मोदी राज में ECONOMIC POWER बन रहा भारत, हाँफने लगा चीन, ब्रिटेन होगा बेहाल : बनी रही मोदी सरकार, तो हर भारतीय होगा निहाल

लगातार बढ़ता GDP करेगा ऐसे भारत का निर्माण, जिसमें करोड़ों लोगों को मिलेगा रोजगार और बढ़ेगी सैलरी भी !

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग-NDA) की सरकार ने पिछले पाँच वर्षों में आर्थिक मोर्चे पर चौतरफा द्रुतगति से प्रगति की है। स्थिति यह हो गई है कि मोदी राज में भारत एक इकोनॉमिक पावर के रूप में उभर रहा है। विकासशील देश होने के बावजूद भारत आज विकसित देशों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। भारत की एक्सप्रेस स्पीड के आगे चीन भी हाँफने लगा है। पिछले पाँच वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की दर लगातार बढ़ी है और दुनिया की कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसियों ने आने वाले वर्षों में भारत की जीडीपी दर और भी अधिक तेजी से बढ़ने का अनुमान लगाया है, जिसका सीधा प्रभाव आम आदमी पर पड़ेगा और उसके ‘अच्छे दिन’ नहीं, अपितु ‘श्रेष्ठ दिन’ आएँगे, क्योंकि जीडीपी बढ़ने का तात्पर्य यही होता है कि देश में आर्थिक मोर्चे पर मंदी नहीं है, जिसके चलते इसमें लगातार वृद्धि से करोड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा और जो लोग नौकरी-व्यवसाय कर रहे हैं, उनकी इनकम-सैलरी दोनों बढ़ेंगी।

क्या है जीडीपी और बढ़ने से आपको क्या होगा लाभ ?

किसी भी देश की अर्थ व्यवस्था की मज़बूती-कमज़ोरी की तसवीर जीडीपी दर्शा देता है। जीडीपी एक आर्थिक सकेतक है, जो देश के कुल उत्पादन को मापता है। भारत में कृषि, उद्योग और सेवा इन तीन प्रमुख घटकों के आधार पर तय होता है जीडीपी। जीडीपी बढ़ने का अर्थ है, देश में प्रत्येक क्षेत्र में उत्पादन बढ़ रहा है। लिहाजा व्यवसाय-रोजगार भी बढ़ रहे हैं। निवेशक निवेश कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ने के साथ ही रोजगार भी बढ़ता है, जिससे हर व्यक्ति की वार्षिक आय भी बढ़ती है। एक्सपर्ट्स की मानें, तो वर्तमान में देश की जीडीपी विकास दर 7.2 प्रतिशत है। इसका सीधा अर्थ यह है कि देश के उद्योग-धंधों में विकास हो रहा है। विदेशी निवेशक पैसा लगे रहे हैं, जिससे शेयर बाजार में तेजी आ रही है। इससे सामान्य निवेशकों को मोटा रिटर्न मिल रहा है। विदेशी निवेश भी बढ़ रहा है, जिससे देश की कंपनियों को विस्तार का मौका मिल रहा है। इससे नई नौकरियाँ पैदा हो रही हैं, साथ ही नौकरीपेशा लोगों को तगड़ा सैलरी-इन्क्रीमेंट मिल रहा है।

दुनिया ने कहा, ‘मोदी राज में मजबूत हुई अर्थ व्यवस्था’

UNO : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थ व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) की आर्थिक-सामाजिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018-19 में भारत की जीडीपी दर 7.2 प्रतिशत रही, जिसके 2019-20 में 7.5 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। यूनो ने तो यहाँ तक कहा कि 2020-21 में जीडीपी 7.6 प्रतिशत तक पहुँचेगा और भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे तेज गति वाला देश बनेगा। दूसरी तरफ भारत के मुकाबले चीन हाँफ रहा है। उसकी अर्थ व्यवस्था की गति लगातार घट रही है।

RBI : भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुसार 2019-20 में जीडीपी दर 7.2 रहने का अनुमान है। वाणिज्यिक क्षेत्र में श्रेष्ठ वित्त पोषण ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक खर्च बढ़ने और कर (TAX) लाभ के कारण लोगों की खर्च करने योग्य आय अधिक हुई और निजी उपभोग बढ़ा है।

ADB : एशियाई विकास बैंक ने एशियाई विकास परिदृश्य 2019 में कहा है कि नीतिगत दर में कटौती और किसानों को सरकार से आय समर्थन मिलने से घरेलू मांग में तेजी आएगी, जिससे जीडीपी दर 2020 में 7.3 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

MOODY’S : अमेरिकन रेटिंग एजेंसी मूडीज़ ने 2019-20 में भारत की जीडीपी दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एशिया भर में मंदी के बावजूद भारत पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। भारत के समक्ष अपेक्षाकृत कम जोखिम है।

IMF : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत की जीडीपी दर 2019 में 7.5 और 2020 में 7.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी। इन दो वर्षों के दौरान चीन की तुलना में भारतीय अर्थ व्यवस्था की विकास दर एक प्रतिशत अंक अधिक रहेगी। 2019 व 2020 में चीन की जीडीपी दर 6.2 प्रतिशत रहेगी, जो भारत से कहीं कम रहेगी। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थ व्यवस्था बना रहेगा।

PwC : वैश्विक सलाहकार कंपनी प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स लिमिटेड का अनुमान भारत के लिए अत्यंत उत्साहजनक है। पीडब्ल्यूसी के अनुसार भारत इसी वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्थआओं की सूची में ब्रिटेन को पछाड़ कर पाँचवें स्थान पर आ सकता है। इस वर्ष ब्रिटेन की वास्तविक जीडीपी विकास दर 1.6, फ्रांस की 1.7 तथा भारत की 7.6 रहेगी। 2017 में भारत 2,590 अरब डॉलर के बराबर जीडीपी के साथ फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बन गया था।

Fitch Ratings : फिच समूह की कंपनी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का अनुान है कि 2019-20 में भारत का जीडीपी 7.5 प्रतिसत की दर से बढ़ेगा। फिच ने इससे पहले भी कहा था कि मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थ व्यवस्था लगातार सुधर रही है, मजबूत हो रही है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच ने 2019-20 के लिए वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत तय की है। इतना ही नहीं, फिच ने यहाँ तक कहा कि अगले पाँच वर्षों में चीन को पछाड़ देगा भारत। भारत 20 सबसे बड़े उभरते बाजारों की सूची में शीर्ष पर है।

WB : विश्व बैंक के अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थ व्यवस्था बना रहेगा। अगले कुछ वर्षों में जीडीपी दर 7.5 प्रतिशत तक रह सकती है। मोदी सरकार की ओर से किए गए ढाँचागत सुधारों के परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

NA : नीति आयोग के अनुसार 2019-20 में भारत की जीडीपी दर 7.8 प्रतिशत को छू सकती है। आयोग का कहना है कि आईएमएफ और डब्ल्यू के अनुमान से कहीं अधिक रह सकती है भारत की जीडीपी दर।

CRISIL : रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थ व्यवस्था मजबूत हो रही है। यही नेतृत्व बना रहा, तो 2019 में ग्रोथ रेट 7.5 प्रतिशत तक पहुँचेगा।

HU : हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अनुसार अगले दस वर्षों में भारत दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थ व्यवस्थाओं में शीर्ष पर रहेगा और जीडीपी दर 7.9 प्रतिशत तक जाएगी, जो चीन और अमेरिका से भी अधिक रहेगी।

CID : सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपेंट ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थ व्यवस्ताओं की सूची में भारत को सबसे ऊपर रखा है। सीआईडी के अनुसार वैश्विक आर्थिक विकास की धुरि अब भारत है।

MORGAN STANLEY : वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली का दावा है कि मोदी सरकार के डिजिटलाइज़ेशन, वैश्वीकरण व सुधारों के चलते भारतीय अर्थ व्यवस्था मजबूत हुई है। अकेले डिजिटलाइज़ेशन से जीडीपी को 0.5 से 0.75 प्रतिशत बढ़त मिलेगी। 2026-27 तक भारत की अर्थ व्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। आने वाले दशक में भारत की जीडीपी दर 7.1 से 11.2 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।

मोदी ने ऐसा क्या कारनामा किया ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा देश में लागू किया गए वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कलेक्शन में मार्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। मार्च में जीएसटी कलेक्शन 1.06 लाख करोड़ रुपये के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। देश में जीएसटी लागू होने के बाद यह अब तक की सबसे अधिक वसूली है। 1,06,577 करोड़ रुपये में 20,353 करोड़ रुपये का सीजीएसटी, 27,520 करोड़ रुपये का एसजीएसटी, 50,418 करोड़ रुपये का आईजीएसटी और 8,286 करोड़ रुपये का उपकर या सेस शामिल हैं। मार्च, 2018 में राजस्‍व 92,167 करोड़ रुपये था और मार्च, 2019 में राजस्‍व वसूली पिछले वर्ष के समान महीने में की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है।

FPI का भरोसा बढ़ा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारतीय बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भरोसा बढ़ा है। एफपीआई ने मार्च में पूंजी बाजार मे 38,211 करोड़ रुपये का निवेश किया है। फरवरी में एफपीआई ने 11,182 करोड़ रुपये का निवेश किया था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने एक से 22 मार्च के दौरान शेयरों में शुद्ध रूप से 27,424.18 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि इस दौरान उन्होंने ऋण या बांड बाजार में 10,787.02 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस तरह उनका कुल निवेश 38,211.20 करोड़ रुपये रहा।

निर्यात में वृद्धि : देश का निर्यात फरवरी में 2.44 प्रतिशत बढ़कर 26.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, देश का वाणिज्यिक निर्यात फरवरी महीने में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 2.44 प्रतिशत बढ़कर 26.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान औषधि, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र के उत्पादों की निर्यात मांग बढ़ी है। इसके साथ ही फरवरी में आयात में 5.4 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 36.26 अरब डॉलर पर आ गया। इससे व्यापार घाटा में भी कमी आई है।

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक फरवरी को समाप्त सप्ताह में 2.063 अरब डॉलर बढ़कर 400.24 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है। पिछले सप्ताह देश का मुद्राभंडार 1.497 अरब डॉलर बढ़कर 398.178 अरब डॉलर हो गया था। रिजर्व बैंक के अनुसार समीक्षाधीन सप्ताह में आरक्षित स्वर्ण भंडार 76.49 करोड़ डॉलर बढ़कर 22.686 अरब डॉलर हो गया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ विशेष निकासी अधिकार 62 लाख डॉलर बढ़कर 1.470 अरब डॉलर हो गया। केन्द्रीय बैंक ने कहा कि आईएमएफ में देश का मुद्राभंडार भी 1.12 करोड़ डॉलर बढ़कर 2.654 अरब डॉलर हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब के करीब था।

जुटाये रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये : मोदी सरकार ने 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये जुटाये हैं। 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत अन्य शामिल हैं। विनिवेश में यह तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ 2019 में भी जारी रहने की उम्मीद है।

यूपीए से दोगुनी से ज्यादा राशि जुटाई : पिछले पांच साल में सरकार ने विनिवेश के जरिए रिकॉर्ड राशि जुटाई है। विनिवेश के मामले में भी मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है। अपने साढ़े 4 साल के कार्यकाल में एनडीए ने 2,09,896.11 करोड़ रुपए जुटाए जो यूपीए-1 और यूपीए-2 की कुल राशि से करीब दोगुनी ज्यादा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लगातार मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था के कारण सरकार ने पहली बार विनिवेश के जरिये एक बड़ी रकम जुटाई है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल : पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियाँ, परिवर्तनकारी परिणाम : कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच : जीएसटी, बैंकरप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानी GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

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