जानिए, भारत के सबसे खतरनाक ब्लैक कैट कमांडो के बारे में : कैसे बनते हैं और कितनी मिलती है सैलरी ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 16 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। आपने भारत के सबसे खतरनाक ब्लैक कैट कमांडो के बारे में तो सुना ही होगा। अक्सर इन्हें प्रधानमंत्री से लेकर अन्य वीवीआईपी (VVIP) लोगों की सुरक्षा में तैनात देखा जाता है। इसके अलावा यह आतंकी हमले जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक ऑपरेशन को अंजाम देते हैं। यह कमांडो सिर से पाँव तक काले रंग के कपड़ों से ढँके रहते हैं, इसलिये इन्हें ब्लैक कैट कमांडो कहा जाता है। आप भी जानिए कैसे बनते हैं ब्लैक कैट कमांडो और इन्हें कितनी सैलरी मिलती है ?

कैसे बनते हैं ब्लैक कैट कमांडो ?

ब्लैक कैट कमांडो बनना आसान नहीं है, यह सबसे मुश्किल कामों में से एक है। इसका प्रशिक्षण बहुत ही कठिन है। इन्हें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) गार्ड या कमांडो भी कहा जाता है। एनएसजी कमांडो के लिये भारतीय सेनाओं और अर्ध सैनिक बलों के सबसे काबिल सैनिकों को चुना जाता है और उन्हें प्रशिक्षण देकर एनएसजी कमांडो बनाया जाता है। एनएसजी में 53 प्रतिशत कमांडो भारतीय सेना से आते हैं, जबकि शेष 47 प्रतिशत कमांडो 4 अर्ध सैनिक बलों यानी सीआरपीएफ (CRPF), आईटीबीपी (ITBP), आरएएफ (RAF) और बीएसएफ (BSF) से चुने जाते हैं। अधिक से अधिक योग्य कमांडो चुनने के लिये इनका कई चरणों में चुनाव होता है। इसके बाद पहले एक सप्ताह की कठोर ट्रेनिंग दी जाती है। इस ट्रेनिंग में 80 प्रतिशत सैनिक फेल हो जाते हैं और मात्र 15 से 20 प्रतिशत सैनिक ही अंतिम दौड़ में पहुँचने में सफल होते हैं। इसके बाद अंतिम दौड़ में आए सैनिकों को 90 दिन की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें उन्हें हथियारों के साथ और बिना हथियार के दुश्मनों के हथियारों से बचने और उन पर फतह करने की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके लिये इन सैनिकों को आग के गोल और गोलियों की बौछारों के बीच से बचकर निकलना होता है। तीन महीने की यह कड़ी ट्रेनिंग पास करने वाले सैनिक देश के सबसे खतरनाक और ताकतवर कमांडो में शामिल होने के योग्य बनते हैं। हर तरह की ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पास करने के बाद कमांडो बनने से पहले अंतिम दौर में उन्हें मनोवैज्ञानिक टेस्ट भी पास करना होता है। अब एनएसजी यह विचार कर रहा है कि एनएसजी कमांडो का मनोवैज्ञानिक टेस्ट भी एसपीजी की तर्ज पर हो तो ज्यादा उचित रहेगा। अभी एनएसजी डीआरडीओ (DRDO) के तहत तैयार किये जाने वाले मनोवैज्ञानिक टेस्ट से गुजरते हैं, जिसमें 700 से 1,000 कमांडो भाग लेते हैं। प्रधानमंत्री व अन्य वीवीआईपी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सँभालने वाले एसपीजी कमांडो वियेना टेस्ट सिस्टम के माध्यम से कंप्यूटराइज्ड मनोवैज्ञानिक टेस्ट से गुजरते हैं, इसके माध्यम से ज्यादा सटीक परिणाम प्राप्त होने की उम्मीद की जाती है। यह कमांडो हमेशा सिर से पाँव तक काले लिबास में ढँके रहते हैं, इसलिये इन्हें ब्लैक कैट कमांडो कहते हैं। इनका कार्यकाल 5 साल का होता है।

एनएसजी कमांडो को कितनी मिलती है सैलरी ?

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी (NSG) की शुरुआत 1984 में की गई। प्रारंभ में इस ग्रुप का गठन वीवीआईपी की सुरक्षा के लिए किया गया था, बाद में इसे आतंकवाद से निपटने के लिये भी इस्तेमाल किया जाने लगा। ब्लैक कैट कमांडो का वेतन 84 हजार रुपये प्रति माह से शुरू होकर ढाई लाख रुपये प्रति माह तक होता है। इन्हें औसत वेतन प्रति माह लगभग डेढ़ लाख रुपये मिलता है, इसके अलावा इन्हें कई तरह की सुविधाएँ और भत्ते भी दिये जाते हैं। सेनाओं में कम के कम 10 वर्ष की सेवाएँ देने के बाद कमांडो की ट्रेनिंग में भाग लिया जा सकता है और कमांडो को उनकी रैंक तथा अनुभव के आधार पर भी वेतन बढ़ाकर दिया जाता है।

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