‘मही’ को मिला ‘सागर’ : जन्म के साथ माँ ने दिया छोड़, लेकिन पिता पर नहीं बनी बोझ, ACJM-DDO ने सीने से लगाया !

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 18 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। गुजरात के लोगों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि इनका जनरल नॉलेज (GENERAL KNOLDEGE) यानी GK बहुत कमज़ोर होता है। यही कारण है कि गुजरात में 6 करोड़ लोगों में से लाखों लोगों ने महीसागर या महिसागर शब्द सुना तो होगा, परंतु उसके बारे में अधिक जानकारी नहीं होगी। महीसागर या महिसागर शब्द गुजरात में अक्सर नवरात्रि महोत्सव में गाए जाने वाले गरबा गीतों में सुनाई देने को मिलता है, जिसमें एक गीत बहुत ही विख्यात है, ‘मारी महिसागरना आरे ढोल वागे छे…’।

परंतु आज हम आपको महीसागर और उसके साथ जुड़े एक नए इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। महीसागर नदी का नाम है। वैसे इसका मूल नाम मही है। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित मिंडा गाँव से निकलने वाली मही नदी राजस्थान के वागड क्षेत्र से होते हुए गुजरात में प्रवेश करती है और वडोदरा, महीसागर तथा आणंद जिलों से गुज़र कर खंभात की खाड़ी में अरब सागर में मिल जाती है। मही नदी को महीसागर नदी भी कहा जाता है, क्योंकि इसका तट सागर की तरह विराट है।

अब बात करते हैं मही नदी के साथ नए जुड़े इतिहास की। लगभग एक पखवाड़ा पहले आणंद जिले में वासद स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) में एक बच्ची का जन्म हुआ। बच्ची को जन्म देने के बाद माँ की मौत हो गई। बच्ची के पिता के पहले ही दो पुत्रियाँ थीं। ग़रीब पिता उलझन में पड़ गया कि पत्नी के बिना वह नवजात पुत्री का लालन-पालन कैसे करेगा ? उधर गुजरात सरकार के नियम के अनुसार किसी भी महिला की प्रसूति के दौरान मृत्यु होने पर उसकी जानकारी जिला विकास अधिकारी को करनी होती है। आणंद जिला विकास अधिकारी (DDO) अमित प्रकाश यादव को जब इस बच्ची की माँ की मौत की सूचना मिली और यह पता चला कि बच्ची के पिता बच्ची के लालन-पालन को लेकर असमंजस में हैं, तो उन्होंने तुरंत इस बच्ची को गोद लेने का मन बना लिया।

ACJM पत्नी के साथ पहुँचे DDO

आणंद डीडीओ अमित प्रकाश यादव की पत्नी चित्रा यादव अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM) हैं। यादव दम्पति के एक डेढ़ वर्षीय पुत्र धैवत है। इसके बावजूद इस सरकारी अधिकारी दम्पति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान में अपना छोटा-सा योगदान करने के उद्देश्य से वासद सीएचसी में जन्मी बच्ची को गोद लेने का निर्णय किया। अमित-चित्रा ने सबसे पहले सीएचसी में पड़ताल, परंतु नवजात बच्ची को स्तनपान करा सके, ऐसी कोई महिला सीएचसी में मौजूद नहीं थी। चूँकि चित्रा इसके लिए सक्षम थीं। चित्रा ने बच्ची के पिता और सीएचसी के चिकित्सकों की अनुमति ली और भूख से बिलख रही बच्ची को सीने से लगा कर स्तनपान कराया।

और सागर से मिल गई मही

डीडीओ अमित प्रकाश यादव और एसीजेएम चित्रा रत्नू यादव ने इस बच्ची को गोद ले लिया और आणंद जिले में बहने वाली मही नदी के नाम पर बच्ची का नाम मही रखा। यादव दम्पति ने बच्ची को गोद लेने के बाद कहा, ‘लक्ष्मी के रूप में हमारे घर आई बेटी को उच्च शिक्षा देकर श्रेष्ठ भारतीय नागरिक बनाएँगे।’ इसके साथ ही बच्ची को जहाँ एक ओर उत्तर भारतीय पिता अमित प्रकाश यादव, राजस्थानी माता चित्रा और डेढ़ वर्षीय भाई धैवत मिले, वहीं दूसरी ओर यादव दम्पति के जीवन में बेटी की कमी भी पूरी हो गई।

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