निर्भया से लेकर प्रियंका तक : क्यों मौन खड़ी सरकार रही… भारत की बेटी पुकार रही…

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 1 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। देश में जब भी कोई बलात्कार और हत्या (RAPE AND MURDER) की दुर्दांत, क्रूर, बर्बर और विकृत घटना घटित होती है, तब-तब सबसे पहले देश के कानून को ही कठघरे में खड़ा होना पड़ता है। लोग ऐसे वहशी दरिंदों के लिये तत्काल और भयंकर सजा के लिये सख्त कानून की माँग करते हैं। दिल्ली में निर्भया कांड के बाद मध्य प्रदेश में मासूम बच्ची की रेप के बाद हत्या, इसके बाद कठुआ, उन्नाव और अब हैदराबाद में एक पशु चिकित्सक (VETERINARY DOCTOR) प्रियंका रेड्डी की बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे देश में एक बार फिर गुस्से को चरम पर पहुँचा दिया है। बलात्कारियों को सरे आम फांसी देने की माँग बुलंद हो रही है। कुछ इस्लामिक देशों में ऐसे घिनौने अपराधों के लिये शरिया जैसे कड़े कानून हैं, जहाँ सिर्फ प्राथमिक जांच में बलात्कार और हत्या का दोष सिद्ध होने पर आरोपियों के विरुद्ध कोई सुनवाई नहीं की जाती है और सीधे-सीधे उन्हें सज़ा सुना दी जाती है। कहीं 24 घण्टे के भीतर तो कहीं एक सप्ताह के भीतर ही ‘किल एंड डेथ (KILL AND DEATH)’ की सजा पर अमल कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, कुछ देशों में बलात्कार के आरोपियों को सजा से पहले ऐसी पीड़ा से भी गुजरना पड़ता है जिसे सुन कर रूह काँप उठती है।

भारत जैसे देश में जहाँ ‘नारी तू नारायणी’ की संज्ञा दी जाती है, कन्याओं को जहाँ पूज्यनीय माना जाता है। माताओं को ईश्वर का दर्जा दिया जाता है। उस देश में ऐसी विकृत मानसिकताओं के लिये कोई स्थान नहीं होना चाहिये और इसके लिये न केवल सरकारों को सख्त से सख्त कानून बनाकर अपराधियों पर शिकंजा कसना होगा, बल्कि सरकार को कोसने वाले, नारेबाजी करने वाले, जुलूस निकालने वाले या मोमबत्तियाँ जलाकर आक्रोश व्यक्त करने वाले समाज को भी बेटियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी होगी। ‘हमें क्या’ की हीन और तुच्छ मानसिकता से बाहर निकल कर अपने आसपास होने वाली हर संदिग्ध हरकत पर नज़र रखनी होगी। बेटियों को भी मजबूत बनाना होगा। चप्पे-चप्पे पर निगरानी के उपाय करने होंगे, ताकि कोई जगह सुनसान भले ही हो, परंतु नज़र से बाहर नहीं होनी चाहिये। अकेलेपन का फायदा उठा कर मासूम लड़कियों पर हमला वर हो जाने वाले पशु समान हैवानों को किसी प्रकार का कोई मौका न मिले, ऐसे सुरक्षा प्रबंध करने होंगे। युवाPRESS की ओर से भी समाज से तथा बेटियों से यही अनुरोध किया जा रहा है। युवाप्रेस के मुख्य संपादक आई. के. शर्मा ने एक जोशीली कविता के माध्यम से अपना संदेश लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।

ऐ भारत की बेटी अब मज़बूत बनो,
खुदको करो बुलंद, सैनिक तरह तैयार रहो
रानी झांसी बनकर दुश्मन के सीने में शूल बनो
पहचानो दरिंदोंके नापाक इरादों को,
गुलाब भी रखता रक्षा केलिए कांटों को
वक़्त पड़े तो दुर्गा बन त्रिशूल धरो
ऐ भारत की बेटी अब मज़बूत बनो

जागो भारत जागो तुम
भारत की बेटी पुकार रही
दरिंदो को जला दो चौराहे पे
प्रियंका की रूह कर चीत्कार रही
कितनी को बलि चढ़ाओगे
कब सख्त कानून बनाओगे
क्यों मौन खड़ी सरकार रही
भारत की बेटी पुकार रही….

इन देशों में बलात्कारियों के लिये हैं कड़े कानून

उत्तर कोरिया (NORTH KOREA) : उत्तर कोरिया में अपराधियों के प्रति कोई दया भाव या सहानुभूति नहीं बरती जाती है। इस देश में बलात्कार के दोषियों के लिये एक ही सजा मुकर्रर है और वह है मौत की सजा। इस देश में बलात्कारी के सिर में सरे आम गोलियाँ दाग दी जाती हैं और उसे मौत के घाट उतार दिया जाता है।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) : संयुक्त अरब अमीरात यानी यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) में भी बलात्कार के आरोपी को सीधे-सीधे मौत की सजा सुनाई जाती है। यहाँ के कानून के अनुसार सेक्स से जुड़े अपराध में सात दिन के भीतर ही दोषी को फाँसी की सजा दे दी जाती है।

सऊदी अरब (SAUDI ARAB) : सऊदी अरब में सख्त इस्लामिक कानून शरिया लागू है। यहाँ तो किसी भी घिनौने अपराध के लिये मौत की सजा ही लागू होती है। इसमें भी यदि कोई अपराधी बलात्कार का दोषी पाया जाता है तो उसे उसके अपराध के हिसाब से फाँसी देने, उसका सिर कलम करने के साथ-साथ उसके जननांग काटने तक की सख्त सजा सुनाई जाती है। यहाँ जज भी शरिया कानून के अनुसार ही सजा सुनाते हैं। हालाँकि यहाँ पीड़िता पर भी अकेले जाने या रात में अकेले निकलने को लेकर न केवल सवाल उठाए जाते हैं, बल्कि उसे भी सजा दी जाती है। 2007 में ऐसे ही एक मामले में पीड़िता को भी गलती करने पर कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी। इस ख़बर ने काफी सुर्खियाँ बटोरी थी।

ईराक (IRAQ) : ईराक में भी बलात्कारियों के लिये मौत की सजा का ही प्रावधान है। हालाँकि सजा देने का तरीका थोड़ा अलग है। यहाँ बलात्कारी को तब तक पत्थर मारे जाते हैं, जब तक कि वह मर न जाए। यहाँ बलात्कार जैसे घिनौने अपराध करने वालों को मौत की सजा भी आसान नहीं दी जाती है, बल्कि अपराधी को शारीरिक और मानसिक पीड़ा तथा यातनाओं से भी गुजरना पड़ता है।

पोलैंड (POLAND) : पोलैंड में बलात्कार के दोषियों को विचित्र ढंग से सजा दी जाती है। यहाँ अपराधी को सुअरों से कटवाया जाता है। अब इस देश के कानून में नया संशोधन भी किया गया है, जिसके अनुसार अपराधी को नपुंसक बना दिया जाता है।

इंडोनेशिया (INDONESIA) : इंडोनेशिया में बलात्कार करने वाले अपराधियों को और भी सख्त यातना दी जाती है। यहाँ बलात्कार के दोषी को नपुंसक बनाने के साथ ही उसके शरीर में महिलाओं के होर्मोन्स ट्रांसप्लांट (HORMONES TRANSPLANT) कर दिये जाते हैं।

चीन (CHINA) : चीन भी ऐसे ही देशों की श्रेणी में शामिल है, जहाँ बलात्कार के मामलों में कोई सुनवाई नहीं की जाती है और प्राथमिक जाँच में ही आरोप सिद्ध होने पर दोषी व्यक्ति को सीधे-सीधे मौत की सजा दे दी जाती है। हालाँकि कई मामलों में यह तथ्य भी उभर कर सामने आया कि जिसे प्राथमिक जाँच में मिले प्रमाणों के आधार पर दोषी करार दिया गया और मौत के घाट उतार दिया गया, वह वास्तव में अपराधी था ही नहीं।

इन देशों में लचर है कानून व्यवस्था

क्वालिटी नाउ (QUALITY NOW) नामक अंतर्राष्ट्रीय संस्था की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार बलात्कार के मामलों में सजा को लेकर घाना, भारत, जॉर्डन, लिसोथो, नाइज़ीरिया, ओमान, सिंगापोर, श्रीलंका और तंजानिया में पति द्वारा पत्नी के साथ किये गये बलात्कार को बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। ऐसे मामलों के लिये इन देशों में कोई ठोस कानून भी नहीं हैं।

बहरीन, ईराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, फिलीस्तीन, फिलीपींस, तजाकिस्तान और ट्यूनीशिया में यदि आरोपी पीड़िता से शादी कर ले तो सजा से बच सकता है। ग्रीस, सर्बिया, रूस और थाइलैंड में सेक्स की सहमति और असहमति के लिये लड़की की उम्र देखी जाती है। यदि उम्र कम है तो यह माना जाता है कि उसके साथ बलात्कार नहीं हो सकता।

बेल्जियम, क्रोएशिया, ईराक, जॉर्डन, कजाकिस्तान, लेबनान, फिलीस्तीन, नाइज़ीरिया, रोमानिया, रूस, सिंगापोर और थाइलैंड में पीड़ित या पीड़ित के परिवार से समझौता कर लेने से भी आरोपी सजा से बच सकते हैं। भारत में भी इसी प्रकार आपस में समझौते करके अनेक मामलों को दबा दिया जाता है। 15 देश ऐसे हैं, जिनमें बेल्जियम, नीदरलैंड, लग्ज़मबर्ग, जॉर्डन, नाइज़ीरिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और यमन शामिल हैं। इन देशों में बलात्कार के मामले हिंसा की तुलना में नैतिकता से जोड़ दिया जाता है। इस लिस्ट में भारत को भी शामिल किया जा सकता है, जहाँ आरोपी से पहले पीड़िता को ही कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है और उसके ऊपर ही पहले अँगुलियाँ उठाई जाती हैं।

उपरोक्त देशों के नाम सुनने के बाद यदि आपको लगता है कि इस मामले में यूरोपीय देशों की स्थिति बेहतर है तो आप गलत हैं। स्पेन और लग्ज़मबर्ग में भी इतनी कानूनी पेचीदगियाँ हैं कि खुद शिकायतकर्ता ही उनमें उलझकर रह जाता है। फ्रांस में बलात्कार की परिभाषा काफी वृहद है और इसके लिये अधिक से अधिक 15 साल की सजा का प्रावधान है। यहाँ भी रजामंदी से हुए संबंधों को लेकर उम्र 15 साल तय की गई है। पीड़ितों के वकीलों को यह साबित करना होता है कि पीड़िता के साथ जो हुआ है, उसमें उसकी सहमति नहीं थी। अब कानून में नया बदलाव किया गया है, जिसके अनुसार वयस्क आरोपी को ही यह साबित करना होगा कि वह बेकसूर है। 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ बनाया गया संबंध ही बलात्कार या जबरदस्ती की श्रेणी में माना जाता है।

नॉर्वे में बलात्कार के मामलों को काफी संवेदनशीलता के साथ देखा जाता है और हर जिले में एक ऐसा अधिकारी नियुक्त किया जाता है जो घरेलू हिंसा और यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने में सक्षम होता है। पुलिस के हस्तक्षेप के बिना ही पीड़ित या पीड़िता की मेडिकल जाँच से लेकर उपचार तथा फोरेंसिक जाँच की जाती है। अमेरिका, रूस व इज़राइल में भी बलात्कार के आरोपी के लिये 5 से 20 साल की सजा या उम्र कैद का प्रावधान है।

दुनिया भर में 36 प्रतिशत महिलाएँ शारीरिक हिंसा की शिकार

पूरे विश्व की बात की जाए तो दुनिया भर में लगभग 36 प्रतिशत महिलाएँ शारीरिक या यौन हिंसा की शिकार हो रही हैं। इस मामले में अमेरिका, केनेडा, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे सर्वाधिक विकसित देशों की हालत सबसे खराब है। अमेरिका में 12 से 16 वर्ष तक की 83 प्रतिशत लड़कियाँ किसी न किसी रूप में यौन उत्पीड़न की शिकार पाई गई हैं। इंग्लैंड में भी हर 5 में से एक महिला किसी न किसी रूप में यौन हिंसा की शिकार पाई गई है। दक्षिण अफ्रीका तो दुनिया भर में टॉप पर है। यहाँ हर दिन औसत 1,400 रेप की घटनाएँ घटित होती हैं। इनमें लगभग 20 प्रतिशत घटनाओं में पुरुष भी शिकार बनते हैं। 40 प्रतिशत महिलाएँ कम से कम एक बार रेप का शिकार होती हैं। अफ्रीकी मेडिकल रिसर्च कौंसिल के अनुमान के अनुसार हर 9 में से एक महिला रेप की रिपोर्ट दर्ज करवाती है। 4 प्रतिशत पुरुष भी यौन हिंसा के शिकार हैं। इसके अलावा 41 प्रतिशत बच्चे भी बलात्कार के शिकार होते हैं। इनमें से 15 प्रतिशत बच्चे 11 साल से भी कम उम्र के होते हैं।

स्वीडन दूसरा ऐसा देश है, जहाँ बलात्कार के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। यहाँ हर 4 में से 1 महिला बलात्कार की शिकार पाई जाती है। स्वीडन पुलिस ने 1975 में 421 रेप के मामले दर्ज किये थे, जो 2014 में बढ़ कर 6,620 हो गई। यानी बलात्कार की घटनाओं में 1472 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरे शब्दों में कहें तो स्वीडन महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से सबसे खतरनाक देश है।

अमेरिका में लगभग 19.3 प्रतिशत महिलाएँ और 2 प्रतिशत पुरुष अपने जीवन में कम से कम एक बार बलात्कार के शिकार हुए हैं। यहाँ हर डेढ़ मिनट में यौन हिंसा की एक घटना घटित होती है। इस प्रकार हर 3 में से 1 महिला कम से कम एक बार यौन हिंसा की शिकार होती है। यूएस टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 79 प्रतिशत नागरिक 25 साल की उम्र से पहले ही बलात्कार के शिकार हो चुके हैं।

भारत में हर 20 मिनट में एक बलात्कार

भारत की बात की जाए तो एक सर्वे के अनुसार देश में हर 20 मिनट में बलात्कार की एक घटना घटित होती है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार देश में हर दिन कम से कम 106 घटनाएँ दर्ज होती हैं।

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