हर किसान जरूर देखे यह VIDEO : बरसात हो खूब-खेत जाए डूब, फिर भी बच जाएगी फसल, बोनस में बढ़ेगा भूजल !

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। बारिश का मौसम है और आधे भारत में बाढ़ के हालात हैं। देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बाढ़ का कहर लगातार जारी है। बिहार और आसाम में बाढ़ की स्थिति ने भयंकर रूप धारण किया हुआ है। आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ से मृत्यु के आँकड़े भी जारी किये हैं। बिहार में अभी तक 78 लोगों की तथा आसाम में मरने वालों में संख्या 39 तक पहुँच चुकी है। नेपाल में हो रही भारी बारिश से देश का उत्तर-पूर्वी हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया है। नेपाल से सटे बिहार के 18 जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं। इनमें भी 12 जिलों के लगभग 5.5 मिलियन लोग बुरी तरह से प्रभावित हैं। आसाम के 28 जिले और इनकी 5.4 मिलियन आबादी बाढ़ से प्रभावित है। मेघालय में भी मरने वालों की संख्या 8 हो गई है और यहाँ 1.55 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। जबकि पूरे देश की कुल लगभग 10 मिलियन आबादी बाढ़ का प्रकोप झेल रही है। दक्षिण के केरल राज्य में भी बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। घग्गर नदी का बांध टूटने पंजाब के संगरूर जिले में सेना को राहत-बचाव के काम के लिये बुलाया गया है। 2000 एकड़ कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूब चुकी है।

एक तरफ बाढ़ का कहर, दूसरी तरफ पानी की किल्लत

बाढ़ के यह हालात हर साल उत्पन्न होते हैं। बाढ़ के कारण विभिन्न राज्यों में लाखों एकड़ कृषि भूमि में फसलें बरबाद होती हैं। एक तरफ बरसाती मौसम में बरसाती पानी कहर बरपाता है, तो दूसरी तरफ साल के बाकी दिनों में देश की पूरी आबादी पीने के पानी की किल्लत का सामना करती है। भूजल का स्तर भी लगातार गिरता जा रहा है। राजस्थान सहित कई राज्यों में तो हालात ऐसे हैं कि जहाँ कुँए सूख चुके हैं और सैकड़ों फीट नीचे तक बोरिंग करने पर भी पानी नहीं मिलता है। ऐसे में भूजल स्तर को ऊँचा लाने के लिये वॉटर हार्वेस्टिंग पर जोर देने की आवश्यकता है। इस पर ध्यान दिया भी जा रहा है। परंतु इस दिशा में और व्यापक जनजागृति की आवश्यकता है। सरकारी स्तर पर व्यापक काम करने के साथ-साथ आम जन को भी इसमें भागीदारी करनी पड़ेगी, तभी बरसाती पानी का सदुपयोग हो संभव हो पाएगा और बाढ़ या निचले भागों में स्थित खेतों में बरसात के दौरान जो पानी भर जाता है, उसका सही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

हरियाणा के किसान की अनूठी पहल

हरियाणा के करनाल जिले में नरेन्द्र कुमार नामक एक किसान ने प्रेरणादायी कदम उठाया है। इस किसान ने उसके निचले भाग में स्थित कई एकड़ जमीन में भर जाने वाले बरसाती पानी को निकालने का ऐसा नायाब तरीका ढूँढ निकाला है, जिससे अब खेत बरसाती पानी से डूब भी जाएँ तो भी उसकी फसल बरबाद नहीं होगी और वह आसानी से अपने खेतों से पानी निकालकर अपनी फसलों को बचा लेता है। दरअसल इस किसान ने अपने खेत में वॉटर हार्वेस्टिंग के लिये बोरिंग करवाई है। इस बोरिंग के माध्यम से वह अपने खेतों का सारा बरसाती पानी जमीन में उतार देता है, इससे लाखों लीटर पानी जमीन में उतरता है, जिससे भूजल स्तर को ऊँचा लाने में भी मदद मिलती है और खेतों में खड़ी फसलों को भी नुकसान नहीं होता है।

किसानों और सरकारों को लेनी चाहिये प्रेरणा

इस किसान की यह पहल अन्य किसानों तथा सरकारों के लिये भी मिसाल है। इस किसान ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में शेयर किया है ताकि अन्य किसान इस वीडियो को देखकर उससे प्रेरणा ले सकें। उसने किसानों से जिनके खेत निचले हिस्सों में स्थित हैं और जिनमें बरसात के दौरान पानी भर जाने से फसलों को नुकसान होता है, ऐसे किसानों को उनके खेतों में वॉटर हार्वेस्टिंग के लिये बोर बनाने की अपील की है। इस किसान ने राज्य तथा केन्द्र सरकार से भी अनुरोध किया है कि वह देश के विविध हिस्सों में इस तरह का तरीका अपनाकर बरसाती पानी को जमीन में उतारने की ऐसी योजना लागू करे जिससे अन्य किसान भी अपने खेतों में ऐसे बोर बनाने के लिये प्रेरित हों।

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