VIDEO : चंद्रयान 2 की उल्टी गिनती, ‘ऐसा’ करने वाला पहला देश बन कर इतिहास रचेगा भारत !

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 8 जुलाई, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। भारत के अत्यंत महत्वाकांक्षी मून मिशन की उल्टी गिनती आरंभ हो गई है। अब इसके प्रक्षेपण के बीच कुछ घण्टे शेष रह गए हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चंद्रयान 2 को आगामी 15 जुलाई को प्रक्षेपित करने वाला है और पहली बार इसरो ने प्रक्षेपण से ठीक एक सप्ताह पहले फोटो और वीडियो जारी किए हैं। भारत अंतरिक्ष में चंद्रयान 2 भेजने वाला है, इसे लेकर तो देश में चहुँओर और पूरे विश्व में चर्चा है, परंतु आपको जान कर आश्चर्य होगा कि चंद्रयान 2 के माध्यम से भारत और इसरो अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने वाले हैं।

चंद्रयान 2 के माध्यम से भारत चंद्र की सतह पर पहुँचने वाला तो विश्व का चौथा देश बन ही जाएगा, साथ ही भारत चंद्र के दक्षिणी ध्रुव पर उपस्थिति दर्ज करने वाला विश्व का पहला देश बनेगा। इसरो के मिशन मून 2 के तहत चंद्रयान 2 चंद्र के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद 2 क्रेटर मैंजिनस सी और सिम्पेलिनस एन के बीच मौजूद मैदानी क्षेत्र में उतरेगा। अभी तक इस इलाके में किसी भी देश ने अपना चंद्र मिशन नहीं किया है। भारत ने चंद्रयान 2 को चंद्र के दक्षिण ध्रुव पर उतारने का इसलिए निर्णय किया है, क्योंकि वहाँ अधिकांशत: अंधकार है और इसी कारण वहाँ पानी होने की संभावना अधिक है। चंद्र के दक्षिणी ध्रुव के क्रेटर अत्यंत ठंडे हैं। वहाँ सोलर सिस्टम के पुराने जीवश्म मिलने की भी संभावना है।

इस बीच इसरो ने चंद्रयान 2 के लॉञ्चिंग की तैयारियाँ जोरों से आरंभ कर दी हैं। चंद्रयान 2 आगामी 15 जुलाई सोमवार को लॉञ्च होने वाला है। लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत वाले इस मिशन के तहत चंद्रयान 2 को GSLV MK-3 रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा। इस स्पेसक्राफ्ट का वज़न 3800 किलो है, जिसमें 2 मॉड्यूल ऑर्बिटर, लैण्डर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) होंगे। इसके लिए आगामी 14 जुलाई रविवार को आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र (SDSC) के लॉञ्च पैड पर जीएसएलवी मार्क-3 को स्थापित किया जाएगा।

इसरो के अध्यक्ष डॉ. के. सिवान ने हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) के सातवें दीक्षांत समारोह में कहा,‘चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है, जिसे आगामी रविवार को लॉन्च पैड पर ले जाया जाएगा। मिशन की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशनल तैयारियों की जांच 13 जुलाई को की जाएगी। चंद्रयान-2 के जरिए इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जा रहा है जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है। अगर हम उस जोखिम को लेते हैं तो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ होगा। जोखिम और लाभ जुड़े हुए हैं।’ चंद्रयान छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव के पास लैंड करेगा। ऐसा होते ही भारत चांद की सतह पर लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

आप भी देखिए चंद्रयान 2 की तैयारियों से संबंधित इसरो की ओर से जारी किया गया VIDEO :

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