अगर ऐसा हुआ, तो सुस्तानी को भारी पड़ जाएगी दिग्गी की सुस्ती ! जानिए कैसे ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण में 12 मई को मध्य प्रदेश की जिन 8 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ, उनमें सर्वाधिक चर्चित गुना और भोपाल लोकसभा सीटें थीं, क्योंकि गुना से कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया, जबकि भोपाल से पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह तथा भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर चुनाव मैदान में थीं, परंतु लोकतंत्र में एक-एक वोट कीमती होता है और यही कारण है कि हमारे देश में कई ऐसे उदाहरण हैं, जब किसी प्रत्याशी को एक वोट के कारण चुनाव हार जाना पड़ा और वह बड़े पद से हाथ धो बैठा। हम यहाँ मध्य प्रदेश की हॉट सीटों के बारे में बात नहीं करने जा रहे। हम बात करने जा रहे हैं राजगढ़ लोकसभा सीट की, जहाँ रविवार को 74.32 प्रतिशत भारी मतदान हुआ, जो 2014 के 63.38 प्रतिशत से लगभग 11 प्रतिशत अधिक है।

राजगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी और भाजपा सांसद प्रत्याशी रोडमल नागर। (फाइल चित्र)

राजगढ़ लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला निवर्तमान भापजपा सांसद रोडमल नागर और कांग्रेस उम्मीदवार मोना सुस्तानी उर्फ मोना ‘धाकड़’ के बीच है, परंतु आश्चर्य की बात यह है कि इस सीट पर रोडमल-मोना सहित कुल 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें समता समाधान पार्टी के ठाकुर जगदीश सिंह परमार, अंबेडकर पार्टी ऑफ इंडिया के पर्वत सिंह, शिवसेना के मुकेश डांगी, भारतीय अमृत पार्टी के सुशील प्रसाद, सपाक्स पार्टी के संजय गुप्ता और निर्दलीय इमामुद्दीन खान, पंडित दिव्येन्द्र दुबे, मोहसिन भनेज तथा संतोष राव शामिल हैं।

दिग्वजय सिंह नहीं डाल पाए वोट

मध्य प्रदेश में रविवार को 8 लोकसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, जिसमें दिग्विजय सिंह को भी मतदान करना था। वे उम्मीदवार तो भोपाल से थे, परंतु उनका मतदान केन्द्र राजगढ़ लोकसभा सीट में पड़ता है। भोपाल में अपने पक्ष में वोट करवाने के लिए कई हफ्तों से जुटे दिग्विजय सिंह मतदान वाले दिन भी इतने व्यस्त रहे कि भोपाल से राजगढ़ पहुँच ही नहीं पाए। इस कारण दिग्विजय इस महत्वपूर्ण लोकसभा चुनाव 2019 में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिग्गी को टक्कर दे रहीं प्रज्ञा ने भी वोट नहीं करने को लेकर दिग्विजय सिंह की आलोचना की। दूसरी तरफ दिग्विजय ने वोट नहीं डाल पाने पर माफी मांग ली और कहा कि अगली बार वे अपना नाम भोपाल की मतदाता सूची में दर्ज करवा लेंगे।

कहीं सुस्तानी को भारी न पड़ जाए दिग्विजय की सुस्ती ?

दिग्विजय की उपस्थिति में राजगढ़ से पर्चा भरते हुए मोना सुस्तानी। (फाइल तसवीर)

राजगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला काफी दिलचस्प है। वैसे राजगढ़ में 1980 से 2014 तक सांसद परिवर्तन की लहर कई बार दौड़ी है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा के रोडमल नागर ने मोदी लहर में 2 लाख 28 हजार 737 मतों से जीत कर राजगढ़ सीट कांग्रेस से छीन ली थी। दिग्विजय की सुस्ती मोना सुस्तानी पर तब भारी पड़ सकती है, यदि मोना 1 वोट से यह चुनाव हार जाएँ। इसकी संभावना से इनकार इसलिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि चुनावों में अक्सर ऐसा होता है। दूसरा कारण यह भी है कि 2014 के बाद दिसम्बर-2018 में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल हुई। इसके चलते राजगढ़ में भी कांग्रेस का जनाधार बढ़ा ही होगा। साथ ही 2019 में सतही तौर पर कोई मोदी लहर भी नहीं थी। ऐसे में भी कांग्रेस के यह सीट जीतने की संभावना बढ़ जाती है। इन सब तथ्यों को देखते हुए यदि मुकाबला अत्यंत नजदीकी हो जाए और 1 वोट हार-जीत का कारण बने, तो निश्चित रूप से दिग्विजय सिंह को वोट न कर पाने का बहुत अफसोस होगा और साथ ही कांग्रेस पार्टी को एक सीट गँवाने कर दिग्गी की सुस्ती की कीमत चुकानी पड़ेगी।

कौन हैं मोना सुस्तानी

अब आपको ये भी बता देते हैं कि राजगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी कौन हैं। मोना सुस्तानी दिग्विजय समर्थक और कांग्रेस नेता की बहू हैं। राजगढ़ के चुनावी इतिहास में वे पहली महिला प्रत्याशी बनी हैं। कार्यकारी जिला कांग्रेस अध्यक्ष मोना तीन बार से जिला पंचायत सदस्य हैं। जनपद सदस्य भी ह चुकी मोना कई सामाजिक संगठनों की सदस्य होने के साथ किरार धाकड़ समाज की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष, एमपी एग्रो अध्यक्ष और राजगढ़ से दो बार विधायक रहे गुलाम सिंह सुस्तानी की बहू मोना सुस्तानी दिग्विजय सिंह की परम्परागत सीट राजगढ़ से चुनाव मैदान में थीं। दिग्विजय 2 बार यहाँ से चुनाव जीत चुके हैं। मोना के पति भी जिला पंचायत सदस्य हैं। मोना दिग्विजय गुट की हैं और इसी कारण उन्हें यह सीट मिली थी।

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