और राज्याभिषेक बिना ही संन्यासी बन गया “युवराज”

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम। एक समय अपने बल्ले से विस्फोटक पारियाँ खेलकर लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचने वाले भारतीय क्रिकेट के ‘युवराज’ का कभी राज्याभिषेक नहीं हो सका और अंततः अब उसने संन्यास ले लिया। हम बात कर रहे हैं भारत के ऑल राउण्डर क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह की, जिन्होंने सोमवार को नम आँखों से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। कैंसर से जंग जीतने वाला, करियर का क्रिकेट मैच हार गया।

भारत के लिये खेले 304 वनडे

सन 2000 में नैरोबी में केन्या के विरुद्ध एक दिवसीय क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने भारत के लिये 304 एक दिवसीय मैच, 40 टेस्ट मैच और 58 टी-20 मैच खेले हैं। उन्होंने एक दिवसीय मैचों में 14 शतक और 52 अर्ध शतकों के साथ कुल 8,701 रन बनाये हैं। वहीं 40 टेस्ट मैच की 62 पारियों में 3 शतक और 11 अर्ध शतकों के साथ 1,900 रन और टी-20 मैचों में 8 अर्ध शतकों के साथ कुल 1,177 रन बनाये हैं। वनडे में उनका सर्वोच्च स्कोर 150, टेस्ट में 169 और टी-20 में 77 नोट आउट है। युवराज सिंह ने बल्ले के साथ-साथ बाएँ हाथ से स्पिन गेंदबाजी करते हुए टेस्ट में 11, वनडे में 111 और टी-20 में 28 विकेट भी लिये हैं।

टी-20 वर्ल्डकप 2007 में मारे थे एक ओवर में 6 छक्के

2007 में खेले गये पहले टी-20 वर्ल्डकप टूर्नामेंट में इंग्लैंड और भारत के बीच खेले गये मुकाबले में युवराज सिंह स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में सभी 6 गेंदों पर छक्के लगाकर 12 गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक लगाया था। उनकी यह पारी भारतीय क्रिकेट का एक ऐसा सुनहरा इतिहास बन गई है, जिसे अब तक कोई नहीं भूला है। इस विश्वकप में भारत को विजेता बनाने में युवराज सिंह की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

खून की उल्टियाँ करते हुए खेला था 2011 का वर्ल्डकप टूर्नामेंट

इसी प्रकार 2011 में खेली गई 10वीं वर्ल्डकप टूर्नामेंट में भी भारत की जीत में युवराज सिंह का योगदान महत्वपूर्ण रहा था और उन्होंने विश्वकप के 9 मैचों में 362 रन बनाने के साथ-साथ 15 विकेट भी चटकाए थे। इस कारण वह ‘मैन ऑफ दी सीरीज़’ चुने गये थे। इस विश्वकप के दौरान ही उन्हें पता चला था कि उन्हें कैंसर जैसी भयंकर बीमारी है, इसके बावजूद मैदान पर खून की उल्टियाँ करके भी उन्होंने पारियाँ खेली थी।

युवराज सिंह ने अपना अंतिम टेस्ट मैच सन् 2012 में कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान पर इंग्लैंड के विरुद्ध खेला था। जबकि अंतिम वनडे मैच 30 जून-2017 को वेस्ट इंडीज के विरुद्ध वेस्ट इंडीज में खेला था और अंतिम टी-20 मैच 1 फरवरी-2017 को इंग्लैंड के विरुद्ध बंगलुरु में खेला था।

कभी कप्तान नहीं बन पाया ‘युवराज’

अपने शुरुआती करियर में युवराज सिंह ने अपने ऑल राउण्डर प्रदर्शन से खूब लोकप्रियता बटोरी थी और उन्हें भविष्य का कप्तान माना जाता था, परंतु युवराज के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव के साथ ही वह टीम में भी अंदर-बाहर होते रहे। इसी कारण उनके प्रदर्शन में निरंतरता का अभाव रहा और उनका क्रिकेट करियर गोते खाता रहा। सौरव गांगुली की कप्तानी वाली टीम में उन्हें सचिन, सौरव, वीरेन्द्र सहवाग, मोहम्मद कैफ और जहीर खान जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिला था, उनके यह सभी समकक्ष साथी पहले ही संन्यास ले चुके हैं। 2003 में विकेटकीपर बल्लेबाज महेन्द्रसिंह धोनी की एंट्री के बाद धोनी ने निरंतर अच्छे प्रदर्शन से टीम में न सिर्फ अपनी जगह पक्की कर ली, बल्कि 2006 में वह टीम के कप्तान भी बन गये। वहीं युवराज सिंह कुछ मैचों में उपकप्तान की भूमिका तक ही सीमित रह गये। यहाँ तक कि 2011 के वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में श्रेष्ठ प्रदर्शन के बावजूद वह टीम में अपनी स्थाई जगह के लिये जूझते रहे और उनका कप्तान बनने का सपना तो सपना ही रह गया।

युवराज सिंह ने प्राइवेट क्रिकेट में आईपीएल के पिछले टूर्नामेंट में मुंबई इंडियंस की ओर से शुरुआत के कुछ मैच खेले। इसके बाद उसमें भी उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। अब माना जा रहा है कि युवराज को कनाडा से आईसीसी द्वारा मान्य टी-10 और टी-20 फॉर्मेट के कुछ टूर्नामेंट में खेलने के लिये अवसर मिल रहे हैं, जिससे वह संन्यास लेने के बाद उन टूर्नामेंट में फ्रीलांस खिलाड़ी के रूप में खेलते दिखाई दे सकते हैं।

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