कौन रोकना चाहता है राहुल पर अवमानना और मोदी की बायोपिक पर SC के फैसलों को ? किसकी ओर इशारा कर रहे हैं CJI गोगोई ?

जब से नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से उनके विरोधी एक-दो नहीं, अपितु सैंकड़ों बार आरोप लगा चुके हैं कि मोदी सरकार में संवैधानिक और न्यायिक संस्थानों का गला घोंटा गया है। सुप्रीम कोर्ट (SC) से लेकर चुनाव आयोग (EC) तक पर सवाल उठाने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, ममता बैनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, चंद्रबाबू नायडू सहित एक पूरी जमात है, जबकि आरोपों का दूसरा एक पहलू यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने कई बार इन नेताओं के पक्ष में भी फ़ैसले लिए। इसके बावजूद लोकसभा चुनाव 2019 में भी संवैधानिक संस्थानों पर मोदी सरकार द्वारा हमले किए जाने के आरोपों का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

इन आरोपों के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई का एक चौंकाने वाला वक्तव्य सामने आया है। इस वक्तव्य के जो मायने निकलते हैं, वो ये हैं कि कोई बड़ी शक्ति यह नहीं चाहती कि सीजेआई अगले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट में आने वाले मुकदमों पर सुनवाई करे। अगले सप्ताह जिन महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई होनी है, उनमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के विरुद्ध मिनाक्षी लेखी की ओर से दाखिल की गई अदालती अवमानना की याचिका और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बायोपिक पर चुनाव आयोग के प्रतिबंध के विरुद्ध दायर याचिका शामिल है।

सीजेआई गोगोई की महानता

वास्तव में पूरा मामला यह है कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था यानी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के विरुद्ध एक महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है। इस याचिका पर शनिवार को सुनवाई करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि सीजेआई पर आरोपों पर विशेष सुनवाई उचित बेंच यानी अन्य जजों की बेंच करेगी। अपने विरुद्ध दायर यौन उत्पीड़न की याचिका पर विशेष सुनवाई का कारण बताते हुए सीजेआई बोले, ‘मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठा है, क्योंकि चीज़ें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता।’

सीजेआई को कौन हटाना चाहता है ?

सीजेआई रंजन गोगोई ने उन पर लगाए गए आरोपों को तथ्यहीन बताने के साथ मामले पर सुनवाई के दौरान कहा, ‘आरोपों के पीछे कोई बड़ी शक्ति होगी। वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं। ये बड़ी शक्ति अगले सप्ताह मैं जिन महत्वपूर्ण मुकदमों की सुनवाई करने वाला हूँ, मुझे उन मामलों पर सुनवाई से रोकने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र न्यायपालिका को अस्थिर करने के लिए बड़ा षड्यंत्र किया गया है।’ सीजेआई के वक्तव्य से स्पष्ट है कि उनके विरुद्ध किसी महिला को मोहरा बना कर उन मामलों पर उन्हें सुनवाई से रोकने की कोशिश की जा रही है, जिन पर अगले सप्ताह सुनवाई होनी है। अब आपको यह भी बता दें कि अगले सप्ताह जिन महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई होनी है, उनमें एक मामला राहुल गांधी पर अदालती अवमानना का है और दूसरा पीएम मोदी की बायोपिक पर लगी रोक के विरुद्ध दायर याचिका का है। ये दोनों ही मामले ऐसे हैं, जिनका संबंध कांग्रेस और अध्यक्ष राहुल गांधी से है। पहले मामले में राहुल ने राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ग़लत अर्थघटन कर अदालत की अवमानना की है, उस पर फैसला आना है। चुनावों के दौरान यदि फ़ैसला राहुल के खिलाफ आए, तो कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दूसरा मामला विवेक ओबेरॉय अभिनीत फिल्म पीएम नरेन्द्र मोदी का है, जिसकी रिलीज़ पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई और चुनाव आयोग ने रोक भी लगाई। अब निर्माताओं ने इस रोक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। यदि अगले सप्ताह सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहीं रोक हटा दी, तो कांग्रेस को चुनाव में नुकसान होने का डर है। इन बातों से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि सीजेआई रंजन गोगोई अपने विरुद्ध लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के पीछे किस बड़ी शक्ति के होने का संकेत दे रहे हैं।

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