PM का ‘21 करोड़ी’ संदेश : जनसंख्या नियंत्रण देशभक्ति, ‘बोल दिया, तो निपटा भी देंगे मोदी’ !

* ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा #populationcontrollaw

* जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की पुरजोर मांग

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 15 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 73वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से किए गए अपने 92 मिनट के संबोधन में जहाँ देश की कई समस्याओं को उजागर किया, वहीं उनका हल भी बताया। मोदी ने इस संबोधन में भारत को वर्तमान में सर्वाधिक परेशान कर रहे तथा भविष्य में और अधिक विकराल रूप धारण करने वाले जनसंख्या विस्फोट रोकने का भी आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनसंख्या विस्फोट को लेकर जो बातें कहीं, वो सीधे-सीधे देश के उन 21 करोड़ लोगों के लिए थीं, जो धर्म का वास्ता देकर जनसंख्या नियंत्रण के उपायों से कन्नी काटते हैं, जबकि दुनिया के अनेक देशों में जहाँ जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू है, वहां इसी धर्म के लोग जनसंख्या नियंत्रण के उपाय करते हैं और खुशहाल जीवन जीते हैं। प्रधानमंत्री ने बहुत ही सीधे और सरल शब्दों में एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि परिवार को छोटा रखना भी बहुत बड़ी देशभक्ति है।

मोदी ने कहा कि तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर हमें आने वाली पीढ़ी के लिए सोचना होगा। सीमित परिवार से न केवल स्वयं का, अपितु देश का भी भला होने वाला है। जो सीमित परिवार के लाभों के बारे में समाज को समझा रहे हैं, उन्हें आज सम्मानित करने की आवश्यकता है। छोटा परिवार रखने वाले देशभक्त की तरह हैं। घर में किसी भी बच्चे के आने से पहले सोचना चाहिए कि क्या हम उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार हैं ? उसकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार हैं ?

प्रधानमंत्री ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे को दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर देखने की आवश्यकता है। यद्यपि मोदी ने दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश चीन की तरह भारत में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई कानून लाने का न तो उल्लेख किया और न ही कोई घोषणा की, परंतु जनसंख्या नियंत्रण को देशभक्ति के साथ जोड़ कर राष्ट्रभक्त देशवासियों की आत्मा को झकझोरने का अवश्य प्रयास किया।

उल्लेखनीय है कि भारत में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कोई कानून नहीं है, जबकि वह इस मामले में विश्व का दूसरा बड़ा देश है और 2050 तक तो भारत जनसंख्या के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ कर नंबर 1 पर आ जाएगा। चीन ने जहाँ जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कड़े कानून बना रखे हैं, वहीं भारत में जनसंख्या नियंत्रण राजनीतिक कारणों के चलते आज भी स्वैच्छिक बना हुआ है। देश और राज्यों में काम करने वाली सरकारें यह अच्छी तरह समझती हैं कि जनसंख्या विस्फोट एक बड़ी समस्या है, परंतु उसके उपाय करने की बात आती है, तो वोट बैंक सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।

ट्विटर पर छिड़ गई बहस

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनसंख्या विस्फोट पर सटीक संदेश देने के बाद ट्विटर पर #populationcontrollaw ट्रेंड करने लगा। अनेक देशवासियों ने प्रधानमंत्री की इस बात पर सहमति जताई। कुछ यूज़र्स ने तो जनसंख्या नियंत्रण के लिए कड़ा कानून बनाने की बात कही, तो कुछ लोग जनसंख्या नियंत्रण की तुलना देशभक्ति से करने पर प्रधानमंत्री की सराहना भी करते नज़र आए। ट्विटर पर कई यूज़र्स ने धर्म के नाम पर जनसंख्या नियंत्रण नहीं करने वालों के प्रति नाराज़गी जताई, तो कई यू़ज़र्स धर्म विशेष के लोगों को निशाना बनाते हुए विवादास्पद ट्वीट भी करते नज़र आए। यद्यपि कुल मिला कर देशवासियों का मत यही था कि जनसंख्या नियंत्रण का उत्तरदायित्व सामूहिक होना चाहिए और सामाजिक होना चाहिए। देश के हर नागरिक का यह कर्तव्य होना चाहिए कि वह जनसंख्या नियंत्रण में अपना योगदान करे, फिर वह किसी भी धर्म का हो। कुछ लोगों ने तो कड़ा कानून बना कर देश के हर नागरिक को जनसंख्या नियंत्रण के लिए बाध्य करने की वक़ालत की।

आप भी देखिए जनसंख्या नियंत्रण को लेकर ट्विटर पर कैसी बहस छिड़ी है ?

https://twitter.com/Raj46160285/status/1161853713918488576?s=20

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