदी में छोड़ा जाता है, जिससे नदी में गंदगी फैलती है। महानगर पालिका ने इनमें से अधिकांश आउटलेट्स बंद करवा दिये हैं। इसके अलावा नदी में लोग भी सूखा कचरा फेंककर गंदगी फैलाते हैं। उन्होंने बताया कि नदी में छोड़े जाने वाले गटर के पानी को 12 बकनली रखकर चार बड़े पंपों की मदद से नदी का डेड स्टोरेज खाली किया जा रहा है। यह पानी पंपिंग स्टेशन में डायवर्ट किया जाता है।

दूसरे चरण में नदी में आने वाला गटर का पानी बंद किया जा रहा है। रिवरफ्रंट के 22 आउटलेट्स से 5 और पश्चिम के 23 में से 6 आउटलेट्स से 21.50 एमएलडी गंदा पानी नदी में जाने से रोककर पंपिंग स्टेशन में डायवर्ट करने की कार्यवाही की गई है। पॉइंट वार समीक्षा की गई है कि कहाँ से कितना पानी नदी में आता है। उसे कहाँ डायवर्ट किया जा सकता है। अभी भी नदी में 2 प्रतिशत गंदा पानी आ रहा है, जिसे अगले 15 दिन में बंद किया जाएगा। अगले 20 वर्ष तक नदी में गंदा पानी न छोड़ा जाए, इस प्रकार का आयोजन किया गया है। इसके लिये 500 करोड़ रुपये खर्च करके सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाएँगे। इनमें ट्रीट करने के बाद ही पानी नदी में छोड़ा जाएगा। नदी में गटर का पानी न छोड़ा जाए, इसके लिये ड्रेनेज विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी। एसटीपी प्लांट भी नियमानुसार संचालित हो रहे हैं या नहीं, इसकी जिम्मेदारी भी ड्रेनेज विभाग की रहेगी। जबकि लोगों को नदी में कचरा फेंकने से रोकने की जिम्मेदारी सोलिड वेस्ट विभाग की रहेगी और नदी में गिरनेवाला 2 प्रतिशत कचरा साफ करने की जिम्मेदारी रिवरफ्रंट कंपनी की रहेगी।

विजय नेहरा के अनुसार तीसरे चरण में नदी में पड़ा प्लास्टिक, काई सहित कचरा साफ किया जाता है। सफाई एक-दो दिन का काम नहीं है। छह महीने से आयोजन किया जा रहा है। पहले सर्वे किया गया कि नदी में गंदगी कैसे होती है। नदी की सफाई का काम केवल दिखावा बनकर न रह जाए, इसलिये इस महाभियान में जनभागीदारी की जा रही है। शहर की सड़कों की तरह ही नदी की सफाई प्रति दिन की दिन चर्या बनाई जाएगी। ताकि नदी की हालत खारीकट केनाल जैसी न हो।

नदी में लोगों को कचरा फेंकने से रोकने के लिये कड़ी मोनिटरिंग की जाएगी। नदी में प्लास्टिक व अन्य सूखा कचरा फेंकने वाले लोगों को आइडेन्टिफाई करने के लिये सिक्युरिटी और सीसीटीवी कैमरे लगाये जाएंगे। आइडेंटिफाई किये जाने वाले लोगों से सामान्य नहीं परंतु दंड के रूप में बड़ी रकम वसूल की जाएगी।

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