जो साहस इमरान न कर सके, वो दुस्साहस भारत में मौजूद पाकिस्तानी पिट्ठुओं ने कर दिखाया : धिक्कार है ऐसे नेताओं पर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान पाटण की चुनाव सभा में गर्जना की थी कि पाकिस्तान यह समझ ले कि भारत ने अपने परमाणु बम दीवाली पर फोड़ने के लिए नहीं रखे हैं। मोदी ने ये भी कहा था कि यदि पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के एयर विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को न छोड़ा होता, तो उसके लिए वह रात कत्ल की रात बन जाती।

पाकिस्तान को चेतावनी देने वाले मोदी के इस वक्तव्य पर स्वाभाविक रूप से पाकिस्तान से यह प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी कि पाकिस्तान ने भी परमाणु बम ईद पर फोड़ने के लिए नहीं रखे हैं, परंतु न पाकिस्तान सरकार और न ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने मोदी के वक्तव्य पर ऐसा कोई उत्तेजक बयान दिया, परंतु भारत में पाकिस्तान के पिट्ठुओं की कहाँ कमी है ? जो पंक्ति पाकिस्तान सरकार और इमरान ने बोलने का साहस नहीं किया, वह पंक्ति बोलने का दुस्साहस भारत में रह कर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले नेताओं ने कर दिया। धिक्कार है ऐसे कश्मीरी नेताओं पर, जो भारत में रह कर पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं।

पाकिस्तान सिर्फ इतना ही साहस जुटा पाया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परमाणु बम वाले वक्तव्य पर पाकिस्तान ने केवल आपत्ति जताते हुए उनके वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि इस तरह के वक्तव्य नहीं दिए जाने चाहिए। पाकिस्तानी विदेश विभाग ने एक वक्तव्य जारी कर कहा, ‘यह भारतीय अधिकारियों के रुख के पूरी तरह विपरीत है, जिन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि भारत की इस तरह की कोई योजना नहीं थी और पाकिस्तान पर युद्धोनान्माद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था।’

परंतु पाकिस्तानी पिट्ठुओं से सहा नहीं गया

पाकिस्तान ने तो संक्षेप में आपत्ति ही जताई। प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी मोदी के वक्तव्य पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, परंतु भारत में रह कर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले पाकिस्तानी पिट्ठुओं से मोदी की बात सहन नहीं हुई। सबसे पहले कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डैमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने पीएम मोदी के वक्तव्य पर ऐसे प्रतिक्रिया दी, जैसे वह पाकिस्तान की प्रवक्ता हों। महबूबा ने कहा, ‘एटम बम ईद के लिये तो उन्होंने (पाकिस्तान ने) भी नहीं रखे हैं।’ जब महबूबा बोलीं, तो कश्मीर में उनके राजनीतिक विरोधी, परंतु पाकिस्तान की ही भाषा बोलने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला कैसे पीछे रह जाते ? उन्होंने तो मोदी और महबूबा दोनों को लपेटे में ले लिया। उमर ने ट्वीट कहा, ‘चाहे दीपावली हो या ईद, पीय़एम मोदी और मिस मुफ्ती दोनों ने परमाणु हमले की बात को ऐसे इस्तेमाल किया है, जैसे य.ह पबजी जैसा कोई गेम हो, जिसमें वे रिसेट बटन दबाएँगे और जिंदगी फिर से चल पड़ेगी।’

धिक्कार है ऐसे नेताओं पर

हमारे देश की यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के नाम पर कुछ लोग न सिर्फ देश विरोधी, शासन विरोधी और धर्म विरोधी बयानबाजी करते हैं, बल्कि नारेबाजी भी करते हैं और पड़ोसी देश के ध्वज ही नहीं आईएसआईएस जैसे आतंकी गुटों तक के ध्वज लहराते हैं। फांसी पर लटकाये गये आतंकवादियों और देश द्रोहियों की शवयात्रा में शामिल होते हैं। पवित्र कहलाने वाली शैक्षणिक संस्थाओं के परिसरों में आतंकवादियों के पक्ष में शोकसभाएँ होती है और उनके पक्ष में नारे लगाये जाते हैं और हमारी सरकारें तथा न्याय तंत्र यह सब खुली आंखों से देखकर भी मूक-दर्शक बन कर बैठे रहते हैं। क्या कोई महबूबा मुफ्ती से यह सवाल पूछ सकता है कि पीएम के वक्तव्य पर पाकिस्तान की बजाय उन्होंने प्रतिक्रिया क्यों दी। पीएम ने तो पाकिस्तान के लिये बोला, महबूबा मुफ्ती को प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता क्यों पड़ी ? क्या उनसे नहीं पूछना चाहिये कि वह भारतीय कश्मीर की जनता की प्रतिनिधि हैं या पाकिस्तान की प्रतिनिधि हैं ? सवाल यह भी गंभीर है कि भारत में ही रहकर पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले, पाकिस्तान-परस्ती के बार-बार प्रमाण देने वाले पाकिस्तानी पिट्ठुओं को जवाब कौन और कब देगा ?

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